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Ashadh Purnima Vrat 2026: कब है आषाढ़ पूर्णिमा व्रत? जानिए पूजा विधि और चंद्रोदय का समय, प्राप्त होगी सुख-शांति

Ashadh Purnima Vrat 2026: पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ और पावन माना जाता है. यह दिन व्रत, पूजा, उपाय और नदियों में स्नान-दान करने के लिए खास होता है. अब जुलाई महीने में आषाढ़ माह की पूर्णिमा आने वाली है. आषाढ़ पूर्णिमा व्रत कब है आइये इसके बारे में जानते हैं.

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Ashadh Purnima Vrat 2026: आषाढ़ माह की पूर्णिमा पर व्रत और उपाय करने से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति कर सकते हैं. हिंदू धर्म में पूर्णिमा का दिन दान-पुण्य के काम के लिए बेहद शुभ होता है. खासकर आषाढ़ पूर्णिमा बेहद शुभ मानी जाती है. इस दिन को गुरु पूर्णिमा के तौर पर मनाया जाता है. आषाढ़ पूर्णिमा व्रत की सटीक तारीख, चंद्रोदय के समय और पूजा विधि के बारे में आप यहां विस्तार से जान सकते हैं.

कब है आषाढ़ पूर्णिमा व्रत? (Ashadh Purnima Vrat Kab Hai)

आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 28 जुलाई 2026 मंगलवार की शाम को 6 बजकर 18 मिनट पर हो रहा है. इस तिथि का समापन अगले दिन 29 जुलाई 2026 दिन बुधवार को रात 8 बजकर 5 मिनट पर होगा. पूर्णिमा व्रत के दिन चंद्रोदय को महत्व दिया जाता है. ऐसे में चंद्रोदय के समय को महत्व देते हुए. आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत 29 जुलाई 2026 दिन बुधवार को रखा जाएगा.

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चंद्रोदय का समय और शुभ मुहूर्त (Ashadh Purnima Moonrise Time)

आषाढ़ पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय 29 जुलाई की शाम को 7 बजकर 21 मिनट पर होगा. इस समय चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं. इसके अलावा पूर्णिमा पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सूर्योदय से लेकर दोपहर तक उत्तम रहेगा. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 17 मिनट पर आरंभ होगा. इसके बाद विजय मुहूर्त का अंत दोपहर 02 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. इस दौरान पवित्र नदी में स्नान और दान-पुण्य के काम कर सकते हैं.

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आषाढ़ पूर्णिमा पूजा विधि और उपाय (Ashadh Purnima Puja Vidhi)

पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठने के बाद पवित्र नदी में स्नान करें. अगर नदी में स्नान कर पाना संभव नहीं है, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. स्नान कर साफ कपड़े पहनें. घर के मंदिर की सफाई कर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें. आषाढ़ पूर्णिमा का दिन गुरु पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है. आप अपने गुरु की प्रतिमा स्थापित कर पूजा कर सकते हैं. भगवान के समक्ष धूप, दीपक, फूल, फल और प्रसाद आदि अर्पित करें. पूर्णिमा पर शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य अवश्य दें. पूर्णिमा पर दान-पुण्य के काम करने से इसका कई गुना अधिक लाभ मिलता है. आप अन्न, वस्त्र और अपने सामर्थ्य अनुसार धन का दान करें.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Jul 20, 2026 01:38 PM

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