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Kajari Teej 2026: कल कजरी तीज पर जरूर करें ये आरती, वरना अधूरा माना जाएगा आपका व्रत

Kajari Teej 2026: कजरी तीज पर अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत करना चाहिए. इस दिन व्रत करने से पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना पूर्ण होती है.

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Kajari Teej 2026: पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए कजरी तीज का व्रत करना चाहिए. कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा. कजरी तीज के पर्व पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का महत्व होता है. आपको शिव-पार्वती की पूजा के साथ ही माता पार्वती और शिव जी की आरती करनी चाहिए. तभी व्रत का संपूर्ण फल मिलता है. आप कजरी तीज का व्रत कर रही हैं, तो यहां दी गई इन आरती को अवश्य करें. वरना आपका व्रत अधूरा माना जाएगा और पूजा का फल नहीं मिलेगा.

पार्वती माता की आरती (Parvati Mata Aarti Lyrics)

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता।।
जय पार्वती माता।
अरि कुल पद्मा विनाशिनी, जय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता।।
जय पार्वती माता।
सिंह को वाहन साजे, कुंडल है साथा।
देव वधु जहं गावत, नृत्य कर थाथा।।
जय पार्वती माता।
सत्युग शील सुसुन्दर, नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी, सखियन रंगराता।।
जय पार्वती माता।
शुम्भ-निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्याता।
सहस भुजा तनु धरिके, चक्र लियो हाथा।।
जय पार्वती माता।

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ये भी पढ़ें – Kajari Teej 2026: कजरी तीज व्रत से होगी अखंड सौभाग्य की प्राप्ति, यहां जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

शिव जी की आरती (Shiv Ji Ki Aarti)

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

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श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Aug 30, 2026 03:47 PM

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