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Krishna Janmashtami 2026: कैसे शुरू हुई भगवान श्रीकृष्ण को ‘छप्पन भोग’ लगाने की परंपरा? जानिए इसके पीछे की वजह

Krishna Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया जाता है. उन्हें 56 प्रकार के अलग-अलग व्यंजनों से भोग लगाने की परंपरा है. उन्हें 56 भोग लगाने की परंपरा गोवर्धन पर्वत उठाने को लेकर जुड़ी है.

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Krishna Janmashtami 2026: भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है. अब 4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और उन्हें भोग लगाने की परंपरा निभाई जाती है. कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भक्त व्रत करते हैं. इस दिन जगह-जगह कृष्ण लीला का मंचन किया जाता है. मंदिरों में भक्त श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाते हैं. भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग क्यों लगाया जाता है? इसकी शुरुआत कैसे हुए आइये जानते हैं.

क्यों लगाया जाता है 56 भोग?

हिंदू धर्म में 5, 7, 11, 21 और 51 आदि अंकों को शुभ माना जाता है. लेकिन श्रीकृष्ण को 11, 21 और 51 नहीं बल्कि, 56 भोग लगाए जाते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में 56 भोग लगाने की परंपरा को लेकर सवाल आता है. आखिर किस तरह से भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाने के लिए संख्या तय की गई. इसके बारे में आप पौराणिक कथा के जरिए समझ सकते हैं.

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भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, हर साल गोकुल के वासी इंद्रदेव की पूजा करते थे. अच्छी बारिश और खेती के लिए गोकुलवासी इंद्रदेव का धन्यवाद करने के लिए पूजा करते थे. एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने सभी को बताया कि, हमारा असली सहारा गोवर्धन पर्वत है. गोवर्धन पर्वत बादलों को रोककर बारिश और अनाज का आधार बनता है. श्रीकृष्ण की बात मानकर गोकुल के सभी वासियों ने इंद्रदेव की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा की.

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नाराज हो गए इंद्रदेव

सभी गोकुलवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण की बात मान ली, जिससे इंद्र नाराज हो गए. इसके कारण इंद्रदेव ने भारी बारिश बरसाई. जिससे गोकुलवासियों के ऊपर संकट आ गया. इसके बाद श्रीकृष्ण ने छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और पूरे गांव को आश्रय दिया. उन्होंने 7 दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर रखा. इसके बाद इंद्रदेव का घमंड टूट गया और गलती का अहसास हुआ.

7 दिनों बाद श्रीकृष्ण को लगाया गया 56 भोग

श्रीकृष्ण ने 7 दिनों तक गोवर्धन पर्वत को बिना कुछ खाएं उंगली पर उठाकर रखा. कथाओं के अनुसार, मां यशोदा श्रीकृष्ण को रोजाना अलग-अलग आठों प्रहर में 8 भोजन देती थीं. इस प्रकार 7 दिनों के 8 प्रहर के भोजन के मुताबिक, श्रीकृष्ण को 7×8=56 भोग लगाएं गए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन से भगवान कृष्‍ण को प्रसन्‍न करने के लिए 56 भोग लगाने की परंपरा का आरंभ हुआ.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Aug 31, 2026 02:42 PM

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