Nautapa 2026: नौतपा के 9 दिन करें Varun Dev Ki Aarti, भीषण गर्मी से मिलेगा 'Instant Relief', देखें Lyrics

Nautapa Mai Garmi Se Bachne Ka Tarika: वरुण देव को सनातन धर्म में जल के देवता का स्थान प्राप्त है, जिनकी पूजा करने से ‘Scorching Heat’ से छुटकारा मिल सकता है. खासकर, नौतपा में भीषण गर्मी से ‘Instant Relief’ पाने के लिए लोग वरुण देव की आरती करते हैं. यहां पर आप वरुण देव की पूजा विधि, आरती के लिरिक्स और पूजा करने के लाभ आदि के बारे में विस्तार से जान सकते हैं.

varun dev ki aarti

Credit- AI Gemini

Nautapa 2026: साल के सबसे गर्म 9 दिन यानी नौतपा की शुरुआत हो गई है. आज 25 मई 2026 को नौतपा का पहला दिन है. अब आने वाले 9 दिन यानी 2 जून 2026 तक लोगों को चिलचिलाती गर्मी और लू का सामना करना ही पड़ेगा. हालांकि, कुछ धार्मिक उपायों को अपनाकर नौतपा की ‘Scorching Heat’ से बचा भी जा सकता है. जैसे कि आप नौतपा के 9 दिन वरुण देव की आराधना कर सकते हैं, जिन्हें शास्त्रों में जल का देवता माना गया है. वरुण देव की पूजा करने से मन को शांति मिलने के साथ-साथ ठंडक भी मिलती है, जिससे गर्मी नहीं लगती है.

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खासकर, नौतपा में वरुण देव की आरती करना शुभ होता है. इससे भीषण गर्मी से आपको ‘Instant Relief’ मिल सकता है. चलिए अब जानें वरुण देव की आरती के लिरिक्स और पूजा विधि के बारे में.

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वरुण देव की आरती

रत्नाकर तले शोभित रत्न सिंहासन, विभावरी तव लोक पावन मनभावन।
वैदूर्य सम कान्ति, कौशेय धारण, मूंगा मणि आविष्ट, कर केयुर स्थापित, कुंडल कानन‌।
जय देव, जय देव, जय जय जलदाता, श्री वरुण जलदाता।
अदिति कश्यप नंदन, चर्षणीनाथा।। जय देव, जय देव।
राजा हरिश्चंद्र के तुम ही फलदायक, श्रुतायुध वरदायक, तुम जल के नायक।
अरिनाशक, जगपालक, शुन:शेपोद्धारक, सहस्र हय ऋिचीक दिए कृपाकारक। १।
जय देव, जय देव, जय जय जलदाता, श्री वरुण जलदाता।
शंख कमल शोभित तुम पाश रखिया, राजत माथे चंदन कंठ हार कंचनिया।
तक्षक, कम्बल,वासुकि, सेवा है करिया, दास श्रीनाथ का आरती लिखिया। २।
जय देव, जय देव, जय जय जलदाता, श्री वरुण जलदाता।
अदिति कश्यप नंदन, चर्षणीनाथा।। जय देव, जय देव।

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वरुण देव की पूजा कैसे करें?

  • प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करके हल्के रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  • घर के मंदिर में चौकी पर एक तांबे या मिट्टी के कलश में शुद्ध जल भरकर रखें.
  • कलश के मुख पर कलावा बांधें और उसके ऊपर एक आम का पत्ता रखें. फिर पत्ते के ऊपर पानी वाला नारियल रखें.
  • कलश के आगे कुमकुम, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें.
  • हाथ में एक फूल और अक्षत लेकर वरुण देव का ध्यान करें.
  • घी का दीपक जलाने के बाद आरती करें.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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