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Tirupati Balaji Ki Aarti: श्री वेंकटेश्वर स्वामी को प्रसन्न करने के लिए श्री तिरुपति बालाजी की आरती, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि

Tirupati Balaji Ki Aarti: श्री तिरुपति बालाजी को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धापूर्वक पूजा करें और आरती अवश्य करें. श्री वेंकटेश्वर स्वामी की आरती करने से जीवन में शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी. आप यहां श्री तिरुपति बालाजी आरती के लिरिक्स पढ़ सकते हैं.

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Tirupati Balaji Ki Aarti: दक्षिण भारत में भगवान विष्णु के वेंकटेश्वर स्वरूप की पूजा की जाती है. भगवान विष्णु को समर्पित तिरुमला तिरुपति मंदिर में भक्तों की खूब भीड़ लगती है. श्रीहरि विष्णु भगवान की कृपा पाने के लिए भक्त तिरुपति मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं. यहां पर भक्त अपने बाल दान करते हैं. यहां भगवान विष्णु को तिरुपति बालाजी और श्री वेंकटेश्वर के नाम से जानते हैं. आप जीवन में सुख-समृद्धि और शांति के लिए श्री वेंकटेश्वर भगवान की पूजा अर्चना करें. इसके साथ ही आरती अवश्य करें. श्री तिरुपति बालाजी की आरती करने से आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी.

Tirupati Balaji Ki Aarti | श्री तिरुपति बालाजी आरती

जय तिरुपति बालाजी, जय तिरुपति बालाजी,
जय जय वेंकट स्वामी, तुम हो अंतर्यामी,
जय श्री नाथ हरी, जय तिरुपति बालाजी,
जय तिरुपति बालाजी, जय तिरुपति बालाजी,
जय जय वेंकट स्वामी, तुम हो अंतर्यामी,
जय श्री नाथ हरी, जय तिरुपति बालाजी
अगणित नाम तुम्हारे अगणित रूप धरे,
स्वामी अगणित रूप धरे, तुमको ध्याये उनके,
तुमको ध्याये उनके, तुमने कष्ट हरे,
जय तिरुपति बालाजी,
दाएं कर में सुदर्शन बाएं में शंख धरे,
बाएं कर में शंख धरे, द्वार पे आये जो भी,
द्वार पे आये जो भी, कामना सफल करे,
जय तिरुपति बालाजी,
असुर बलि को हरनी वराह स्वरुप लिया,
स्वामी वराह स्वरुप लिया, अर्धांगिनी धरती संग,
अर्धांगिनी धरती संग, गिरी पर वास किया,
जय तिरुपति बालाजी
सतयुग में गरुड़ाद्रि, त्रेता में वृषभाद्रि,
गिरी कहलाया वृषभाद्रि, द्वापर में अंजनाद्रि,
द्वापर में अंजनाद्रि, कलि में वेंकटाद्रि,
जय तिरुपति बालाजी

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भूमि पर ऋषियों ने मिलकर यज्ञ किया,
फल यज्ञ का तुमको दिया, वैंकुंठ त्याग धरा पर,
वैंकुंठ त्याग धरा पर, तुमने वास किया,
जय तिरुपति बालाजी
लक्ष्मी ने पद्मावती बनकर जनम लिया,
धरती पर जनम लिया, बन में सखियों के संग,
विचर रही थी वे जग, तुमसे मिलन हुआ,
जय तिरुपति बालाजी
तिरुपति नाथ की महिमा जो निसदिन गाये,
वरदान वो नित पाये, धन वैभव सुख सारे,
धन वैभव सुख सारे, जीवन भर पाये,
जय तिरुपति बालाजी, जय जय वेंकट स्वामी,
तुम हो अंतर्यामी, जय श्री नाथ हरी,
जय तिरुपति बालाजी, जय तिरुपति बालाजी,
जय तिरुपति बालाजी, जय जय वेंकट स्वामी,
तुम हो अंतर्यामी, जय श्री नाथ हरी,
जय तिरुपति बालाजी

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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First published on: Jul 01, 2026 03:36 PM

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