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कामाख्या मंदिर के अंबुबाची मेले में नहीं जा पा रहे? घर पर Maa Kamakhya Chalisa पढ़कर जगाएं अपनी किस्मत, देखें Lyrics

Maa Kamakhya Chalisa Lyrics: असम के कामाख्या मंदिर में इस समय अंबुबाची मेला लग रहा है. यदि किसी कारण से आप कामाख्या मंदिर नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर रहकर भी Maa Kamakhya Chalisa पढ़कर अपनी किस्मत चमका सकते हैं. चलिए जानें इस चालीसा के लिरिक्स, महत्व और लाभ आदि के बारे में.

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Maa Kamakhya Devi Chalisa Lyrics: असम के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में प्रत्येक वर्ष 22 जून से करीब 26 जून तक विश्वप्रसिद्ध अंबुबाची मेला लगता है, जिसमें हर बार बड़ी संख्या में भक्तजन शामिल होते हैं. मान्यता है कि इस दौरान आदिशक्ति महामाया के शक्तिशाली स्वरूप मां कामाख्या की पूजा करने से हर इच्छा पूरी हो सकती है. यदि किसी कारण से आप भी कामाख्या मंदिर में दर्शन करने के लिए नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर रहकर भी मां कामाख्या की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं. माना जाता है कि इस विशेष अवधि के दौरान पूरी श्रद्धा से मां कामाख्या चालीसा का पाठ करने से हर व्यक्ति को महालाभ होता है. खासकर, नकारात्मक ऊर्जा और जीवन की तमाम समस्याओं से मुक्ति मिलती है.

आइए अब जानें मां कामाख्या चालीसा के लिरिक्स और इससे जुड़ी अन्य जरूरी बातों के बारे में.

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मां कामाख्या चालीसा

॥ दोहा ॥

सुमिरन कामाख्या करुँ, सकल सिद्धि की खानि।
होइ प्रसन्न सत करहु माँ, जो मैं कहौं बखानि॥

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जै जै कामाख्या महारानी। दात्री सब सुख सिद्धि भवानी॥
कामरुप है वास तुम्हारो। जहँ ते मन नहिं टरत है टारो॥
ऊँचे गिरि पर करहुँ निवासा। पुरवहु सदा भगत मन आसा।
ऋद्धि सिद्धि तुरतै मिलि जाई। जो जन ध्यान धरै मनलाई॥
जो देवी का दर्शन चाहे। हदय बीच याही अवगाहे॥
प्रेम सहित पंडित बुलवावे। शुभ मुहूर्त निश्चित विचारवे॥
अपने गुरु से आज्ञा लेकर। यात्रा विधान करे निश्चय धर।
पूजन गौरि गणेश करावे। नान्दीमुख भी श्राद्ध जिमावे॥
शुक्र को बाँयें व पाछे कर। गुरु अरु शुक्र उचित रहने पर॥
जब सब ग्रह होवें अनुकूला। गुरु पितु मातु आदि सब हूला॥
नौ ब्राह्मण बुलवाय जिमावे। आशीर्वाद जब उनसे पावे ॥
सबहिं प्रकार शकुन शुभ होई। यात्रा तबहिं करे सुख होई॥
जो चह सिद्धि करन कछु भाई। मंत्र लेइ देवी कहँ जाई॥
आदर पूर्वक गुरु बुलावे। मन्त्र लेन हित दिन ठहरावे॥
शुभ मुहूर्त में दीक्षा लेवे। प्रसन्न होई दक्षिणा देवै॥
ॐ का नमः करे उच्चारण। मातृका न्यास करे सिर धारण॥
षडङ्ग न्यास करे सो भाई। माँ कामाक्षा धर उर लाई॥
देवी मन्त्र करे मन सुमिरन। सन्मुख मुद्रा करे प्रदर्शन॥
जिससे होई प्रसन्न भवानी। मन चाहत वर देवे आनी॥
जबहिं भगत दीक्षित होइ जाई। दान देय ऋत्विज कहँ जाई॥
विप्रबंधु भोजन करवावे। विप्र नारि कन्या जिमवावे॥
दीन अनाथ दरिद्र बुलावे। धन की कृपणता नहीं दिखावे॥
एहि विधि समझ कृतारथ होवे। गुरु मन्त्र नित जप कर सोवे॥
देवी चरण का बने पुजारी। एहि ते धरम न है कोई भारी॥
सकल ऋद्धि – सिद्धि मिल जावे । जो देवी का ध्यान लगावे॥
तू ही दुर्गा तू ही काली। माँग में सोहे मातु के लाली॥
वाक् सरस्वती विद्या गौरी। मातु के सोहैं सिर पर मौरी॥
क्षुधा, दुरत्यया, निद्रा तृष्णा। तन का रंग है मातु का कृष्णा।
कामधेनु सुभगा और सुन्दरी। मातु अँगुलिया में है मुंदरी॥
कालरात्रि वेदगर्भा धीश्वरि। कंठमाल माता ने ले धरि॥
तृषा सती एक वीरा अक्षरा। देह तजी जानु रही नश्वरा॥
स्वरा महा श्री चण्डी। मातु न जाना जो रहे पाखण्डी॥
महामारी भारती आर्या। शिवजी की ओ रहीं भार्या॥
पद्मा, कमला, लक्ष्मी, शिवा। तेज मातु तन जैसे दिवा॥
उमा, जयी, ब्राह्मी भाषा। पुर हिं भगतन की अभिलाषा॥
रजस्वला जब रुप दिखावे। देवता सकल पर्वतहिं जावें॥
रुप गौरि धरि करहिं निवासा। जब लग होइ न तेज प्रकाशा॥
एहि ते सिद्ध पीठ कहलाई। जउन चहै जन सो होई जाई॥
जो जन यह चालीसा गावे। सब सुख भोग देवि पद पावे॥
होहिं प्रसन्न महेश भवानी। कृपा करहु निज – जन असवानी॥

॥ दोहा ॥
कर्हे गोपाल सुमिर मन, कामाख्या सुख खानि।
जग हित माँ प्रगटत भई, सके न कोऊ खानि॥

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॥श्री गुरुदत्तात्रेयार्पणमस्तु॥
||श्री स्वामी समर्थापर्ण मस्तु||

ये भी पढ़ें- अंबुबाची का मतलब क्या है? जानें कामाख्या मंदिर के Ambubachi Mela से जुड़े 5 रहस्य

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

Frequently Asked Questions

मां कामाख्या चालीसा में माता कामाख्या के स्वरूप, महिमा, उत्पत्ति और उनके द्वारा किए गए विभिन्न चमत्कारों का वर्णन किया गया है.
ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल के दौरान इसका पाठ करना सबसे उत्तम माना गया है.
First published on: Jun 25, 2026 01:52 PM

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Nidhi Jain

निधि की पढ़ने और लिखने में हमेशा से रुचि रही है. पिछले 3 साल से वह डिजिटल मीडिया से जुड़ी हुई हैं. वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रही हैं. न्यूज 24 से जुड़ने से पहले निधि जैन दिल्ली प्रेस संस्थान में कार्यरत थीं. निधि ने Guru Jambheshwar University, Hisar Haryana से BJMC (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई की है.

📧 Email: nidhi.jain@bagconvergence.in

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