साल में सिर्फ 2 दिन गुलजार होता है पंजाब का यह रेलवे स्टेशन स्टेशन, वजह जानकर भर आएंगी आंखें
आमतौर पर रेलवे स्टेशन 24 घंटे की हलचल और ट्रेनों की आवाजाही के लिए जाने जाते हैं, लेकिन पंजाब में एक ऐसा स्टेशन है जो इस परिभाषा को पूरी तरह बदल देता है. भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब स्थित हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन साल में केवल दो विशेष दिनों पर ही सक्रिय होता है. फिरोजपुर कैंट से शुरू होने वाली यह रेल लाइन यहां आकर खत्म हो जाती है, जिससे यह भारत के रेल नेटवर्क का एक 'डेड एंड' बन जाता है.

आमतौर पर रेलवे स्टेशन 24 घंटे की हलचल और ट्रेनों की आवाजाही के लिए जाने जाते हैं, लेकिन पंजाब में एक ऐसा स्टेशन है जो इस परिभाषा को पूरी तरह बदल देता है. भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब स्थित हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन साल में केवल दो विशेष दिनों पर ही सक्रिय होता है. फिरोजपुर कैंट से शुरू होने वाली यह रेल लाइन यहां आकर खत्म हो जाती है, जिससे यह भारत के रेल नेटवर्क का एक 'डेड एंड' बन जाता है.
वीरान प्लेटफॉर्म
2 / 6पंजाब के फिरोजपुर बॉर्डर पर स्थित हुसैनीवाला स्टेशन साल के अधिकांश समय वीरान रहता है. यहां ट्रेनें रोज नहीं, बल्कि पूरे कैलेंडर वर्ष में केवल दो विशेष तारीखों पर ही अपनी दस्तक देती हैं.
शहादत को नमन - 23 मार्च
3 / 6इस स्टेशन के जीवंत होने की पहली वजह 23 मार्च यानी शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का शहादत दिवस है. इस दिन शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए देशभर से लोग यहां विशेष ट्रेन के जरिए पहुंचते हैं.
बैसाखी की रौनक - 13 अप्रैल
4 / 6साल का दूसरा मौका 13 अप्रैल को 'बैसाखी' के त्योहार पर आता है. इस दिन श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए रेलवे फिर से यहां एक विशेष ट्रेन सेवा संचालित करता है.
रेलवे लाइन का अंत
5 / 6हुसैनीवाला स्टेशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां रेल की पटरियां हमेशा के लिए खत्म हो जाती हैं। ट्रेन जिस पटरी से आती है, उसी से वापस लौटती है क्योंकि आगे का सफर केवल सड़क मार्ग से संभव है।
इतिहास की गूंज
6 / 6फिरोजपुर और हुसैनीवाला सीमा के बीच स्थित यह छोटा सा हॉल्ट स्टेशन आज भी भारत के गौरवशाली इतिहास और सरहद की शांति का गवाह बना हुआ है. सोशल मीडिया पर इसकी सादगी और शांत माहौल चर्चा का विषय बना है.



















