भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है, क्योंकि उनके निलंबन के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी गई है. साथ ही चुनाव आयोग और कानून मंत्रालय को नोटिस भी जारी किया गया है, जिसका जवाब जल्द देने के निर्देश हैं. CJI की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय बेंच ने याचिका पर सुनवाई की और अगले हफ्ते के लिए सुनवाई को टाल दिया. इससे पहले सुनवाई गत 29 सितंबर को हुई थी, जब बेंच के सामने याचिका को रखा गया था. बेंच में चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं.
याचिकाकर्ता के वकील की सुप्रीम कोर्ट से मांग
सुप्रीम कोर्ट बेंच से याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने अंतरिम आदेश देने की मांग की. उन्होंने कहा कि मामले में चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि जब तक फैसला नहीं होता, तब तक ECI सभी फैसले बहुमत से ले. इसके जवाब में बेंच ने कहा कि न्यूज रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को सस्पेंड नहीं किया जा सकता. ECI और कानून मंत्रालय को नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया है कि चुनाव आयोग ने बहुत से फैसले लेने वाले कानून का पालन किया या नहीं. इस सवाल का जवाब आने के बाद ही कोई फैसला किया जाएगा, तब तक मामले में CEC को राहत दी जाती है.
CEC ज्ञानेश के खिलाफ याचिका में कहा गया?
बता दें कि बिहार के पटना निवासी राकेश कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. याचिका में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी लिए बिना फैसले किए हैं. जबकि चुनाव आयोग 3 सदस्यीय संस्था है तो सभी फैसले बहुमत से लिए जाने चाहिए. लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त होने के नाते मिली शक्तियों का इस्तेमाल अकेले किया. इसलिए सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करके काम करने से रोके. वहीं भारत के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली समिति की सिफारिश पर ही खाली पद पर निुयक्ति की जाए.
याचिकाकर्ता की ये रिकॉर्ट संरक्षित करने की मांग
याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने मांग की है कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि 1 अक्टूबर 2026 से लेकर याचिका का निपटारा होने तक संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं. इसमें फाइल नोटिंग, मिनट्स ऑफ मीटिंग, परमिशन लेटर, पत्राचार, IT एक्सेस रिकॉर्ड, सर्वर लॉग, ऑडिट ट्रेल और वोटर लिस्टों में बदलाव की हिस्ट्री शामिल है. इसके अलावा ERoNet/ECINet, फॉर्म-6 में बदलाव, SIR और पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी अपीलों के रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखे जाएं.