Gulab Jamun Is Iranian Dish: भारत में मिठाइयों की बात हो और गुलाब जामुन का नाम ना आए, ऐसा हो ही नहीं सकता… हर मुबारक दिन इसके बिना अधूरा है, क्योंकि हर खास मौके पर गुलाब जामुन को जरूर सर्व किया जाता है. मिठाई जरूर बनाई जाती है. मगर बहुत कम लोग यह जानते हैं कि गुलाब जामुन पूरी तरह से भारतीय नहीं है. इसकी जड़ें कहीं ना कहीं ईरान से जुड़ी हुई हैं. इसको लेकर शेफ हरपाल सिंह का कहना है कि इसका कनेक्शन एक ईरानी डिश लुकमत-अल-कादी से जुड़ा हुआ है. साथ ही, इसका इतिहास भी बेहद दिलचस्प रहा है. कैसे? आइए इस लेख में इसका विस्तार से इतिहास जानते हैं.
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क्या है ईरानी डिश लुकमत-अल-कादी?
लुकमत-अल-कादी एक तरह से मध्य-पूर्वी मिठाई है, जिसे खासतौर पर ईरान और अरब देशों में बनाया जाता था. यह छोटी-छोटी तली हुई मीठी बॉल्स होती हैं, जिन्हें शहद या शुगर सिरप में डुबोया जाता है. अगर देखा जाए स्वाद और बनावट में यह काफी हद तक गुलाब जामुन की तरह होती है.
भारत तक कैसे पहुंची ये डिश?
इतिहासकारों का मानना है कि मुगल काल के दौरान कई विदेशी व्यंजन भारत आए. उस समय फारसी संस्कृति का भारत पर काफी प्रभाव था. इसी दौरान लुकमत-अल-कादी भारत आई और यहां के रसोइयों ने इसे अपने तरीके से बनाना शुरू किया.
कैसे बना गुलाब जामुन?
भारतीय किचन ने इस डिश में कई बदलाव किए और इसे मैदा और खोया से बनाया जाने लगा. शहद की जगह चीनी की चाशनी बनाई जाने लगी और आज इसके कई तरह के वर्जन मार्केट में मौजूद हैं. इसमें इलायची और गुलाब जल भी डालकर बनाया जाने लगा.
गुलाब जामुन नाम कैसे पड़ा?
इस नाम के पीछे भी एक लंबा इतिहास रहा है. इतिहासकारों के मुताबिक, गुलाब शब्द फारसी भाषा से आया है, जिसका मतलब है गुलाब जल. वहीं, जामुन भारत के एक फल का नाम है, जिसका आकार इस मिठाई से मिलता-जुलता है. इसी वजह से इसका नाम गुलाब जामुन पड़ा.
भारत में कैसे बढ़ी लोकप्रियता?
गुलाब जामुन का स्वाद सबको इतना पसंद आया कि यह धीरे-धीरे भारत के हर कोने में लोकप्रिय हो गया. उत्तर भारत में त्योहारों की शान बना तो दक्षिण भारत में यह खास मौके पर बनाया जाने लगा. आज यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में पसंद किया जाता है.
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Gulab Jamun Is Iranian Dish: भारत में मिठाइयों की बात हो और गुलाब जामुन का नाम ना आए, ऐसा हो ही नहीं सकता… हर मुबारक दिन इसके बिना अधूरा है, क्योंकि हर खास मौके पर गुलाब जामुन को जरूर सर्व किया जाता है. मिठाई जरूर बनाई जाती है. मगर बहुत कम लोग यह जानते हैं कि गुलाब जामुन पूरी तरह से भारतीय नहीं है. इसकी जड़ें कहीं ना कहीं ईरान से जुड़ी हुई हैं. इसको लेकर शेफ हरपाल सिंह का कहना है कि इसका कनेक्शन एक ईरानी डिश लुकमत-अल-कादी से जुड़ा हुआ है. साथ ही, इसका इतिहास भी बेहद दिलचस्प रहा है. कैसे? आइए इस लेख में इसका विस्तार से इतिहास जानते हैं.
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क्या है ईरानी डिश लुकमत-अल-कादी?
लुकमत-अल-कादी एक तरह से मध्य-पूर्वी मिठाई है, जिसे खासतौर पर ईरान और अरब देशों में बनाया जाता था. यह छोटी-छोटी तली हुई मीठी बॉल्स होती हैं, जिन्हें शहद या शुगर सिरप में डुबोया जाता है. अगर देखा जाए स्वाद और बनावट में यह काफी हद तक गुलाब जामुन की तरह होती है.
भारत तक कैसे पहुंची ये डिश?
इतिहासकारों का मानना है कि मुगल काल के दौरान कई विदेशी व्यंजन भारत आए. उस समय फारसी संस्कृति का भारत पर काफी प्रभाव था. इसी दौरान लुकमत-अल-कादी भारत आई और यहां के रसोइयों ने इसे अपने तरीके से बनाना शुरू किया.
कैसे बना गुलाब जामुन?
भारतीय किचन ने इस डिश में कई बदलाव किए और इसे मैदा और खोया से बनाया जाने लगा. शहद की जगह चीनी की चाशनी बनाई जाने लगी और आज इसके कई तरह के वर्जन मार्केट में मौजूद हैं. इसमें इलायची और गुलाब जल भी डालकर बनाया जाने लगा.
गुलाब जामुन नाम कैसे पड़ा?
इस नाम के पीछे भी एक लंबा इतिहास रहा है. इतिहासकारों के मुताबिक, गुलाब शब्द फारसी भाषा से आया है, जिसका मतलब है गुलाब जल. वहीं, जामुन भारत के एक फल का नाम है, जिसका आकार इस मिठाई से मिलता-जुलता है. इसी वजह से इसका नाम गुलाब जामुन पड़ा.
भारत में कैसे बढ़ी लोकप्रियता?
गुलाब जामुन का स्वाद सबको इतना पसंद आया कि यह धीरे-धीरे भारत के हर कोने में लोकप्रिय हो गया. उत्तर भारत में त्योहारों की शान बना तो दक्षिण भारत में यह खास मौके पर बनाया जाने लगा. आज यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में पसंद किया जाता है.
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