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ट्रैवल एंड टूरिज्म

कैसे तय होती है Train की टाइमिंग? यहां जानिए एक प्लेटफार्म पर कितने अंतराल के बाद आती है दूसरी ट्रेन

How To Decide Train Timing: अगर किसी प्लेटफॉर्म पर ट्रेन के बीच सही टाइमिंग ना हो तो टक्कर होने का चांस काफी ज्यादा बढ़ जाता है. इसलिए ट्रेन की टाइमिंग की योजना बहुत ही ध्यान से बनाई जाती है, ताकि इसी वजह से एक प्लेटफॉर्म पर ट्रेनों के बीच का अंतर तय किया जाता है.

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Edited By : Shadma Muskan Updated: Apr 8, 2026 08:41
How To Decide Train Timing
सेंट्रल कंट्रोल और टाइम टेबल प्लानिंग कैसे होती है? Image Credit- Freepik

Train and Platform Locator Process: भारतीय रेल में सफर करते समय अक्सर हमारे मन में एक सवाल आता है कि आखिर ट्रेन की टाइमिंग इतनी सही कैसे होती है? एक ही प्लेटफार्म पर अलग-अलग समय पर ट्रेन कैसे आती-जाती हैं और उनके बीच कितना अंतर रखा जाता है? अगर ऐसा ना किया जाए तो परेशानी थोड़ी ज्यादा बढ़ जाएगी और चक्कर होने के चांस काफी बढ़ जाएंगे. इसलिए इस पर काफी ध्यान दिया जाता है. हालांकि,  इसके पीछे एक मजबूत प्लानिंग, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा से जुड़े कई नियम काम करते हैं. इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि ट्रेन की टाइमिंग कैसे तय होती है और प्लेटफार्म पर ट्रेनों के बीच कितना गैप रखा जाता है.

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सेंट्रल कंट्रोल और टाइम टेबल प्लानिंग कैसे होती है?

ट्रेन की टाइमिंग तय करने का काम भारतीय रेलवे का होना है. इस दौरान कंट्रोल रूम और प्लानिंग विभाग ट्रेन के टाइम टेबल पर नजर रखते हैं. यहां विशेषज्ञ पूरे रूट का विश्लेषण करते हैं कि कितनी ट्रेन चलेंगी, कौन सी ट्रेन कहां रुकेगी और किस समय गुजरेगी. इन तमाम चीजों को ध्यान में रखते हुए एक टाइम टेबल बनाया जाता है, जिसमें उसके हर स्टेशन पर पहुंचने और निकलने का समय तय होता है.  

प्लेटफार्म के आधार पर टाइम तय करना

हर रेलवे ट्रैक की एक लिमिट होती है कि वह एक घंटे में कितनी ट्रेनें संभाल सकता है. अगर ट्रैक ज्यादा भीड़ वाला है तो ट्रेनें तो ज्यादा गैप में रखा जाता है और वहीं अगर प्लेटफॉर्म पर कम भीड़ रहती है तो कम अंतराल पर ट्रेन आती रहती हैं. इसी के आधार पर प्लेटफॉर्म पर ट्रेन आने का समय तय किया जाता है.

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सिग्नलिंग सिस्टम तय करता है गैप

ट्रेन के बीच कितना अंतर होगा, यह काफी हद तक सिग्नलिंग सिस्टम पर निर्भर करता है. ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम होने पर 5 से 10 मिनट के अंदर ट्रेन आ सकती है. वहीं, मैन्युअल सिग्नलिंग सिस्टम होने पर ट्रेन 15 से 30 मिनट के अंतराल के बीच आती है.

एक प्लेटफार्म पर ट्रेन के बीच अंतर कितना होता है?

यह कोई फिक्स समय नहीं होता, लेकिन मेट्रो सिटी का एक अंतराल होता है. रेलवे स्टेशन पर भी एक अंतराल होता है और छोटे स्टेशन की टाइमिंग अलग होती है. यानि यह पूरी तरह उस रूट की भीड़ और ट्रेन की संख्या पर निर्भर करता है.

ट्रेन की स्पीड और स्टॉपेज का ध्यान

अगर कोई ट्रेन एक्सप्रेस है और कम स्टॉपेज करती है तो उसकी टाइमिंग अलग होगी. वहीं, पैसेंजर ट्रेन हर छोटे स्टेशन पर रुकती है, इसलिए उसका शेड्यूल लंबा होता है. इसके अलावा, अगर एक ट्रेन लेट हो जाती है तो उसका असर दूसरी ट्रेनों पर भी पड़ सकता है. ऐसे में कंट्रोल रूम तुरंत नया प्लान बनाता है और ट्रेनों को री-शेड्यूल किया जाता है. 

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First published on: Apr 08, 2026 08:41 AM

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