कैसे तय होती है Train की टाइमिंग? यहां जानिए एक प्लेटफार्म पर कितने अंतराल के बाद आती है दूसरी ट्रेन

How To Decide Train Timing: अगर किसी प्लेटफॉर्म पर ट्रेन के बीच सही टाइमिंग ना हो तो टक्कर होने का चांस काफी ज्यादा बढ़ जाता है. इसलिए ट्रेन की टाइमिंग की योजना बहुत ही ध्यान से बनाई जाती है, ताकि इसी वजह से एक प्लेटफॉर्म पर ट्रेनों के बीच का अंतर तय किया जाता है.

How To Decide Train Timing

सेंट्रल कंट्रोल और टाइम टेबल प्लानिंग कैसे होती है? Image Credit- Freepik

Train and Platform Locator Process: भारतीय रेल में सफर करते समय अक्सर हमारे मन में एक सवाल आता है कि आखिर ट्रेन की टाइमिंग इतनी सही कैसे होती है? एक ही प्लेटफार्म पर अलग-अलग समय पर ट्रेन कैसे आती-जाती हैं और उनके बीच कितना अंतर रखा जाता है? अगर ऐसा ना किया जाए तो परेशानी थोड़ी ज्यादा बढ़ जाएगी और चक्कर होने के चांस काफी बढ़ जाएंगे. इसलिए इस पर काफी ध्यान दिया जाता है. हालांकि,  इसके पीछे एक मजबूत प्लानिंग, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा से जुड़े कई नियम काम करते हैं. इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि ट्रेन की टाइमिंग कैसे तय होती है और प्लेटफार्म पर ट्रेनों के बीच कितना गैप रखा जाता है.

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सेंट्रल कंट्रोल और टाइम टेबल प्लानिंग कैसे होती है?

ट्रेन की टाइमिंग तय करने का काम भारतीय रेलवे का होना है. इस दौरान कंट्रोल रूम और प्लानिंग विभाग ट्रेन के टाइम टेबल पर नजर रखते हैं. यहां विशेषज्ञ पूरे रूट का विश्लेषण करते हैं कि कितनी ट्रेन चलेंगी, कौन सी ट्रेन कहां रुकेगी और किस समय गुजरेगी. इन तमाम चीजों को ध्यान में रखते हुए एक टाइम टेबल बनाया जाता है, जिसमें उसके हर स्टेशन पर पहुंचने और निकलने का समय तय होता है.  

प्लेटफार्म के आधार पर टाइम तय करना

हर रेलवे ट्रैक की एक लिमिट होती है कि वह एक घंटे में कितनी ट्रेनें संभाल सकता है. अगर ट्रैक ज्यादा भीड़ वाला है तो ट्रेनें तो ज्यादा गैप में रखा जाता है और वहीं अगर प्लेटफॉर्म पर कम भीड़ रहती है तो कम अंतराल पर ट्रेन आती रहती हैं. इसी के आधार पर प्लेटफॉर्म पर ट्रेन आने का समय तय किया जाता है.

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सिग्नलिंग सिस्टम तय करता है गैप

ट्रेन के बीच कितना अंतर होगा, यह काफी हद तक सिग्नलिंग सिस्टम पर निर्भर करता है. ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम होने पर 5 से 10 मिनट के अंदर ट्रेन आ सकती है. वहीं, मैन्युअल सिग्नलिंग सिस्टम होने पर ट्रेन 15 से 30 मिनट के अंतराल के बीच आती है.

एक प्लेटफार्म पर ट्रेन के बीच अंतर कितना होता है?

यह कोई फिक्स समय नहीं होता, लेकिन मेट्रो सिटी का एक अंतराल होता है. रेलवे स्टेशन पर भी एक अंतराल होता है और छोटे स्टेशन की टाइमिंग अलग होती है. यानि यह पूरी तरह उस रूट की भीड़ और ट्रेन की संख्या पर निर्भर करता है.

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ट्रेन की स्पीड और स्टॉपेज का ध्यान

अगर कोई ट्रेन एक्सप्रेस है और कम स्टॉपेज करती है तो उसकी टाइमिंग अलग होगी. वहीं, पैसेंजर ट्रेन हर छोटे स्टेशन पर रुकती है, इसलिए उसका शेड्यूल लंबा होता है. इसके अलावा, अगर एक ट्रेन लेट हो जाती है तो उसका असर दूसरी ट्रेनों पर भी पड़ सकता है. ऐसे में कंट्रोल रूम तुरंत नया प्लान बनाता है और ट्रेनों को री-शेड्यूल किया जाता है. 

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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