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Unique Airport: केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम का इंटरनेशनल हवाई अड्डा काफी ज्यादा बिजी माना जाता है। लेकिन एक बात है जिसे सुनकर अच्छे-अच्छे सोच में पड़ जाते हैं। हम बात कर रहे हैं यहां की 5000 साल पुरानी परंपरा की जहां फ्लाइट का आना-जाना रुक जाता है। जी हां पिछले साल 9 नवंबर 2024 को एयरपोर्ट को शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक मतलब 5 घंटों के लिए बंद कर दिया गया था। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब यहां फ्लाइट्स को 5 घंटों के लिए बंद किया गया है। साल में ऐसा दो बार होता है जब एयरपोर्ट को बंद कर दिया जाता है। इसकी वजह जानकार आप हैरान हो जाएंगे। एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स को सस्पेंड करना किसी टेक्निकल ग्लिच के कारण नहीं होता बल्कि धार्मिक वजह से होता है। यह धार्मिक वजह है मंदिर का जुलूस। यह जुलूस एयरपोर्ट के रनवे से निकाला जाता है और इसके कारण 5-6 घंटे फ्लाइट्स सस्पेंड रहती हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है। ऐसा भी कहा जाता है कि, मंदिर का यह जुलूस 5000 साल से ऐसे ही निकाला जा रहा है। दो साल पहले जब कोरोना चरम पर था फिर भी मार्च 2020 में यह जुलूस धूमधाम से निकाला गया था। उस समय हजारों लोगों की संख्या यहां जमा हुई थी। चलिए आपको इस दिन के बारे में बताते हैं।
केरल में यह हवाई अड्डा साल में दो बार अपनी सेवाओं को बंद करता है। पहले मार्च-अप्रैल में पेनकुनी उत्सव के लिए और दूसरी बार अक्टूबर-नवंबर में अराट्टू जुलूस के लिए। अक्टूबर-नवंबर के समय भगवान विष्णु को श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर से एक पालकी पर ले जाया जाता है जो हवाई अड्डे के ठीक पीछे मौजूद शांघमुघम समुद्र तट पर है। यहां भगवान विष्णु का समुद्र में अनुष्ठान स्नान किया जाता है।
साल में दो बार होने वाले उत्सव के लिए एयरपोर्ट बंद करने से पहले हवाई अड्डा एयरमेन को नोटिस जारी किया जाता है। उस समय 5 घंटे तक कोई फ्लाइट नहीं आती। सदियों पुराने अनुष्ठान के लिए हर घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय सेवाएं इस समय बंद रहती हैं। एयरपोर्ट ऑथोरिटी का कहना है कि पांच घंटों में चार इंटरनेशनल उड़ानों के साथ-साथ कुछ और उड़ानों का भी समय बदल दिया जाता है।
भगवान विष्णु का यह अनुष्ठान जुलूस सदियों से निकाला जा रहा है। इस रास्ते से उन्हें लाया और लेकर जाया जाता है। 1932 में जब इस रास्ते पर एयरपोर्ट का बनाया गया था तब इस पर विवाद छिड़ गया कि भगवान विष्णु की पालकी जुलूस कैसे निकाली जाएगी। उस समय यह तब ये सहमति बनी की भगवान विष्णु के जुलूस में कोई रुकावट नहीं आएगी। इसे उसी तरह रास्ता दिया जाएगा, जैसा पहले से चला आ रहा है। इसलिए जुलूस को रनवे से निकालने की इजाजत मिली।
रनवे के पास एक अरट्टू मंडपम है जहां भगवान विष्णु को कुछ समय के लिए आराम करवाया जाता है। यहां आराम के बाद भगवान विष्णु को फिर से समुद्र तट पर ले जाया जाता हैं। यहां उन्हें पवित्र डुबकी भी लगवाई जाती है और उनका अनुष्ठान किया जाता है। उसके बाद उन्हें पालकी से वापस लेकर जाया जाता है।
भगवान विष्णु के साथ त्रावणकोर शाही परिवार के सदस्य और श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के कर्मचारी भी जुड़े होते है। इस जुलूस में 5 हाथियों का झुंड भी साथ में चलता है। हाथियों पर अलग से रेशम की बनी छतरियां लगाई जाती हैं। पुलिस बैंड भी साथ में चलता है। ढोल और नगाड़ों के साथ बड़ी धूमधाम से इस जुलूस को निकाला जाता है।
पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत के केरल राज्य की राजधानी तिरुवन्तपुरम में है। यह एक मशहूर हिंदू मंदिर है। भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर को बहुत माना जाता है। माना जाता है की मंदिर को भगवान कृष्ण के भाई बलराम ने भी देखा था इसे 5000 साल पहले बनाया गया था। हालांकि मंदिर को लेकर अभी तक कोई सटीक प्रमाण नहीं है।
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