बच्चा हर वक्त मांगता है मोबाइल? स्क्रीन टाइम कम करने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके

बच्चों की स्क्रीन की आदत एक दिन में नहीं बनती, इसलिए इसे छुड़ाने में भी समय लगता है. आजकल के बच्चे तो खाना भी बिना फोन देखे नहीं खाते. अगर आपका बच्चा भी ऐसा ही करता है तो यह लेख आपके लिए मददगार साबित हो सकता है. 

Stop Watching Phone Addiction

स्क्रीन टाइम कम करने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके

आज के समय में मोबाइल, टैबलेट और टीवी बच्चों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुके हैं. कई बच्चे बिना मोबाइल के खाना नहीं खाते, रोना बंद नहीं करते या फिर हर समय स्क्रीन देखने की जिद करते हैं. अगर कोई मां फोन नहीं देती है तो बच्चा मारने तक लग जाता है. इसलिए कई बार मां को भी गुस्सा आ जाता है और रिश्ता खराब हो जाता है. हालांकि, बच्चे को स्क्रीन टाइम कम करने के लिए एकदम न कहें, क्योंकि इससे बच्चा परेशान होगा. आप हमारे बताए गए टिप्स की मदद से बच्चों का स्क्रीन टाइम आसानी से कम कर सकते हैं. 

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बच्चे का स्क्रीन टाइम कैसे कम करें? | Stop Watching Phone Addiction 

धीरे-धीरे कम करें स्क्रीन टाइम

अगर बच्चा रोज 4 घंटे मोबाइल देखता है तो उसे एकदम से बंद न करें. हर हफ्ते 20 मिनट स्क्रीन टाइम कम करें. इससे बच्चे को नई आदत अपनाने में आसानी होगी और वह ज्यादा परेशान नहीं करेगा.

खाने के समय मोबाइल बिल्कुल न दें

कई घरों में बच्चों को खाना खिलाने के लिए मोबाइल दे दिया जाता है. इससे बच्चे की आदत बन जाती है. कोशिश करें कि परिवार के सभी सदस्य साथ बैठकर खाना खाएं और टीवी या मोबाइल का इस्तेमाल न करें.

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स्क्रीन की जगह मजेदार चीजें करें

बच्चों का ध्यान मोबाइल से हटाने के लिए उनमें रंग भरने की किताब, ब्लॉक, पजल, कहानी की किताबें, ड्राइंग या आउटडोर गेम्स जैसी मजेदार चीजें करने के लिए कहें. जब बच्चे किसी मजेदार काम में बिजी होंगे तो उनकी स्क्रीन की इच्छा अपने आप कम होने लगेगी.

खुद बना दें रोल मॉडल

बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने घर में देखते हैं. अगर पेरेंट्स हर समय मोबाइल में बिजी रहेंगे तो बच्चे भी वैसा ही करेंगे. इसलिए घर में कुछ समय नो-स्क्रीन टाइम डिसाइड करें और उस दौरान परिवार के साथ बातें करें.

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सिर्फ काम के लिए दें फोन 

बच्चे को बहुत ही कम उम्र में फोन दे देना सही नहीं है. ऐसा करना मतलब उनके फ्यूचर के साथ खिलवाड़ करना है. आप अपना फोन दें और सिर्फ काम के लिए ही दें, क्योंकि अगर उनके पास फोन रहेगा तो वो रील्स देखेंगे और वक्त बर्बाद करेंगे. 

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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