Siddharth Sharma
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नई दिल्ली: हमारे देश के कई खिलाड़ी जहां एक तरफ पूरे विश्व में अपना नाम रोशन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आज भी कई अभिवावक अपने बच्चों को खेल से दूर रखते हैं। अभिवावकों की ऐसी सोच इसीलिए भी है, क्योंकि खिलाड़ियों के लिए रोजगार की संभावनाएं बेहद कम है। अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को तो विजेता बनने पर बहुत सारे पुरस्कार और नौकरी भी मिल जाती है लेकिन इस ऊंचाई तक पहुंचने की रेस में सैंकड़ों और हजारों की संख्या में खिलाड़ी होते हैं।
इन खिलाड़ियों ने अपने जीवन का अमूल्य समय, सबकुछ छोड़कर, यहां तक की पढाई- लिखाई की भी कीमत पर मैदान में पसीना बहाया होता हो। परंतु दुर्भाग्यवश अगर वो अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पदक से वंचित रह गए तो उनका कोई पुरसाहाल नहीं होता है। वो कहां हैं, किस हाल में है, कोई अता पता नहीं होता है।
खेल करियर समाप्त होने के बाद इनमें से हजारों के सामने रोजगार और जीवनयापन का संकट खड़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि खेल के अलावा उनके पास ऐसी कोई स्किल, डिग्री या विशेषता नहीं होती जिसके सहारे वो रोजगार ढूंढ सकें।
आई.एम.टी गाजियाबाद देश का ही नहीं विश्व का पहला ऐसा प्रबंधन संस्थान है, जो खिलाड़ियों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए एक अनूठी पहला करने जा रहा है। 27 सितंबर 2022 को कॉलेज के गुरुकुल हॉल में इस योजना को लॉन्च करने का कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें देश के विख्यात खिलाड़ी एवं एकेडमिशियन भाग लेंगे।
इस विशाल कार्यक्रम में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के सुपुत्र अर्जुन अवॉर्डी, पूर्व ओलंपियन श्री अशोक ध्यानचंद, पूर्व ओलंपियन जफर इकबाल, मोहिंदर पाल सिंह, सत्यपाल सिंह, अर्जुन पुरस्कार विजेता युवा खिलाड़ी सतीश शिवलिंगम, भारत सरकार के पूर्व सचिव श्री विजय शंकर पाण्डेय उपस्थित रहेंगे।
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