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खराब स्वास्थ्य को लेकर झिझक कब बन जाती है बड़ी समस्या? एक्सपर्ट ने बताया- क्यों जरूरी है खुलकर बात करना

भारत में यौन स्वास्थ्य को लेकर सामाजिक झिझक पूरी तरह खत्म होने में समय लग सकता है. लेकिन जिस तरह मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत धीरे-धीरे सामान्य हुई है, उसी तरह इस विषय पर भी वैज्ञानिक जानकारी और सही चिकित्सा सलाह को लेकर जागरूकता बढ़ रही है.

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भारत में स्वास्थ्य को लेकर बातचीत पहले की तुलना में काफी खुली हुई है. लोग फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य, हार्मोनल बदलाव और प्रजनन स्वास्थ्य जैसे विषयों पर जानकारी लेने लगे हैं. इसके बावजूद यौन स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है, जिस पर आज भी बड़ी संख्या में लोग खुलकर बात करने से हिचकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यही झिझक कई बार छोटी समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज करने की वजह बनती है. इंटरनेट पर अधूरी जानकारी, खुद से दवा लेना या बिना विशेषज्ञ की सलाह के उपचार करना भी स्थिति को जटिल बना सकता है. धीरे-धीरे इस सोच में बदलाव आ रहा है और यौन स्वास्थ्य को केवल निजी समस्या के बजाय संपूर्ण स्वास्थ्य के एक हिस्से के रूप में देखा जाने लगा है.

यौन स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी के पीछे का कारण

यौन स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी परेशानी के पीछे केवल एक कारण हो, यह जरूरी नहीं है. शारीरिक स्वास्थ्य के साथ तनाव, हार्मोनल बदलाव, जीवनशैली, भावनात्मक स्थिति और रिश्तों से जुड़े पहलू भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं. यही कारण है कि आधुनिक चिकित्सा में केवल लक्षणों पर ध्यान देने के बजाय समस्या की मूल वजह समझने पर जोर बढ़ रहा है.

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इस बदलते नजरिए के बीच कुछ चिकित्सा संस्थानों की यात्रा भी दिलचस्प रही है. डॉ. एस.के. जैन के बर्लिंगटन क्लिनिक एंड हॉस्पिटल की स्वास्थ्य सेवाओं की विरासत वर्ष 1926 से जुड़ी हुई है. करीब एक सदी पुरानी इस विरासत को अब नई पीढ़ी आगे बढ़ा रही है. इसी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे डॉ. सारांश जैन आज यौन स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

डॉ. सारांश जैन ने क्या कहा?

डॉ. सारांश जैन का मानना है कि इस क्षेत्र में उपचार की शुरुआत मरीज को सहज महसूस कराने से होती है. कई लोग अपनी समस्या वर्षों तक किसी से साझा नहीं करते. ऐसे में एक गोपनीय और बिना किसी पूर्वाग्रह वाला माहौल जरूरी है, जहां मरीज अपनी बात बिना संकोच रख सके.

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उनके अनुसार, ‘यौन स्वास्थ्य को किसी एक लक्षण या समस्या तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए. कई मामलों में शारीरिक स्थिति के साथ मानसिक तनाव, हार्मोन, जीवनशैली, भावनात्मक स्वास्थ्य और रिश्तों की परिस्थितियों को भी समझना पड़ता है. हमारा प्रयास समस्या की जड़ तक पहुंचने और हर मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की दिशा तय करने का रहता है.’

डॉ. सारांश जैन को कई देशों से मिला सम्मान

डॉ. सारांश जैन इस क्षेत्र में वर्ल्डबुक रिकॉर्ड से भी जुड़े हैं और उन्हें अलग-अलग देशों में उनके कार्य के लिए सम्मान मिल चुके हैं. हालांकि चिकित्सा क्षेत्र में ऐसे सम्मानों से अधिक महत्वपूर्ण मरीजों के बीच भरोसा और सही जानकारी तक पहुंच को माना जाता है. तकनीक ने इस पहुंच को भी बदला है. जहां डॉ. एस.के. जैन के बर्लिंगटन क्लिनिक एंड हॉस्पिटल की प्रत्यक्ष सेवाएं लखनऊ और मुंबई में उपलब्ध हैं, वहीं ऑनलाइन परामर्श के माध्यम से देश और विदेश के मरीज भी विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं. खासकर ऐसे विषयों में, जिन पर लोग अपने शहर या परिचित माहौल में चर्चा करने से असहज महसूस करते हैं, ऑनलाइन परामर्श एक नया विकल्प बनकर सामने आया है.

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भारत में यौन स्वास्थ्य को लेकर सामाजिक झिझक पूरी तरह खत्म होने में समय लग सकता है. लेकिन जिस तरह मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत धीरे-धीरे सामान्य हुई है, उसी तरह इस विषय पर भी वैज्ञानिक जानकारी और सही चिकित्सा सलाह को लेकर जागरूकता बढ़ रही है. बदलाव की शुरुआत शायद इसी स्वीकार्यता से होती है कि यौन स्वास्थ्य भी व्यक्ति के शारीरिक, भावनात्मक और रिश्तों से जुड़े स्वास्थ्य का स्वाभाविक हिस्सा है.

First published on: Aug 31, 2026 06:46 PM

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