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नंदन नीलेकणी ही क्यों? कांग्रेस उम्मीदवार से PM मोदी के भरोसेमंद टेक्नोक्रेट तक, जानें कैसे मिला NTA सुधार पैनल का जिम्मा

Nandan Nilekani: 6 सदस्यों वाले इस पैनल में शामिल दूसरे एक्सपर्ट्स भी अपने-अपने क्षेत्र के दिग्गज अनुभवी हैं. लिस्ट में पूर्व इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ के सिस्टम-इंजीनियरिंग और मिशन-क्रिटिकल प्रोग्रामों के प्रबंधन का अनुभव परीक्षा संचालन में विश्वसनीयता और व्यवहार्यता बढ़ाने में सहायक माना जा रहा है.

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दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों के आंदोलन और सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शन के बाद नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में आंदोलन की सभी मांगों के स्वीकार कर लिया गया, साथ ही अब केंद्र सरकार ने पेपर लीक को रोकने के लिए एनटीए सुधान पैनल का गठन किया है. 6 लोगों की टीम वाली इस पैनल का मुखिया इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी को बनाया गया है, जो 2014 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं.

कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं नीलेकणी


मोदी सरकार के इस फैसले से हर किसी को हैरानी हुई है. आखिर नंदन नीलेकणी सरकार के लिए इतने खास क्यों हैं, कि राजनीतिक टकराव को दरकिनार कर उन्हें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) सुधार पैनल का जिम्मा सौंपा गया है. जो लोग नंदन नीलेकणी को नहीं जानते हैं, उनके लिए बता दें कि नंदन देश के दिग्गज उद्योगपति और इन्फोसिस के सह-संस्थापक हैं. उन्होंने 2014 में कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु साउथ से लोकसभा चुनाव लड़ा था, हालांकि वो बीजेपी उम्मीदवार अनंत कुमार से चुनाव हार गए थे.

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यह भी पढ़ें: धर्मेंद्र प्रधान ने पहले भी 2 बार ऑफर किया था इस्तीफा, सरकार ने किया नामंजूर, जानें तीसरी बार कैसे बदला फैसला?

नंदन नीलेकणी पर सरकार को क्यों है भरोसा?


नंदन नीलेकणी का नाम ऐसे समय सामने आया जब जब NTA और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी NEET जैसी परीक्षाओं को लेकर सुरक्षा, पेपर लीक और प्रशासनिक जवाबदेही पर छात्रों ने आंदोलन किया. नंदन नीलेकणी को ‘आधार कार्ड’ का आर्किटेक्ट भी कहा जाता है, उन्हें UIDAI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने का अनुभव भी है, जिसे सरकार परीक्षा प्रणाली में तकनीकी समाधान लाने की क्षमता के रूप में देख रही है. पैनल में उनकी मौजूदगी से यह क्लियर मैसेज मिलता है कि परीक्षा प्रणाली में डिजिटल पहचान, स्केलेबल टेक आर्किटेक्चर और साइबर-सुरक्षा पर विशेष जोर रहेगा.

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नंदन नीलकेणी की टीम में कौन-कौन से दिग्गज?


6 सदस्यों वाले इस पैनल में शामिल दूसरे एक्सपर्ट्स भी अपने-अपने क्षेत्र के दिग्गज अनुभवी हैं. लिस्ट में पूर्व इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ के सिस्टम-इंजीनियरिंग और मिशन-क्रिटिकल प्रोग्रामों के प्रबंधन का अनुभव परीक्षा संचालन में विश्वसनीयता और व्यवहार्यता बढ़ाने में सहायक माना जा रहा है. वहीं, पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो निदेशक तपन देका का अनुभव, सुरक्षा आयाम जैसे ग्रुप चैटिंग चीटिंग नेटवर्क, पेपर लीक और साइबर-फ्रॉड को रोकने की दिशा में उपयोग किया जा सकता है. इसी लिस्ट में आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल, लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा को भी शामिल किया गया है.

यह भी पढ़ें: हिज्बुल्लाह के समर्थन में ईरान, मोजतबा खामेनेई ने दिया बड़ा बयान; इजरायल की बढ़ेगी टेंशन!

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First published on: Jul 27, 2026 08:01 AM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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