धर्मेंद्र प्रधान ने पहले भी 2 बार ऑफर किया था इस्तीफा, सरकार ने किया नामंजूर, जानें तीसरी बार कैसे बदला फैसला?

नीट पेपर लीक के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया है. उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान 2 बार सरकार के सामने अपना इस्तीफा पेश किया, लेकिन दोनों बार ठुकरा दिया गया. तीसरी बार इस्तीफा मंजूर कर लिया गया और इसके पीछे एक नहीं कई कारण थे.

dharmendra pradhan

धर्मेंद्र प्रधान को नीट पेपर लीक के लिए नैतिक रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है.

विज्ञापन

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उग्र आंदोलन के कारण धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. वहीं अब उनके इस्तीफे को लेकर नई जानकारी सामने आई है. सूत्रों के अनुसार, छात्र आंदोलन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने 2 बार सरकार को अपना इस्तीफा ऑफर किया था, लेकिन दोनों बार इस्तीफा ठुकरा दिया गया. तीसरी बार जब उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की तो सरकार ने हामी भर दी और 25 जुलाई 2026 को इस्तीफा देकर धर्मेंद्र प्रधान पद से मुक्त हो गए. उनकी जगह प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी ही क्यों बनाए गए शिक्षा मंत्री? 5 पॉइंट में जानें PM मोदी की पसंद की खासियतें

विज्ञापन

सुरक्षा एजेंसियों के अलर्ट के बाद मंजूर हुआ इस्तीफा

सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, CJP के छात्र आंदोलन का दायरा बढ़ने, सुरक्षा एजेंसियों के अलर्ट और देश के अंदर कानून व्यवस्था बिगड़ने की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चिंताओं के कारण मंजूर किया गया. 2 बार इस्तीफा रिजेक्ट किया गया, क्योंकि सरकार का मनाना था कि इस्तीफा समस्या का समाधान नहीं हो सकता, बल्कि एजुकेशन सिस्टम में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने से छात्र शांत होंगे. इसलिए धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा सुधारों को लागू करने की जिम्मेदारी निभाने के लिए कहा गया और दोनों बार उनकरा इस्तीफा रिजेक्ट कर दिया गया.

CJP से दूसरे दौर की बातचीत के बाद बदला फैसला

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि पद से इस्तीफा देना आसान है, लेकिन यह जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने जैसा है. अपनी गलती स्वीकार करने जैसा है, जबकि गलती की ही नहीं है. मोदी सरकार की सोच समस्या से भागने और पीछे हटने की बजाय उसका समाधान निकलाने की रही है. लेकिन सरकार को यह सोच तब बदलनी पड़ी, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई और केंद्र सरकार को सुरक्षा एजेंसियों का अलर्ट मिला. वहीं CJP ने 20 जुलाई के संसद मार्च जैसा एक और मार्च निकालने की चेतावनी दी.

विज्ञापन

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया इस्तीफा

केंद्र सरकार पर पहले से ही 20 जुलाई के संसद मार्च में पुलिस की कार्रवाई को लेकर आरोप लग रहे थे. वहीं सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कुछ असामाजिक और राष्ट्र विरोधी तत्व छात्र आंदोलन की आड़ में अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं. दिल्ली पुलिस ने फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए 400 ऐसे लोगों की पहचान की, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड मिला. इसके बाद केंद्र सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखना और तनाव को बढ़ने से रोकने का फैसला किया. धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने को कहा और इस्तीफा लेने के बाद छात्र आंदोलन खत्म हो गया.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ