Education Minister Resignation Reason : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक के विवाद और इसके विरोध में देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों का भविष्य और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता किसी भी पद या व्यक्ति से ऊपर है. जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शनों और विपक्ष के लगातार बढ़ते दबाव के बाद सरकार को यह बड़ा कदम उठाना पड़ा.
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में क्या कुछ कहा? पीएम मोदी को सौंपा 2 पन्नों का इस्तीफा पत्र, जानिए पूरी डिटेल
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के 4 मुख्य कारण
शिक्षा मंत्रालय की कमान संभाल रहे धर्मेंद्र प्रधान पर पिछले कुछ समय से प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा था. मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से उन्हें पद छोड़ना पड़ा:
- NEET-UG परीक्षा में धांधली और पेपर लीक विवाद
NEET-UG परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों ने पूरी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे. लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए थे, जिससे मंत्रालय की साख को भारी धक्का पहुंचा.
- जंतर-मंतर पर उग्र छात्र आंदोलन
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए. छात्रों ने जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक आंदोलन खत्म न करने का कड़ा रुख अपना लिया था.
- नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की साख पर संकट
परीक्षाएं आयोजित करने वाली संस्था NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे. हालांकि सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए NTA के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया, लेकिन विवाद शांत नहीं हुआ और नैतिक जवाबदेही सीधे मंत्री पर आ टिकी.
- संसद का मानसून सत्र और विपक्ष का कड़ा रुख
संसद के मानसून सत्र में विपक्षी दलों ने एकजुट होकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की और सदन की कार्यवाही बाधित की. विपक्ष का रुख साफ था कि पेपर लीक पर चर्चा से पहले मंत्री की नैतिक जवाबदेही तय हो.
‘मैंने जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा’, धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा, CJP प्रोटेस्ट के बीच लिया फैसला
Education Minister Resignation Reason : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक के विवाद और इसके विरोध में देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों का भविष्य और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता किसी भी पद या व्यक्ति से ऊपर है. जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शनों और विपक्ष के लगातार बढ़ते दबाव के बाद सरकार को यह बड़ा कदम उठाना पड़ा.
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के 4 मुख्य कारण
शिक्षा मंत्रालय की कमान संभाल रहे धर्मेंद्र प्रधान पर पिछले कुछ समय से प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा था. मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से उन्हें पद छोड़ना पड़ा:
- NEET-UG परीक्षा में धांधली और पेपर लीक विवाद
NEET-UG परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों ने पूरी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे. लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए थे, जिससे मंत्रालय की साख को भारी धक्का पहुंचा.
- जंतर-मंतर पर उग्र छात्र आंदोलन
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए. छात्रों ने जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक आंदोलन खत्म न करने का कड़ा रुख अपना लिया था.
- नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की साख पर संकट
परीक्षाएं आयोजित करने वाली संस्था NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे. हालांकि सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए NTA के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया, लेकिन विवाद शांत नहीं हुआ और नैतिक जवाबदेही सीधे मंत्री पर आ टिकी.
- संसद का मानसून सत्र और विपक्ष का कड़ा रुख
संसद के मानसून सत्र में विपक्षी दलों ने एकजुट होकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की और सदन की कार्यवाही बाधित की. विपक्ष का रुख साफ था कि पेपर लीक पर चर्चा से पहले मंत्री की नैतिक जवाबदेही तय हो.
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