धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. वो पहले ही उपभोक्ता मामलों की मिनिस्ट्री संभाल रहे हैं. प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्री बनने के बाद मीडिया से बात की. इस दौरान उन्होंने कहा- मैं ये ज़िम्मेदारी निभाऊंगा. मैं प्रधानमंत्री का शुक्रगुज़ार हूं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को पिछले 12 सालों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं. पिछले चार-पांच सालों में धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति भी लागू की और कई ज़रूरी काम किए गए. देश ने नई शिक्षा व्यवस्था में काफी तरक्की की है. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, मैं अपनी पूरी काबिलियत से काम करूंगा और अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरी लगन से पूरा करूंगा.''
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कितने प्रॉपर्टी के मालिक हैं प्रह्लाद जोशी?
प्रह्लाद जोशी के शिक्षा मंत्री बनने के बाद लोगों के मन में ये सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वो कितनी संपत्ति के मालिक हैं. दरअसल, लोकसभा चुनाव के वक्त प्रह्लाद जोशी ने हलफनामे में अपनी और पूरे परिवार की प्रॉपर्टी की डिटेल दी थी, जिसके मुताबिक उनके पास 21 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति थी. प्रह्लाद जोशी ने उस वक्त धारवाड़ लोकसभा सीट से बतौर बीजेपी उम्मीदवार अपना नोमिनेशन भरा था. उस वक्त जोशी ने बताया था कि उनके नाम पर 2.72 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी के नाम पर 5.93 करोड़ और बेटी के नाम पर 32.03 लाख की चल संपत्ति है. जानकारी के मुताबिक, प्रह्लाद जोशी ने नामांकन के वक्त बताया था कि उनके नाम पर 11.24 करोड़ रुपये और उनकी पत्नी की नाम पर 86.39 लाख रुपये की अचल संपत्ति है.
धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि पिछले 4 दशक से वो टीचर, स्टूडेंट और एजुकेशन सिस्टम को बेहतर करने के लिए काम कर रहे थे. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मजबूत एजुकेशन सिस्टम ही देश के विकास की असली नींव है. उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों में जो भी हुआ, उनसे उन्हें बहुत ठेंस पहुंची है. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ये किसी एक व्यक्ति की इज्जत का सवाल नहीं है, बल्कि इस पर देश के युवाओं का भविष्य टिका हुआ है. उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहते कि छात्रों की शिक्षा से कोई खिलवाड़ हो या फिर वो किसी कानूनी और राजनीतिक मामलों में उलझ कर रह जाएं, इसीलिए उन्होंने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना ही सही समझा.
ये भी पढ़ें: धर्मेंद्र प्रधान से पहले इन केंद्रीय मंत्री के हुए थे इस्तीफे, नैतिकता के आधार पर छोड़ा था पद
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. वो पहले ही उपभोक्ता मामलों की मिनिस्ट्री संभाल रहे हैं. प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्री बनने के बाद मीडिया से बात की. इस दौरान उन्होंने कहा- मैं ये ज़िम्मेदारी निभाऊंगा. मैं प्रधानमंत्री का शुक्रगुज़ार हूं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को पिछले 12 सालों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं. पिछले चार-पांच सालों में धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति भी लागू की और कई ज़रूरी काम किए गए. देश ने नई शिक्षा व्यवस्था में काफी तरक्की की है. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, मैं अपनी पूरी काबिलियत से काम करूंगा और अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरी लगन से पूरा करूंगा.”
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कितने प्रॉपर्टी के मालिक हैं प्रह्लाद जोशी?
प्रह्लाद जोशी के शिक्षा मंत्री बनने के बाद लोगों के मन में ये सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वो कितनी संपत्ति के मालिक हैं. दरअसल, लोकसभा चुनाव के वक्त प्रह्लाद जोशी ने हलफनामे में अपनी और पूरे परिवार की प्रॉपर्टी की डिटेल दी थी, जिसके मुताबिक उनके पास 21 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति थी. प्रह्लाद जोशी ने उस वक्त धारवाड़ लोकसभा सीट से बतौर बीजेपी उम्मीदवार अपना नोमिनेशन भरा था. उस वक्त जोशी ने बताया था कि उनके नाम पर 2.72 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी के नाम पर 5.93 करोड़ और बेटी के नाम पर 32.03 लाख की चल संपत्ति है. जानकारी के मुताबिक, प्रह्लाद जोशी ने नामांकन के वक्त बताया था कि उनके नाम पर 11.24 करोड़ रुपये और उनकी पत्नी की नाम पर 86.39 लाख रुपये की अचल संपत्ति है.
धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि पिछले 4 दशक से वो टीचर, स्टूडेंट और एजुकेशन सिस्टम को बेहतर करने के लिए काम कर रहे थे. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मजबूत एजुकेशन सिस्टम ही देश के विकास की असली नींव है. उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों में जो भी हुआ, उनसे उन्हें बहुत ठेंस पहुंची है. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ये किसी एक व्यक्ति की इज्जत का सवाल नहीं है, बल्कि इस पर देश के युवाओं का भविष्य टिका हुआ है. उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहते कि छात्रों की शिक्षा से कोई खिलवाड़ हो या फिर वो किसी कानूनी और राजनीतिक मामलों में उलझ कर रह जाएं, इसीलिए उन्होंने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना ही सही समझा.
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