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वक्फ संशोधन बिल की पूरी कहानी, पढ़ें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की जुबानी

वक्फ संशोधन बिल को समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा का साजिश बताया है। साथ ही इस बिल को लेकर भाजपा पर तीखा तंज भी कसा है। उन्होंने एक ट्वीट लिखकर इस बिल पर अपनी बात रखी है। आइए जानते हैं कि अखिलेश यादव वक्फ बिल को लेकर क्या कह रहे हैं?

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वक्फ संशोधन विधेयक 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक 2024 लोकसभा सदन और राज्यसभा सदन दोनों में बहुमत से पास हो गया। लोकसभा में बिल के समर्थन में 288 और राज्यसभा में 128 वोट पड़े। लोकसभा में बिल के विरोध में 232 और राज्यसभा में 95 वोट पड़े। दोनों सदनों में बिल को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। वहीं मुस्लिम सांसदों ने भी आक्रामक तेवर दिखाए।

सत्तापक्ष और विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने इस बिल पर अपने-अपने विचार भी व्यक्त किए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी इस बिल पर कुछ कह रहे हैं। उन्होंने एक ट्वीट करके वक्फ बिल पर लंबी चौड़ी कहानी लिखी। भाजपा जब भी कोई नया बिल लाती है तो उसके पीछे वह अपनी नाकामी छुपाती है। भाजपा नोटबंदी, GST, मंदी, महंगाई, बेरोजगारी, बेकारी, भुखमरी, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी समस्याएं सुलझा नहीं पा रही है, इसीलिए ध्यान भटकाने के लिए वक्फ बिल लाई है।

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अखिलेश यादव न मांगी वक्फ जमीन की गारंटी

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अखिलेश यादव ने लिखा कि वक्फ की जमीन से बड़ा मुद्दा वह जमीन है जिस पर चीन ने अपने गांव बसा दिए हैं, लेकिन कोई बाहरी खतरे पर सवाल-बवाल न करे, इसीलिए यह बिल लाया जा रहा है। सरकार गारंटी दे कि वक्फ की जमीन कभी भी किसी भी पैंतरेबाजी से किसी और मकसद के लिए किसी और को नहीं दी जाएगी।

वक्फ की वर्तमान व्यवस्था में चाहे 5 साल के धर्म पालन की पाबंदी की बात हो या कलेक्टर से सर्वेक्षण के हस्तक्षेप की बात हो या वक्फ परिषद या बोर्ड में बाहरियों को शामिल करने की बात हो, इन सबका उद्देश्य एक वर्ग विशेष के संवैधानिक अधिकार को छीनकर उनके महत्व और नियंत्रण को कम करना है।

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ट्रिब्यूनल के निर्णय को अंतिम न मानकर उच्च न्यायालय में लेकर जाने की अनुमति देना जमीनी विवाद को लंबी न्यायिक प्रक्रिया में फंसाकर वक्फ जमीनों पर कब्जों को बनाए रखने का रास्ता खोलेगा। क्या दूसरे धर्मों की धार्मिक और चैरिटेबल जमीनों और ट्रस्टों में बाहरियों को शामिल करके ऐसी ही व्यवस्था करेगी?

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वक्फ बिल को भाजपा की साजिश बताया

अखिलेश यादव ने लिखा कि सबसे बड़ी बात यह है कि वक्फ बिल के पीछे की न तो नीति सही है और न ही नीयत सही है। यह देश के करोड़ों लोगों से उनके घर-दुकान छीनने की साजिश है। भाजपा एक अलोकतांत्रिक पार्टी है, वह असहमति को अपनी शक्ति मानती है। जब देश के अधिकांश राजनीतिक दल वक्फ बिल के खिलाफ है तो इसे लाने की जरूरत क्या है और जिद क्यों है?

वक्फ बिल को लाना भाजपा का ‘सियासी हठ’ है। वक्फ बिल भाजपा की साम्प्रदायिक राजनीति का एक नया रूप है। भाजपा वक्फ बिल लाकर अपने उन समर्थकों का तुष्टीकरण करना चाहती है, जो भाजपा की आर्थिक नीति, महंगाई, बेरोजगारी, बेकारी और चौपट अर्थव्यवस्था से उससे छटक गए हैं।

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भाजपा की निगाह वक्फ की जमीनों पर है। वह इन जमीनों का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर इन जमीनों को पिछले दरवाजे से अपने लोगों के हाथों में दे देना चाहती है। भाजपा चाहती है कि वक्फ बिल लाने से मुस्लिम समुदाय को लगे कि उनके हक को मारा जा रहा है। वे उद्वेलित हों और भाजपा को ध्रुवीकरण की राजनीति करने का मौका मिल सके। वक्फ बिल भाजपा की नकारात्मक राजनीति की एक निंदनीय साजिश है।

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भाजपावाले मुसलमान भाइयों की वक्फ की जमीन चिन्हित करने की बात कर रहे हैं, जिससे महाकुंभ में जो हिंदू मारे गए हैं या खो गए हैं, उनको चिन्हित करने की बात पर पर्दा पड़ जाए। वक्फ बिल के आने से पूरी दुनिया में एक गलत संदेश भी जाएगा। इससे देश की पंथ निरपेक्ष छवि को बहुत धक्का लगेगा। वक्फ बिल भाजपा की नफरत की राजनीति का एक और अध्याय है। वक्फ बिल भाजपा के लिए वाटरलू साबित होगा।

First published on: Apr 04, 2025 06:58 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.

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