भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने एक खास रोस्टर जारी किया है, जिसके तहत चार खास बेंचें सुप्रीम कोर्ट के सबसे पुराने सिविल और क्रिमिनल मामलों की सुनवाई करेंगी. हाल के वर्षों में सुप्रीम कोर्ट की पहली व्यवस्थित डॉकेट-मैनेजमेंट प्रक्रिया के तहत, पुराने लंबित मुकदमों के निपटारे के लिए लगभग 800 ऐसे मामलों की पहचान की गई है जिनका जल्द निपटारा किया जाएगा.
न्याय व्यवस्था में भरोसा बहाल करना- CJI
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस पहल का मकसद न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा फिर से कायम करना है. इसके लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पुराने मामलों पर लगातार ध्यान दिया जाए.
CJI ने रविवार को कहा, 'न्यायपालिका की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सिर्फ मुकदमों का फैसला करना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसे समय में निपटाना है जिससे कानून के शासन में नागरिकों का भरोसा बना रहे. हर पुराने लंबित मामले के पीछे एक ऐसा व्यक्ति होता है जिसने मामले के निपटारे के लिए कई सालों, और कभी-कभी दशकों तक इंतजार किया होता है. किसी मामले के पुराने होने की वजह से उसे लगातार नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. सबसे पुराने दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए खास बेंच बनाकर, सुप्रीम कोर्ट एक ऐसी व्यवस्था बनाना चाहता है जिसमें लंबे समय से लंबित मुकदमों पर लगातार और बिना किसी रुकावट के न्यायिक ध्यान दिया जाए.'
जस्टिस कांत ने कहा कि हर पुराना मामला जो अपने नतीजे तक पहुंचता है, वह न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को मजबूत करता है.
बनाई गई चार खास बेंच
13 जुलाई से लागू होने वाले नए रोस्टर नोटिफिकेशन के अनुसार, जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एसवीएन भट्टी की अध्यक्षता वाली दो डिवीजन बेंच, नॉन-मिसलेनियस दिनों — यानी मंगलवार, बुधवार और गुरुवार — को खास तौर पर सबसे पुराने सिविल मामलों की सुनवाई करेंगी. इसी तरह, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की अध्यक्षता वाली दो अन्य डिवीजन बेंच उन्हीं दिनों में सबसे पुराने क्रिमिनल मामलों की सुनवाई करेंगी.
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि 'माननीय जस्टिस पी.के. मिश्रा और माननीय जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की अध्यक्षता वाली दो डिवीजन बेंच, नॉन-मिसलेनियस दिनों में खास तौर पर सबसे पुराने सिविल मामलों को देखेंगी. माननीय जस्टिस मनोज मिश्रा और माननीय जस्टिस उज्ज्वल भुयान की अध्यक्षता वाली दो डिवीजन बेंच, नॉन-मिसलेनियस दिनों में खास तौर पर सबसे पुराने क्रिमिनल मामलों को देखेंगी.'
इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि चार बेंचों में से हर एक के लिए लगभग 200 सबसे पुराने मामलों की पहचान की गई है. यानी कुल मिलाकर करीब 800 पुराने मामले हैं जिन पर अब खास तौर पर ध्यान दिया जाएगा.
यह पहल CJI कांत द्वारा किए गए शुरुआती बड़े प्रशासनिक सुधारों में से एक है. यह पहल उनके उस मकसद के अनुरूप है जिसमें वे कामचलाऊ निपटान अभियानों के बजाय टारगेटेड न्यायिक प्रबंधन के जरिए लंबित मामलों की समस्या को हल करना चाहते हैं.
यह भी पढ़ें- डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का अचानक निधन, कभी भारत को दी थी 500% टैरिफ की धमकी
लंबित मामलों की चुनौती
नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में अभी 95,911 मामले लंबित हैं, जिनमें 74,145 सिविल और 21,766 क्रिमिनल मामले शामिल हैं. इनमें से 37,826 मामले (लगभग 39.4%) एक साल से कम पुराने हैं, जिससे पता चलता है कि लंबित मामलों के बड़े हिस्से में ऐसे पुराने मामले शामिल हैं जिन पर अभी फैसला होना बाकी है.
उम्मीद है कि चार स्पेशल बेंच हर हफ्ते तीन कामकाजी दिन सिर्फ इन्हीं पुराने मामलों पर ध्यान देंगी.
न्यायमूर्ति कांत ने अदालतों में बढ़ते लंबित मामलों की समस्या से निपटने के लिए सुधारों को अपनाने पर बार-बार जोर दिया है, इसलिए रोस्टर में यह बदलाव अहम है. इससे ठीक एक दिन पहले, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्बिट्रेशन एंड मीडिएशन (IIAM) की सिल्वर जुबली के उद्घाटन समारोह में CJI ने कहा था कि भारत में लंबित मामलों के संकट का समाधान सिर्फ अदालती फैसलों से नहीं किया जा सकता है.
उन्होंने कहा, 'अभी भारतीय अदालतों में पांच करोड़ से ज्यादा मामले लंबित हैं, चाहे कोई भी न्यायिक व्यवस्था हो और उसमें कितने भी संसाधन क्यों न हों, वह अकेले इतने बड़े पैमाने पर लंबित मामलों के बोझ को नहीं निपटा सकती. इसे आंशिक रूप से अदालत के बाहर सुलझाना होगा.'
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने एक खास रोस्टर जारी किया है, जिसके तहत चार खास बेंचें सुप्रीम कोर्ट के सबसे पुराने सिविल और क्रिमिनल मामलों की सुनवाई करेंगी. हाल के वर्षों में सुप्रीम कोर्ट की पहली व्यवस्थित डॉकेट-मैनेजमेंट प्रक्रिया के तहत, पुराने लंबित मुकदमों के निपटारे के लिए लगभग 800 ऐसे मामलों की पहचान की गई है जिनका जल्द निपटारा किया जाएगा.
न्याय व्यवस्था में भरोसा बहाल करना- CJI
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस पहल का मकसद न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा फिर से कायम करना है. इसके लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पुराने मामलों पर लगातार ध्यान दिया जाए.
CJI ने रविवार को कहा, ‘न्यायपालिका की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सिर्फ मुकदमों का फैसला करना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसे समय में निपटाना है जिससे कानून के शासन में नागरिकों का भरोसा बना रहे. हर पुराने लंबित मामले के पीछे एक ऐसा व्यक्ति होता है जिसने मामले के निपटारे के लिए कई सालों, और कभी-कभी दशकों तक इंतजार किया होता है. किसी मामले के पुराने होने की वजह से उसे लगातार नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. सबसे पुराने दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए खास बेंच बनाकर, सुप्रीम कोर्ट एक ऐसी व्यवस्था बनाना चाहता है जिसमें लंबे समय से लंबित मुकदमों पर लगातार और बिना किसी रुकावट के न्यायिक ध्यान दिया जाए.’
जस्टिस कांत ने कहा कि हर पुराना मामला जो अपने नतीजे तक पहुंचता है, वह न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को मजबूत करता है.
बनाई गई चार खास बेंच
13 जुलाई से लागू होने वाले नए रोस्टर नोटिफिकेशन के अनुसार, जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एसवीएन भट्टी की अध्यक्षता वाली दो डिवीजन बेंच, नॉन-मिसलेनियस दिनों — यानी मंगलवार, बुधवार और गुरुवार — को खास तौर पर सबसे पुराने सिविल मामलों की सुनवाई करेंगी. इसी तरह, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की अध्यक्षता वाली दो अन्य डिवीजन बेंच उन्हीं दिनों में सबसे पुराने क्रिमिनल मामलों की सुनवाई करेंगी.
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि ‘माननीय जस्टिस पी.के. मिश्रा और माननीय जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की अध्यक्षता वाली दो डिवीजन बेंच, नॉन-मिसलेनियस दिनों में खास तौर पर सबसे पुराने सिविल मामलों को देखेंगी. माननीय जस्टिस मनोज मिश्रा और माननीय जस्टिस उज्ज्वल भुयान की अध्यक्षता वाली दो डिवीजन बेंच, नॉन-मिसलेनियस दिनों में खास तौर पर सबसे पुराने क्रिमिनल मामलों को देखेंगी.’
इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि चार बेंचों में से हर एक के लिए लगभग 200 सबसे पुराने मामलों की पहचान की गई है. यानी कुल मिलाकर करीब 800 पुराने मामले हैं जिन पर अब खास तौर पर ध्यान दिया जाएगा.
यह पहल CJI कांत द्वारा किए गए शुरुआती बड़े प्रशासनिक सुधारों में से एक है. यह पहल उनके उस मकसद के अनुरूप है जिसमें वे कामचलाऊ निपटान अभियानों के बजाय टारगेटेड न्यायिक प्रबंधन के जरिए लंबित मामलों की समस्या को हल करना चाहते हैं.
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लंबित मामलों की चुनौती
नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में अभी 95,911 मामले लंबित हैं, जिनमें 74,145 सिविल और 21,766 क्रिमिनल मामले शामिल हैं. इनमें से 37,826 मामले (लगभग 39.4%) एक साल से कम पुराने हैं, जिससे पता चलता है कि लंबित मामलों के बड़े हिस्से में ऐसे पुराने मामले शामिल हैं जिन पर अभी फैसला होना बाकी है.
उम्मीद है कि चार स्पेशल बेंच हर हफ्ते तीन कामकाजी दिन सिर्फ इन्हीं पुराने मामलों पर ध्यान देंगी.
न्यायमूर्ति कांत ने अदालतों में बढ़ते लंबित मामलों की समस्या से निपटने के लिए सुधारों को अपनाने पर बार-बार जोर दिया है, इसलिए रोस्टर में यह बदलाव अहम है. इससे ठीक एक दिन पहले, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्बिट्रेशन एंड मीडिएशन (IIAM) की सिल्वर जुबली के उद्घाटन समारोह में CJI ने कहा था कि भारत में लंबित मामलों के संकट का समाधान सिर्फ अदालती फैसलों से नहीं किया जा सकता है.
उन्होंने कहा, ‘अभी भारतीय अदालतों में पांच करोड़ से ज्यादा मामले लंबित हैं, चाहे कोई भी न्यायिक व्यवस्था हो और उसमें कितने भी संसाधन क्यों न हों, वह अकेले इतने बड़े पैमाने पर लंबित मामलों के बोझ को नहीं निपटा सकती. इसे आंशिक रूप से अदालत के बाहर सुलझाना होगा.’