संयुक्त राष्ट्र (UN) की संस्था यूनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रन्स फंड (UNICEF) ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें हुए खुलासों ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है. रिपोर्ट में बच्चो के साथ ऑनलाइन सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार, यूनिसेफ ने अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और पूर्वी यूरोप के 21 देशों के बच्चों पर एक सर्वे कराया था, जिसके अनुसार इन सभी 21 देशों में 2 करोड़ बच्चे एक साल के अंदर ऑनलाइन सेक्सुअल हरासमेंट का शिकार हुए हैं. 12 से 17 साल की उम्र के हर 5 में से एक से अधिक बच्चे ने ऑनलाइन वर्ल्ड में यौन शोषण का सामना किया है. करीब 1.5 करोड़ बच्चों को अश्लील कंटेंट देखने को मजबूर किया गया.
किन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुआ यौन शोषण?
रिपोर्ट के अनुसार, 90 लाख बच्चों के साथ अश्लील बातें की गईं और उन्हें अश्लील तस्वीरें भेजी गईं. 40 लाख बच्चों की प्राइवेट फोटो उनकी मर्जी के बिना वायरल कर दी गईं. 60 प्रतिशत ऑनलाइन सेक्सुअल हरासमेंट फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और टिकटॉक पर हुआ. ज्यादातर मामलों में बच्चे अपनों के द्वारा शोषण का शिकार हुए, वहीं 38 प्रतिशत मामलों में पीड़ितों की मुलाकात आरोपी से पहली बार ऑनलाइन ही हुई थी. शोषण का शिकार हुए बच्चों में आत्महत्या करने के विचार आने या खुद को नुकसान पहुंचाने की संभावना सामान्य बच्चों की तुलना में 4 गुना ज्यादा पाई गई. डर, झिझक और बदनामी के कारण एक प्रतिशत से भी कम मामले पुलिस तक पहुंचे.
ऑनलाइन यौन शोषण क्या है और कैसे करें पहचान?
इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों और किशोरों का यौन शोषण करना, उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना, डराना, धमकाने या उनकी मर्जी के बिना उनकी तस्वीरों को अश्लील बनाकर वायरल करना ऑनलाइन सेक्सुअल हरासमेंट कहलाता है. ऑनलाइन ग्रूमिंग के तहत सोशल मीडिया या गेमिंग ऐप्स के जरिए बच्चों या किशोरों के साथ झूठ बोलकर दोस्ती की जाती है, उनका विश्वास जीता जाता है और यौन शोषण किया जाता है या उनकी अश्लील तस्वीरें दबाव डालकर मंगवाई जाती हैं.
कुछ मामलों में सेक्सटॉर्शन यानी सेक्सुअल ब्लैकमेलिंग की जाती है, जिसके तहत निजी या अंतरंग तस्वीरें और वीडियो लेकर उन्हें वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांगे जाते हैं. इसके अलावा बच्चों और किशोरों की तस्वीरें उनके सोशल मीडिया अकाउंट से चुराकर उन्हें अश्लील तरीके से एडिट करके वायरल कर दिया जाता है. अश्लील कंटेंट और वीडियो की लाइव स्ट्रीमिंग करके बच्चों या किशोरों को उन्हें देखने के लिए मजबूर किया जाता है. बच्चों या किशोरों को उनकी मर्जी के बिना अश्लील मैसेज, तस्वीरें, वीडियो भेजे जाते हैं
ऑनलाइन यौन शोषण की शिकायत किससे कैसे करें?
अगर बच्चे या किशोर ऑनलाइन यौन शोषण का शिकार हो जाएं तो तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल शिकायत दर्ज कराएं. ऑनलाइन कंप्लेंट के लिए पोर्टल पर लॉगइन करके महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की कैटेगरी सेलेक्ट करें. अगर नाम उजागर नहीं करना चाहते तो Register Anonymously का ऑप्शन सेलेक्ट कर सकते हैं. अन्य मामलों के लिए Report Other Cyber Crime का ऑप्शन भी है. इसके अलावा 1930 नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं.
इमरजेंसी में पुलिस की मदद के लिए 112 पर कॉल कर सकते हैं. नेशनल वूमेन हेल्पलाइन नंबर 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर कॉल कर सकते हैं. नजदीकी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन या पुलिस थाने में लिखित शिकायत देकर FIR भी दर्ज करा सकते हैं. वहीं प्रूफ के तौर पर आरोपी से हुई चैट के स्क्रीनशॉट रखें. आरोपी के द्वारा भेजे गए फोटो, वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, प्रोफाइल लिंक या URL को संभालकर रखें. वहीं अगर ममला सेक्सटॉर्शन (सेक्सुअल ब्लैकमेलिंग) का हो तो कोई पैसा न दें.
ऑनलाइन यौन शोषण के खिलाफ भारत में क्या कानून हैं?
भारत में ऑनलाइन सेक्सुअल हरासमेंट के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act 2000) के तहत नियम और सजा का प्रावधान किया गया है. पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act 2012) के तहत नियमों और सजा का प्रावधान किया गया है. भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) के तहत भी कड़े कानून बनाए गए हैं और सजा का प्रावधान भी किया गया है.
IT एक्ट की धारा 67 के तहत अश्लील सामग्री वायरल करने वाले दोषी को 3 वर्ष की कैद और 5 लाख जुर्माने का प्रावधान किया गया है. अगर दोषी फिर से अपराध करता है तो 5 साल की कैद और 10 लाख का जुर्माना हो सकता है. धारा 67A के तहत अश्लील फोटो, वीडियो या मैसेज भेजने के दोशी को 5 साल की कैद और 10 लाख जुर्माना हो सकता है. दूसरी बार अपराध करने पर 7 साल की कैद और जुर्माने हो सकता है. धारा 67B के तहत बच्चों से जुड़ी अश्लील फोटो, वीडियो देखने, स्टॉक रखने या वायरल करने पर 5 साल की कैद और 10 लाख जुर्माना लग सकता है और दूसरी बार अपराध करने पर 7 साल की कैद हो सकती है.
पॉक्सो एक्ट के तहत अगर पीड़ित नाबालिग हो तो सजा-जुर्माने का प्रावधान किया गया है. धारा 12 के तहत सोशल मीडिया के जरिए नाबालिग बच्चों-किशोरों को अश्लील मैसेज भेजने पर 3 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है. धारा 14 के तहत 5 साल की कैद और जुर्माना लग सकता है, दूसरी बार अपराध करने पर 7 साल की सजा हो सकती है. धारा 15 के तहत बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी फोटो, वीडियो या अन्य कंटेंट स्टोर करना, डाउनलोड करना या देखना भी पॉक्सो एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है. भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की धारा 294 और धारा 295 के तहत ऑनलाइन अश्लील फोटो, वीडियो या अन्य कंटेट बेचना, दिखाना, ब्लैकमेल करना दंडनीय अपराध है.