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Happy Janmashtami 2026: पुरी के समुद्र तट पर सुदर्शन पटनायक ने बनाई श्रीकृष्ण की मनमोहक तस्वीर, देखें रेत पर बनी कलाकृति

Happy Janmashtami 2026: विश्व प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने पुरी के समुद्र तट पर रेत से श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की तस्वीर बनाई है. बाल कृष्ण के स्वरूप के साथ उन्होंने रेत पर हैप्पी जन्माष्टमी लिखा.

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Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर समुद्र किनारे भक्ति और कला की अनोखी जुगलबंदी दिखी है. सुदर्शन पटनायक ने पुरी के समुद्र तट पर रेत से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की तस्वीर बनाई है. पुरी में भक्ति और कला का संगम देखने को मिला है. साधारण रेत भी दिव्यता का रूप दिख रहा है. जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की बेहद आकर्षक रेत कलाकृति तैयार की है. समुद्र की लहरों के बीच बनाई गई यह कलाकृति श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है

भगवान श्रीकृष्ण की बेहद आकर्षक रेत कलाकृति

सुदर्शन पटनायक ने अपनी इस रचना में बाल गोपाल को गाय, बांसुरी और माखन से भरे मटकों के साथ बेहद खूबसूरत अंदाज में दर्शाया है. रेत पर उकेरे गए श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप में भक्ति, मासूमियत और भारतीय संस्कृति की झलक एक साथ दिखाई देती है. प्राकृतिक संसाधनों से तैयार यह कलाकृति समुद्र तट की खूबसूरती में भी चार चांद लगाती नजर आती है. पटनायक अपनी रेत कला के जरिए अक्सर भारतीय संस्कृति, त्योहारों और सामाजिक संदेशों को दुनिया के सामने रखते रहे हैं. उनकी कला की खासियत यह है कि वे रेत, पानी और प्राकृतिक रंगों जैसे साधारण माध्यमों से ऐसी प्रभावशाली रचनाएं तैयार करते हैं, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं और साथ ही भारतीय परंपराओं का संदेश भी देती हैं.

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पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप

कृष्ण के बाल रूप से जुड़ी माखन चोरी, गायों और बांसुरी की छवि भारतीय लोक-संस्कृति में गहराई से रची-बसी है. सुदर्शन पटनायक की यह कलाकृति इसी सांस्कृतिक भाव को समुद्र तट पर जीवंत करती दिखाई देती है. इस रचना की एक खास खूबी इसका पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप भी है. बिना किसी स्थायी निर्माण के रेत और प्राकृतिक माध्यमों से तैयार की गई कला यह संदेश देती है कि रचनात्मकता के लिए प्रकृति के साथ संतुलन बनाना भी संभव है. ऐसी कलाकृतियां पुरी जैसे तटीय पर्यटन स्थलों को नया आकर्षण देती हैं और देश की क्रिएटिव इकोनॉमी को भी मजबूती प्रदान करती हैं.

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भारतीय कला को दे रहे हैं नई पहचान

सुदर्शन पटनायक की कला केवल एक खूबसूरत तस्वीर या मूर्ति तक सीमित नहीं रहती. उनकी रचनाएं भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और समकालीन संदेशों को एक साथ प्रस्तुत करती हैं. पुरी के समुद्र तट पर बाल कृष्ण की यह कलाकृति भी इसी परंपरा का हिस्सा है. रेत पर विराजमान मुरलीधर का बाल रूप, पास खड़ी गाय और माखन के मटकों की छवि श्रद्धालुओं को कृष्ण की बाल लीलाओं की याद दिला रही है. समुद्र की लहरों और प्राकृतिक वातावरण के बीच यह दृश्य भक्ति और कला का ऐसा संगम प्रस्तुत करता है, जो देखते ही मन मोह लेता है. सुदर्शन पटनायक जैसे कलाकार न केवल भारतीय कला को नई पहचान दे रहे हैं, बल्कि अपनी रचनाओं के जरिए युवा कलाकारों को भी प्रेरित कर रहे हैं. पुरी के समुद्र तट पर जन्माष्टमी के अवसर पर बनाई गई भगवान श्रीकृष्ण की यह कलाकृति एक बार फिर साबित करती है कि कला जब संस्कृति और आस्था से जुड़ती है, तो उसका प्रभाव सीमाओं से कहीं आगे तक पहुंचता है.

First published on: Sep 04, 2026 11:59 AM

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