सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता उमर अब्दुल्ला को उनकी पत्नी पायल नाथ (अब्दुल्ला) से तलाक की मंजूरी दे दी है. शीर्ष अदालत ने माना कि दोनों के बीच शादी पूरी तरह से टूट चुकी है और 2009 से दोनों अलग रह रहे हैं. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों के बीच आपसी सहमति से हुए समझौते को दर्ज करते हुए तलाक को औपचारिक मंजूरी दे दी. इसके साथ ही दोनों के बीच का लगभग 30 साल पुराना वैवाहिक रिश्ता अब कानूनी तौर पर समाप्त हो गया है.
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‘दोनों ने आजादी को अपनाया’
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को सूचित किया कि दोनों पक्षों ने मध्यस्थता के जरिए अपने सभी मतभेदों को सुलझा लिया है. सिब्बल ने अदालत से कहा, दोनों ने आजादी को अपना लिया है. सब कुछ तय हो गया है. अदालत तलाक की मंजूरी दे सकती है और दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज सभी अन्य मामले वापस ले लेंगे.
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने इस समझौते को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले का निपटारा कर दिया. पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अच्छी बात है और वे इन्हीं शर्तों पर याचिका का निपटारा कर रहे हैं.
1994 में हुई थी शादी, 2009 से रह रहे थे अलग
उमर अब्दुल्ला और पायल का विवाह 1 सितंबर 1994 को हुआ था. हालांकि, दोनों साल 2009 से ही एक-दूसरे से अलग रह रहे थे. उनके दो बेटे हैं. उमर अब्दुल्ला ने पहले दिल्ली की फैमिली कोर्ट में क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की याचिका दायर की थी, जिसे 2016 में खारिज कर दिया गया था. इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने भी दिसंबर 2023 में फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और माना कि उमर ‘क्रूरता’ का आरोप साबित करने में विफल रहे हैं.
अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल
हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए उमर अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने के लिए मेडिएशन सेंटर भेजा था. समझौते के बाद दोनों पक्षों ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत संयुक्त आवेदन देकर तलाक की मांग की थी, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया.
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