‘कश्मीर भारत का अहम हिस्सा’, सर्जियो गोर के बयान से चिढ़ा पाकिस्तान, अब चीन की बारी! लद्दाख दौरे पर पहुंचे अमेरिकी दूत
अमेरिका इन दिनों भारत के सीमावर्ती इलाकों और बॉर्डर पर सुरक्षा चुनौतियों को करीब से समझने का प्रयास कर रहा है. सर्जियो गोर के जम्मू-कश्मीर दौरे पर पाकिस्तान और चीन दोनों की नजरें टिकी हुई हैं.
Written By: Akarsh Shukla|Updated: Aug 20, 2026 13:02
Edited By : Akarsh Shukla|Updated: Aug 20, 2026 13:02
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जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर हैं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर. (Photo: ANI)
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‘जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा है’, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत माने जाने वाले सर्जियो गोर ने इतना क्या कह दिया, पाकिस्तान को तो जबरदस्त मिर्ची लग गई. मिर्ची ऐसी लगी की शहबाज सरकार ने अमेरिकी राजदूत तक को तलब कर दिया. कश्मीर और लद्दाख के दो दिवसीय दौरे पर गए सर्जियो गोर ने क्या गलत कहा, जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा. कश्मीर में सर्जियो गोर के बयान से पाकिस्तान तो चिढ़ गया, लेकिन आज चीन भी अमेरिकी दूत के लद्दाख दौरे से परेशान है.
सर्जियो गोर के दौरे पर चीन-पाकिस्तान की नजर
दरअसल, अमेरिका इन दिनों भारत के सीमावर्ती इलाकों और बॉर्डर पर सुरक्षा चुनौतियों को करीब से समझने का प्रयास कर रहा है. सर्जियो गोर के जम्मू-कश्मीर दौरे पर पाकिस्तान और चीन दोनों की नजरें टिकी हुई हैं. न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कहा, ‘अनुच्छेद 370 हटने के बाद से रोजगार के जो मौके बने हैं और जो शांति और सुकून आया है, उसे देखिए… हाल ही में जब अमेरिकी राजनयिकों ने दौरा किया, तो उन्होंने इसे खुद देखा और उनकी अपनी रिपोर्ट भी इस बड़े बदलाव की पुष्टि करेंगी’.
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#WATCH | Delhi: On "This is an important part of India" statement by US Ambassador to India Sergio Gor, Union Minister Sanjay Seth says, "Look at the employment opportunities that have emerged and the peace and tranquility that have prevailed since the abrogation of Article… pic.twitter.com/PkLnudzuri
संजय सेठ ने आगे कहा, ‘कश्मीर को विकास के रास्ते पर ले जाने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन सच में साकार हुआ है… पाकिस्तान इससे परेशान है. उन्होंने राजनयिकों को तलब भी किया है.’
वहीं, सर्जियो गोर के ‘जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा है’ बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए साउथ एशिया एनालिस्ट माइकल कुगेलमैन ने कहा, ‘यह साफ नहीं है कि क्या यह असल में अमेरिका की पॉलिसी को दिखाता है, लेकिन नई दिल्ली में इस बात का स्वागत जरूर होगा. मुझे लगता है कि ऐसे समय में जब रिश्तों को मजबूती की जरूरत थी, उन्हें यह मजबूती मिली है. दूसरी तरफ, मुझे लगता है कि ऐसे समय में जब अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्ते ठीक-ठाक चल रहे हैं, कश्मीर में अमेरिकी राजदूत की टिप्पणियों को इस्लामाबाद या रावलपिंडी में अच्छा नहीं माना जाएगा.
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों के लिए थोड़ी अप्रत्याशित रुकावट है, लेकिन देखते हैं क्या होता है. देखते हैं कि इस दौरे के बाद अमेरिकी दूतावास क्या कहता है. मुझे लगता है कि हमें जल्दबाजी में किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए. लेकिन हां, गोर के कश्मीर दौरे के दौरान पिछले कुछ घंटों में जो कुछ हुआ है, उसे देखते हुए मुझे लगता है कि यह दोनों देशों के रिश्तों को बहुत जरूरी मजबूती देता है.’