‘प्रधान को हटाकर, प्रधानमंत्री बचा लिया…’, लोकसभा में अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा में मोदी सरकार को जमकर घेरा. उन्होंने कहा कि कानून बनने के बाद भी बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुए.
Written By: Varsha Sikri|Updated: Jul 28, 2026 15:51
Edited By : Varsha Sikri|Updated: Jul 28, 2026 15:51
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Credit: Social Media
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मंगलवार को संसद के मानसून सत्र में परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा हुई. इस दौरान समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मोदी सरकार को जमकर घेरा. उन्होंने लोकसभा में कहा कि कानून बनने के बाद भी बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुए. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया गया. अखिलेश ने कहा- ”जब धर्मेंद्र प्रधान संसद) पहुंचे, तो सदन के बाहर उनका स्वागत किया गया. सोचिए सदस्यों को कितनी बड़ी राहत मिली होगी और वो किस बड़े संकट से बच गए. एक ‘प्रधान’ को हटाकर, आपने असल में ‘प्रधानमंत्री’ को बचा लिया.”
समाजवादी पार्टी चीफ ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी नफरत की राजनीति कर रही है. उन्होंने संसद मार्च के दौरान बच्चों पर हुई बर्बरता को लेकर कहा कि सरकार इमरजेंसी से कम अन्याय नहीं कर रही. अखिलेश ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इमरजेंसी के बाद भी इंसाफ हुआ था और अब भी न्याय होगा. समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा, “जो लोग चढ़ावे की चोरी नहीं रोक पाए, वो पेपर लीक कैसे रोक सकते हैं? उन्होंने मौजूदा कानून में बस एक संशोधन पेश किया है. आप किसे धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं? अगर कानून असरदार होता, तो BJP के दस साल के कार्यकाल में 20 परीक्षाओं के पेपर कैसे लीक हो जाते?”
"जो लोग चढ़ावा चोरी नहीं बचा पाए वो पेपर लीक कैसे बचा पाएंगे।"
अखिलेश ने कहा- “जब से सरकार बनी है तब से सरकार कोशिश कर रही है कि शिक्षा, परीक्षा, यूनिवर्सिटी का ताना बाना पूरा ध्वस्त हो जाए. उसको एक रंगी बना दे हम, उसमें अंडरग्राउंड के लोग शामिल हो जाएं.” उन्होंने आगे कहा- यूपी सबसे बड़ा राज्य है, जहां से प्रधानमंत्री चुन कर आ रहे हैं, वहां तक पेपर लीक हो रहा है. एनटीए जो सबसे विश्वनीय संस्था है उसमें आउटसोर्स पर अपने कर्मचारियों को रखा हुआ है.” SP चीफ ने कहा- ”सरकार को इस बात का घमंड था कि वो कभी झुकती नहीं है, लेकिन नई पीढ़ी के लोगों ने ये नारा दिया कि उसे झुकाने वाले की ज़रूरत है और सच में, सरकार झुकती है.”
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"सरकार को अहंकार था कि सरकार झुकती नहीं है लेकिन नई पीढ़ी के लोगों ने नारा दिया कि झुकाने वाला चाहिए सरकार भी झुकती है।"