संसद के सत्र और देश के राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई, जब केंद्र सरकार की ओर से मंत्री जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरोपों पर कड़ा जवाब दिया. राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सरकार पर सीधा हमला बोला था. हालांकि, सरकार ने राहुल गांधी के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि छात्रों या प्रदर्शनकारियों पर कोई गोली नहीं चलाई गई है. राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और तथ्याहीन हैं.
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया था. सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए तय नियमों का ही पालन किया है.
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राहुल गांधी ने क्या कहा था?
इससे पहले राहुल गांधी ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग किया गया और उन पर गोलियां चलाई गईं। राहुल गांधी ने इस पूरी घटना के लिए गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे।
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152 पेपर लीक और 750 करोड़ बच्चों का दावा समझ से परे
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रियंका गांधी के उस दावे पर चुटकी ली, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में 152 बार पेपर लीक हुए हैं और इससे लगभग 750 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए हैं. मंत्री ने संसद में कहा, "प्रियंका गांधी ने कहा कि 152 दस्तावेज लीक हुए. लेकिन यह आंकड़ा कहां से आया? इसका कोई सबूत या प्रमाण पेश नहीं किया गया." डॉ. सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि पूरी दुनिया की आबादी ही करीब 8 अरब है, ऐसे में 750 करोड़ बच्चों के प्रभावित होने का दावा समझ से परे है. यह आंकड़ा या तो मनगढ़ंत है, इसके पीछे कोई शरारत है, या फिर यह अज्ञानता को दर्शाता है.
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पेपर लीक कानून पर भी सरकार ने दिया जवाब
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रियंका गांधी के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि 2024 में बने पेपर लीक विरोधी कानून के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि शायद प्रियंका गांधी ने कानून के लागू होने की प्रक्रिया का ठीक से अध्ययन नहीं किया है. मंत्री ने संसद को बताया कि पिछले दो सालों में इस नए कानून के तहत कुल 52 FIR दर्ज की जा चुकी हैं. इनमें से 29 मामले 'अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम' के तहत और 23 मामले 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) के तहत दर्ज किए गए हैं. सरकार पेपर लीक माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है.
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