चुप्पी से लेकर BJP में एंट्री तक… कैसे और कब बिगड़े राघव चड्ढा और केजरीवाल के रिश्ते?
राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए दावा किया कि उनके साथ राज्यसभा में AAP के दो तिहाई सदस्य पार्टी छोड़ेंगे.
Edited By Arif Khan

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आम आदमी पार्टी के साथ लंबे समय तक सांसद रहे राघव चड्ढा महीनों की अटकलों को विराम देते हुए शुक्रवार भाजपा में शामिल हो गए. उनके साथ राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी पार्टी छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर ली है. इसके साथ ही राघव चड्ढा ने जब पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए दावा किया कि उनके साथ राज्यसभा में AAP के दो तिहाई सदस्य पार्टी छोड़ेंगे.
राघव चड्ढा पहली बार AAP से दूरी बनाते हुए तब दिखे थे, जब 2024 में अरविंद केजरीवाल को शराब नीति मामले में गिरफ्तार किया गया था. केजरीवाल की गिरफ्तारी पर राघव चड्ढा की कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई थी. उस वक्त चड्ढा ने पार्टी के समर्थन में न आने के पीछे लंदन में मेडिकल चेकअप को वजह बताया था.
इसके साथ ही राघव चड्ढा पार्टी के विरोध-प्रदर्शन में भी नदारद दिख रहे थे, जिसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि AAP के साथ उनके संबंधों में सब कुछ ठीक नहीं है. उसी साल सितंबर में, लंदन से लौटने के बाद चड्ढा ने केजरीवाल से मुलाकात की थी. उस मुलाकात ने थोड़े समय के लिए ऐसा दिखाया जैसे सब कुछ सही चल रहा है.
लेकिन यह धारणा तब टूट गई जब 2025 की शुरुआत में राघव चड्ढा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों के प्रचार में सक्रिय रूप से भाग नहीं लिया. इन चुनाव में AAP को हार का सामना करना पड़ा था.
फिर शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और उनके पूर्व डिप्टी मनीष सिसोदिया को जेल से रिहा किया गया. लेकिन इस पर भी चड्ढा ने चुप्पी साधी रखी, जिससे साफ जाहिर हो गया कि पार्टी में सब कुछ सही नहीं चल रहा है.
इस महीने की आखिरी में सब कुछ खुलकर सामने आ गया, जब AAP नेतृत्व ने राज्यसभा में उन्हें उप-नेता के पद से हटा दिया. राघव चड्ढा की जगह अशोक कुमार मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का डिप्टी लीडर बना दिया गया. इसके साथ ही राज्यसभा सचिवालय को पार्टी नेतृत्व ने पत्र लिखकर कहा कि पार्टी के कोटे से चड्डा को सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए. इस पर राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था, ‘खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं.’
शुक्रवार को AAP छोड़ने का ऐलान करते हुए राघव चड्ढा ने कहा, ‘मैं आपको वास्तविक कारण बता रहा हूं कि मैंने खुद को पार्टी की गतिविधियों से क्यों दूर कर लिया. मैं उनके पापों का हिस्सा नहीं बनना चाहता था. मैं उनकी दोस्ती के योग्य नहीं था क्योंकि मैं उनके अपराध का हिस्सा नहीं था. हमारे पास केवल दो विकल्प थे – या तो राजनीति छोड़ दें और पिछले 15-16 वर्षों के अपने सार्वजनिक कार्यों को त्याग दें या हम अपनी ऊर्जा और अनुभव के साथ सकारात्मक राजनीति करें.’
साथ ही उन्होंने कहा, ‘इसलिए, हमने फैसला किया है कि हम, राज्यसभा में AAP के 2/3 सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हैं और खुद का भाजपा में विलय करते हैं.’
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