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‘हमारे छात्र देश के भविष्य के निर्माता’, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति ने कहा, लोकतंत्र की जननी भारतभूमि के निवासियों में जनभागीदारी की भावना सदा से विद्यमान रही है. उस भावना को, नई ऊर्जा के साथ, हमारे देशवासी आगे बढ़ा रहे हैं.

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15 अगस्त को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि हमारा तिरंगा हमारी आजादी का प्रतीक है. देश के नाम संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, ‘हमारे विद्यार्थी, भारत के भविष्य निर्माता हैं. जिस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकार और समाज का एकजुट रहना जरूरी है, उसी तरह विद्यार्थियों के वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी सभी के सम्मिलित प्रयास जरूरी हैं.’

उन्होंने कहा, ‘अब से कुछ ही घंटों बाद, हमारे देश की स्वाधीनता के 80वें वर्ष का शुभारंभ होगा. देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीय यह पर्व उल्लास के साथ मनाते हैं. हमारा तिरंगा हमारी स्वाधीनता का प्रतीक है. इसे हम पूरी शान से फहराते हैं. 15 अगस्त 1947 के दिन भारतमाता पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुईं. सभी देशवासी, स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता बने.’

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उन्होंने कहा, ‘हमारे देशवासी महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती मना रहे हैं. महात्मा फुले और क्रांति-ज्योति सावित्रीबाई फुले ने सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान दिया है. उनके आदर्शों के अनुसार विगत कुछ वर्षों के दौरान वंचित वर्गों को आगे बढ़ाने के लक्ष्य को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई है. पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में हमारे देश ने तेज गति से समावेशी विकास किया है, विरासत और विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी है, तथा विकास में बाधक दशकों पुराने अनेक अवरोधों को दूर किया है.’

राष्ट्रपति ने साथ ही कहा, ‘जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायिका में, जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें. कार्यपालिका का कर्तव्य है कि जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को कार्यरूप दे. न्याय-व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि अभाव के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे. आज साधारण पृष्ठभूमि के लोग, अनेक क्षेत्रों में, असाधारण योगदान दे रहे हैं. इससे, मेरा यह विश्वास दृढ़ होता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है.’

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संबोधन में साथ ही कहा, ‘लोकतंत्र की जननी भारतभूमि के निवासियों में जनभागीदारी की भावना सदा से विद्यमान रही है. उस भावना को, नई ऊर्जा के साथ, हमारे देशवासी आगे बढ़ा रहे हैं. जब हमारा देश स्वतंत्र हुआ, उस समय देश के विभाजन के गंभीर परिणामों के साथ-साथ, 550 से अधिक रियासतों को नवस्वाधीन भारत के साथ जोड़ना भी एक असाधारण चुनौती थी. सरदार पटेल ने राजशाही व्यवस्थाओं को समाप्त करके हमारे स्वाधीन लोकतंत्र में उनका विलय किया.

लाल किले पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

दिल्ली में लाल किले पर शनिवार को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के मद्देनजर इस ऐतिहासिक स्मारक पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. पुलिस ने बहुस्तरीय ‘आतंकवाद-रोधी प्रतिक्रिया’ योजना तैयार करने के साथ-साथ एआई आधारित 1,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने समारोह के दौरान बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ ‘मॉक ड्रिल’ भी की है.

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स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किला परिसर में पहली बार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा, जिसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का गायन होगा. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह कार्यक्रम ‘वंदे मातरम’ की 150 साल पुरानी विरासत को याद करने और भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में युवा शक्ति की ऊर्जा, आकांक्षाओं और अहम योगदान का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया जा रहा है. बयान के मुताबिक, लाल किले पर 80वें स्वतंत्रता दिवस समरोह का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे. इसमें कहा गया है कि लाल किला पहुंचने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह प्रधानमंत्री का स्वागत करेंगे.

First published on: Aug 14, 2026 07:06 PM

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