प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले सप्ताह फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक करेंगे. इस मुलाकात की पुष्टि व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने की है. यह दोनों नेताओं की पिछले लगभग 16 महीनों में पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी. प्रधानमंत्री मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर 16-17 जून को G7 समिट में शामिल होंगे. समिट के दौरान, उनके G7 नेताओं, सहयोगी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ कई मुद्दों पर बातचीत करने की उम्मीद है, जिनमें ग्लोबल पार्टनरशिप, आर्थिक विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सुरक्षित इस्तेमाल शामिल है.
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क्यों खास है ये मुलाकात?
ट्रंप और पीएम मोदी की पिछली मुलाकात के बाद से भारत-अमेरिका संबंधों में कई मोर्चों पर तनाव आया है. इनमें वॉशिंगटन का भारतीय निर्यात पर भारी टैरिफ लगाना, राष्ट्रपति ट्रंप का बार-बार ये दावा करना कि उन्होंने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान विवाद को सुलझाने में मदद की और रूस के साथ भारत का तेल व्यापार शामिल है. ये बातचीत ईरान युद्ध को लेकर बढ़ते तनाव के माहौल में होगी, जिसका भारत पर काफी आर्थिक असर पड़ा है. ओमान के तट के पास भारतीय नाविकों को ले जा रहे कई तेल टैंकरों पर हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों के बाद रिश्तों पर और दबाव बढ़ा है. ऐसे ही एक हमले में पलाऊ के झंडे वाले टैंकर 'सेटेबेलो' को निशाना बनाया गया, जिसमें सवार तीन भारतीय नाविक मारे गए.
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन
तीन नाविकों की मौत के बाद, नई दिल्ली ने वॉशिंगटन के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया और अमेरिकी 'चार्ज डी अफेयर्स' (राजनयिक प्रतिनिधि) को तलब किया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने आम नागरिकों के जहाजों के खिलाफ जानलेवा बल के इस्तेमाल पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की है और इस बात पर जोर दिया है कि कमर्शियल जहाजों पर हमले से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा और स्थिरता कमजोर होती है.हालांकि, खबरों के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन हमलों का बचाव करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर से कहा कि वॉशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी के किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगा.
ये भी पढ़ें: अमेरिका से समझौते के लिए ईरान की नई शर्तें, अराघची की पोस्ट को ट्रंप ने किया री-पोस्ट, जानें कब-कैसे होगी डील?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले सप्ताह फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक करेंगे. इस मुलाकात की पुष्टि व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने की है. यह दोनों नेताओं की पिछले लगभग 16 महीनों में पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी. प्रधानमंत्री मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर 16-17 जून को G7 समिट में शामिल होंगे. समिट के दौरान, उनके G7 नेताओं, सहयोगी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ कई मुद्दों पर बातचीत करने की उम्मीद है, जिनमें ग्लोबल पार्टनरशिप, आर्थिक विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सुरक्षित इस्तेमाल शामिल है.
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क्यों खास है ये मुलाकात?
ट्रंप और पीएम मोदी की पिछली मुलाकात के बाद से भारत-अमेरिका संबंधों में कई मोर्चों पर तनाव आया है. इनमें वॉशिंगटन का भारतीय निर्यात पर भारी टैरिफ लगाना, राष्ट्रपति ट्रंप का बार-बार ये दावा करना कि उन्होंने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान विवाद को सुलझाने में मदद की और रूस के साथ भारत का तेल व्यापार शामिल है. ये बातचीत ईरान युद्ध को लेकर बढ़ते तनाव के माहौल में होगी, जिसका भारत पर काफी आर्थिक असर पड़ा है. ओमान के तट के पास भारतीय नाविकों को ले जा रहे कई तेल टैंकरों पर हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों के बाद रिश्तों पर और दबाव बढ़ा है. ऐसे ही एक हमले में पलाऊ के झंडे वाले टैंकर ‘सेटेबेलो’ को निशाना बनाया गया, जिसमें सवार तीन भारतीय नाविक मारे गए.
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन
तीन नाविकों की मौत के बाद, नई दिल्ली ने वॉशिंगटन के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया और अमेरिकी ‘चार्ज डी अफेयर्स’ (राजनयिक प्रतिनिधि) को तलब किया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने आम नागरिकों के जहाजों के खिलाफ जानलेवा बल के इस्तेमाल पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की है और इस बात पर जोर दिया है कि कमर्शियल जहाजों पर हमले से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा और स्थिरता कमजोर होती है.हालांकि, खबरों के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन हमलों का बचाव करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर से कहा कि वॉशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी के किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगा.
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