धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पीएम मोदी ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर रविवार को बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि परीक्षा सुधारों पर एक हाई लेवल टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता नंदन नीलेकणि करेंगे. रविवार को पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा-'विद्यार्थियों के भविष्य के लिए भारत सरकार लगातार कई कदम उठा रही है. जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, वो जेलों में सड़ रहे हैं. हम फास्ट ट्रैक कोर्ट बना चुके हैं और संसद में कठोर प्रावधानों के साथ नया कानून बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं.'
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टास्क फोर्स के सदस्य
- प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ – नंदन नीलेकणी
- इसरो के पूर्व अध्यक्ष – एस. सोमनाथ
- पूर्व आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) निदेशक – तपन डेका
- आईआईटी मद्रास के निदेशक – वी. कामकोटि
- पूर्व शिक्षा सचिव – अनीता करवाल
- लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ – अमृत लाल मीणा
पीएम मोदी ने और क्या कहा?
पीएम मोदी ने आगे कहा, 'हमें भविष्य के बारे में सोचना होगा. हमारा एजुकेशन सिस्टम भरोसेमंद, ट्रांसपेरेंट और एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस होनी चाहिए. इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, हमने पूरी दुनिया में मशहूर टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि की लीडरशिप में एक हाई-पावर टास्क फोर्स गठित करने का फैसला लिया है.' पीएम मोदी ने कहा कि इस टास्क फोर्स का फोकस परीक्षा सुधारों पर होगा और इसी के रिपोर्ट पर आगे के एग्जाम की प्लानिंग होगी.
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नंदन नीलेकणि कौन हैं?
नंदन निलेकणि का पूरा नाम पूरा नाम नंदन मोहनराव निलेकणि है. वो टेक्नोलॉजी फील्ड के धुरंधर हैं.वो Infosys
के को-फाउंडर भी रहे हैं और उन्हें आधार कार्ड का रचयिता भी कहा जाता है. निलेकणि का जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था. उन्होंने आगे चलकर IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की. साल 1981 में निलेकणि ने एन.आर. नारायण मूर्ति और छह साथियों के साथ मिलकर Infosys की स्थापना की. आज इसका नाम इंडिया की टॉप IT कंपनियों में शामिल है. निलेकणि 2002 से लेकर 2007 तक Infosys के CEO और MD के पद पर काम कर चुके हैं. 2017 में उन्होंने कंपनी के चेयरमैन की कुर्सी संभाली.
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