दिल्ली के जंतर मंतर पर बीते कई दिनों से चल रहे CJP के प्रदर्शन के बाद 25 जुलाई शनिवार को आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. वहीं, अब लोगों के बीच ये चर्चा भी हो रही है कि साल 2014 के बाद से जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है तो ऐसे कई मौके आए हैं जब राजनीतिक दबाव, जन आंदोलन और विरोध के बीच सरकार को अपने फैसले पलटने पड़े हैं और या फिर अपने लिए हुए फैसलों से पीछे भी हटना पड़ा है. इस समय ऐसे कई मामलों की चर्चा जोरों पर हो रही है.
तीन कृषि कानूनों की वापसी (2021)
सबसे चर्चित मामला साल 2021 का है. जब केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया. करीब एक साल तक चले किसान आंदोलन और लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की. इसे सरकार के सबसे बड़े नीति परिवर्तन के रूप में देखा गया.
भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव (2015)
साल 2015 में केंद्र सरकार ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानून में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया था. सरकार का कहना था कि इससे सड़क, रेल, औद्योगिक परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचा विकास कार्यों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक सरल और तेज हो जाएगी. हालांकि इस प्रस्ताव का किसान संगठनों, विपक्षी दलों और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कुछ सहयोगी दलों ने विरोध किया. उनका तर्क था कि प्रस्तावित बदलावों से किसानों और भूमिधारकों के हित प्रभावित होंगे और उनकी कानूनी सुरक्षा कमजोर पड़ जाएगी. बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक विरोध के बीच सरकार ने आखिरकार संशोधन प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया था. फिर प्रधानमंत्री मोदी ने ये ऐलान किया कि भूमि अधिग्रहण कानून में प्रस्तावित बदलाव लागू नहीं किए जाएंगे और मौजूदा व्यवस्था पहले जैसी ही रहेगी.
'मी टू' अभियान और एम.जे. अकबर का इस्तीफा (2018)
अक्टूबर 2018 में देश में #MeToo अभियान ने जोर पकड़ा, जिसके दौरान कई महिला पत्रकारों ने तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए. अकबर ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए उनका खंडन किया, लेकिन मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा. राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बढ़ते दबाव तथा विपक्ष की प्रतिक्रिया के बीच उन्होंने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया.
131वें संविधान संशोधन विधेयक पर सरकार ने बदला रुख (2025)
नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को संसद में पेश नहीं करने का फैसला किया. इस प्रस्ताव को लेकर विशेष रूप से दक्षिण भारत के कई राज्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने गंभीर आपत्ति जताई थी. उनका तर्क था कि प्रस्तावित बदलावों का राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रभाव पड़ सकता है. बढ़ते विरोध और विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों के बाद सरकार ने विधेयक को आगे बढ़ाने के बजाय फिलहाल रोकने का फैसला किया.
UPSC लेटरल एंट्री भर्ती का विज्ञापन वापस लिया (2024)
अगस्त 2024 में केंद्र सरकार ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से विभिन्न वरिष्ठ पदों पर लेटरल एंट्री के लिए जारी भर्ती विज्ञापन वापस लेने का फैसला लिया था. इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों के अलावा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी सवाल उठाए थे. मुख्य आपत्ति यह थी कि प्रस्तावित भर्ती में आरक्षण से जुड़े प्रावधानों का पालन नहीं किया गया था. राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बढ़ते विरोध के बीच सरकार ने मामले की समीक्षा करते हुए विज्ञापन वापस ले लिया और भर्ती प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया.
दिल्ली के जंतर मंतर पर बीते कई दिनों से चल रहे CJP के प्रदर्शन के बाद 25 जुलाई शनिवार को आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. वहीं, अब लोगों के बीच ये चर्चा भी हो रही है कि साल 2014 के बाद से जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है तो ऐसे कई मौके आए हैं जब राजनीतिक दबाव, जन आंदोलन और विरोध के बीच सरकार को अपने फैसले पलटने पड़े हैं और या फिर अपने लिए हुए फैसलों से पीछे भी हटना पड़ा है. इस समय ऐसे कई मामलों की चर्चा जोरों पर हो रही है.
तीन कृषि कानूनों की वापसी (2021)
सबसे चर्चित मामला साल 2021 का है. जब केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया. करीब एक साल तक चले किसान आंदोलन और लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की. इसे सरकार के सबसे बड़े नीति परिवर्तन के रूप में देखा गया.
भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव (2015)
साल 2015 में केंद्र सरकार ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानून में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया था. सरकार का कहना था कि इससे सड़क, रेल, औद्योगिक परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचा विकास कार्यों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक सरल और तेज हो जाएगी. हालांकि इस प्रस्ताव का किसान संगठनों, विपक्षी दलों और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कुछ सहयोगी दलों ने विरोध किया. उनका तर्क था कि प्रस्तावित बदलावों से किसानों और भूमिधारकों के हित प्रभावित होंगे और उनकी कानूनी सुरक्षा कमजोर पड़ जाएगी. बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक विरोध के बीच सरकार ने आखिरकार संशोधन प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया था. फिर प्रधानमंत्री मोदी ने ये ऐलान किया कि भूमि अधिग्रहण कानून में प्रस्तावित बदलाव लागू नहीं किए जाएंगे और मौजूदा व्यवस्था पहले जैसी ही रहेगी.
‘मी टू’ अभियान और एम.जे. अकबर का इस्तीफा (2018)
अक्टूबर 2018 में देश में #MeToo अभियान ने जोर पकड़ा, जिसके दौरान कई महिला पत्रकारों ने तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए. अकबर ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए उनका खंडन किया, लेकिन मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा. राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बढ़ते दबाव तथा विपक्ष की प्रतिक्रिया के बीच उन्होंने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया.
131वें संविधान संशोधन विधेयक पर सरकार ने बदला रुख (2025)
नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को संसद में पेश नहीं करने का फैसला किया. इस प्रस्ताव को लेकर विशेष रूप से दक्षिण भारत के कई राज्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने गंभीर आपत्ति जताई थी. उनका तर्क था कि प्रस्तावित बदलावों का राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रभाव पड़ सकता है. बढ़ते विरोध और विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों के बाद सरकार ने विधेयक को आगे बढ़ाने के बजाय फिलहाल रोकने का फैसला किया.
UPSC लेटरल एंट्री भर्ती का विज्ञापन वापस लिया (2024)
अगस्त 2024 में केंद्र सरकार ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से विभिन्न वरिष्ठ पदों पर लेटरल एंट्री के लिए जारी भर्ती विज्ञापन वापस लेने का फैसला लिया था. इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों के अलावा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी सवाल उठाए थे. मुख्य आपत्ति यह थी कि प्रस्तावित भर्ती में आरक्षण से जुड़े प्रावधानों का पालन नहीं किया गया था. राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बढ़ते विरोध के बीच सरकार ने मामले की समीक्षा करते हुए विज्ञापन वापस ले लिया और भर्ती प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया.