Gen-Z Conclave: लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने News24 Bharat Nirman Summit 2026 के तहत Gen-Z कॉन्क्लेव में दिए स्पेशल इंटरव्यू में बेरोजगारी, महंगाई और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछने को लेकर रखी अपनी बात. राजनीतिक झुकाव और एकतरफा आलोचना के आरोपों को खारिज करते हुए कहा- मैं जनता के सरोकार के लिए गाती हूं. लगातार मुकदमों और धमकियों के बावजूद वह लिखना-गाना बंद नहीं करेंगी.
News24 का भारत निर्माण समिट 2026 का मंच सज चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने की दिशा में रोडमैप को लेकर इस कार्यक्रम में राजनीतिक जगत के दिग्गज चर्चा करेंगे. देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और आर्थिक विकास का रोडमैप पेश किया जाएगा. इस कार्यक्रम का मकसद देश के बुनियादी ढांचे, आधुनिक विकास और मजबूत होती अर्थव्यवस्था को नई दिशा देना है. समिट में केंद्रीय मंत्री, नीति-निर्माता, उद्योगपति, अर्थशास्त्री और खेल जगत की नामचीन हस्तियां शिरकत करेंगी.
कौन-कौन से मेहमान होंगे शामिल?
- कपिल कौल, सीईओ एंड डायरेक्टर, सीएपीए इंडिया
- किरन जैन, सीईओ, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया
- प्रो. अश्विनी महाजन, अर्थशास्त्री
- सर्बानंद सोनोवाल, मंत्री, पोर्ट एवं शिपिंग
- साइना नेहवाल, बैडमिंटन प्लेयर
- अवनीश अवस्थी, मुख्य सलाहकार, सीएम (उत्तर प्रदेश)
- बिजली से भारत, ग्रिड से ग्रोथ
- संजय गंजू, डीजी, इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी
- डॉ मो. रिहान, डीजी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी
- डॉ वामसी मिश्रा, कृष्णा, रिन्यूवल एनर्जी, हेड, आईआईटी दिल्ली
- सार्थक गौड़, डायरेक्टर, गौड़ ग्रुप
- आशीष सूद और मंजिंदर सिरसा, मंत्री, दिल्ली सरकार
- अनुराग ठाकुर, सांसद, भाजपा
- सीआर पाटिल, मंत्री, जल शक्ति
- बंदरगाह, बाजार और भारत
- डॉ सोएन रॉय, प्रोफेसर, आईसीआरआईआर
- सुनील जे सिंघी, चेयरमैन, एनटीडब्ल्यूबी
- अभिजीत सिन्हा, नेशनल डायरेक्टर (इंडिया ग्रीस कॉरीडोर प्रोजेक्ट)
- हर्ष मल्होत्रा, राज्य मंत्री – कॉरपोरेट एवं वाणिज्य मंत्रालय और रोड एंड ट्रांसपोर्ट
- जितेंद्र सिंह, मंत्री, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, पीएमओ
- रोहित कपूर, नेशनल हेड, डायरेक्ट सेल, एपीएल अपोलो ट्यूब्स लिमिटेड
- राकेश कुमार सिंह, सीईओ, येडा
- प्रशांत जैन, वाइस प्रेसिडेंट, एनएचएलएम
- सतीश पांडे, वरिष्ठ प्रधान साइंटिस्ट, सीएसआईआर
- गौरभ बल्लभ, सदस्य, पीएस आर्थिक सलाहकार परिषद
- अनुप्रिया पटेल, राज्य मंत्री, स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
- अरविंद वीरमानी, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार, भारत सरकार
- शिशिर प्रियदर्शी, चेयरपर्सन, सीआईआरएफ
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अभिजीत दीपके ने बताया कि जब मैं वापस भारत आया तो एयरपोर्ट पर मेरे साथ एक ऐसी घटना हुई, जिसकी जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है. एयरपोर्ट पर कुछ स्टाफ मेरे पास आए और मुझे अपने साथ चलने को कहा. मैंने पूछा कि आप मुझे कहां ले जा रहे हैं? उन्होंने बताया कि वे एयरलाइंस के स्टाफ हैं, पुलिस वाले नहीं. इसके बाद मुझे थोड़ी राहत मिली. इसके बाद मेरा इमिग्रेशन सिर्फ पांच मिनट में हो गया. मुझे हैरानी हुई, क्योंकि पहले जब भी मैं भारत आता था तो इमिग्रेशन में करीब एक घंटा लग जाता था.
अभिजीत दीपके ने कहा- मैं हॉनेस्ट रीजन दूंगा, पैसा ज़्यादा नहीं मिल रहा था. अभी तक तो चला लिया, अर्ली ट्वेंटीज तक, काम चला लिया, आगे जाके कहीं न कहीं परिवार संभालना है, ज़िम्मेदारी बढ़ेगी और फिर उसके लिए कुछ करना पड़ेगा तो बेस्ट वही है. तो वही लगा कि आम आदमी पार्टी से बाहर चला जाएं. मैं सोचा कि बाहर चला जाऊंगा, डिग्री ले लूंगा, क्योंकि जब मैं आम आदमी पार्टी में था, मेरी जैसे लोगों से मुलाकात हुई, जो बाहर पढ़े-लिखे थे. तो कहीं न कहीं मेरे मन में भी लगता था मुझे कि यार मैं भी बाहर पढ़कर आ जाऊंगा. और शायद मैं बाहर पढ़ने गया तो शायद से मेरा भी क्वालिफिकेशन बढ़ जाएगा, अच्छी जॉब मिल जाएगी, थोड़ा ज़्यादा पैसा कमा लूंगा. तो ये वजह थी जो मुझे आम आदमी पार्टी छोड़नी पड़ी. ऐसा कुछ नहीं था मेरा कि कोई झगड़ा वगैरह, कुछ नहीं था मेरा. वो मेरा पर्सनल रीजन था.
अभिजीत दीपके ने जवाब देते हुए कहा- मुझे लगता है कांग्रेस ने जो नहीं किया है, उसके लिए कॉन्सिक्वेंसेस झेली है 2014 में. तो उनको तो खामियाजा भुगतना पड़ा ना, और इसलिए तो उनको जिताया था. तो आप ये मत बताइए उन्होंने क्या किया. उन्होंने जो किया उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा. आपके पिछले बारह साल में क्या हो रहा है वो बताइए. हमें आगे बढ़ना है या पीछे जाना है.
झारखंड नहीं जाने पर अभिजीत दीपके ने कहा कि झारखंड में क्या जो प्रोटेस्ट चला था, वहां पर देवेंद्र महातो थे, वो मूवमेंट को लीड कर रहे थे. हमारी टीम गई थी, CGP की टीम गई थी. हम नहीं चाहते कि हम हर जगह जाएं और हम हमारा चेहरा चमकाएं, जो हम पहले से कह रहे थे. रातो-रात किसी को भी हीरो मत बनाइए. आशुतोष ने आगे कहा कि और लोगों को आगे आना चाहिए, और जो-जो लोग आगे आएंगे, हम उनको सपोर्ट करेंगे. हम किसी भी आंदोलन को बैकडोर से सपोर्ट करेंगे, जो हमने किया. हमें वही तो करना चाहिए ना. अब आप कहेंगे कि जो छोटी बच्चियां वीडियो बना रही थीं प्रोटेस्ट के लिए, आप वहां क्यों नहीं गए? उनको सपोर्ट करना हमारा काम है. लेकिन दूसरों का आंदोलन हाईजैक करके अपना चेहरा चमकाने जाएं. वो हम नहीं चाहते.
अभिजीत दीपके ने कहा कि महाराष्ट्र मेरा घर है. मैं अपने घर के स्कूल्स को जा रहा हूं. अशतोष का घर राजस्थान में है, वो अपने घरों के स्कूल में जा रहा है. सौरव दिल्ली में रहता है और पॉन्डी, वहां पर भी वही लोग हैं. तो अब हमारी गलती है कि आपने (BJP) इतने सारे स्टेट्स जीत लिए? हम हमारे होम स्टेट से स्टार्ट कर रहे हैं. और रही बात बाकी स्टेट्स में जाने की तो वहां भी जाएंगे.
सीजेपी सदस्य सौरभ ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अगर ऐसा होता तो मैं खुद का घर खरीद लेता. ऐसे दावों को लेकर मैंने कोर्ट में अपील दायर की है. अगर कोर्ट का कोई आदेश आता है तो मैं खुलकर बोलूंगा.
अभिजीत दीपके ने कह कि पुलिस वाले खुद आंदोलन में उनके साथ थे. प्रोटेस्ट के दौरान एक पुलिस वाला मास्क और चश्मा लगाकर उनके पास आया और बोला आप बहुत सही कर रहे हैं. क्योंकि मेरी बेटी भी स्कूल में पढ़ रही है. और उसके भविष्य को लेकर डर लगता है.
सीजेपी चीफ अभिजीत दीपके ने जंतर मंतर पर हुई हिंसा पर कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई सिर्फ अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि पहले से योजनाबद्ध थी. अभिजीत का कहना है कि उनके समर्थकों में से किसी ने पुलिस पर हमला नहीं किया, बल्कि वीडियो में कुछ लोगों को धमकी देते हुए भी देखा गया था. अभिजीत दीपके के मुताबिक, जब उनके सामने किसी व्यक्ति ने हमला किया और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की गई, तो पुलिस ने कहा कि कोर्ट का आदेश आने के बाद ही गिरफ्तारी हो सकती है. वह इस बात पर सवाल उठाते हैं कि अगर पुलिस के सामने कोई व्यक्ति घायल हुआ है तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की जा सकती?
आशुतोष ने आगे कहा कि अगर देश की राजधानी में भी कोई स्कूल भैंसों के तबेले जैसी जगह पर चल रहा है, तो यह पूरे देश के लिए शर्म की बात है. जब आशुतोष से पूछा गया कि अगर मार्च के दौरान पुलिस या प्रदर्शनकारियों की तरफ से हिंसा हो गई और लोग घायल हो गए तो क्या होगा, तो उनका जवाब था कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं. आशुतोष का कहना है कि अगर उन्हें चोट भी लगती है तो वे उसे सहने के लिए तैयार हैं.
सीजेपी सदस्य आशुतोष ने कहा कि राजस्थान की घटना के बाद भी उन्हें डर नहीं है. उनका कहना है कि जयपुर की घटना के बाद भी उन्होंने अपना दौरा जारी रखा और जोधपुर गए. आगे बाड़मेर और बीकानेर जाने का कार्यक्रम भी पहले से तय है. आशुतोष ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक पार्टी के लिए वोट मांगना नहीं है. उनका दावा है कि वे राजस्थान में होने वाले सरपंच चुनाव में किसी पार्टी के उम्मीदवार को वोट देने की अपील नहीं कर रहे, बल्कि स्थानीय समस्याओं को उठा रहे हैं.
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि अगर सरकार की इच्छा हो तो रास्ता निकाला जा सकता है. जब केंद्र सरकार के दो मंत्री उनके साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठकर कुछ वादा कर रहे हैं, तो सरकार ने इस मुद्दे पर सोच-समझकर ही अपना रुख रखा होगा. संविधान के Article 142 का हवाला देते हुए प्रवक्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास न्याय करने के लिए असाधारण शक्तियां हैं. उनके मुताबिक, 18 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से कई बार कहा कि पूरे देश में दर्ज संबंधित FIRs की सूची दी जाए, ताकि कोर्ट उन मामलों को एक साथ मिलाकर विचार कर सके.
नई दिल्ली में आयोजित Gen Z कॉन्क्लेव में पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी के चीफ अभिजीत दीपके ने दावा किया कि सरकार द्वारा मांगें एक महीने बाद भी पूरे नहीं किए गए हैं. इसलिए मजबूरी में मार्च का ऐलान करना पड़ता है.
शिशिर प्रियदर्शी ने आगे कहा कि अब असली चुनौती बिजली के वितरण की है. देश की बिजली वितरण कंपनियां यानी DISCOMs लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रही हैं. उनका घाटा करीब ₹6.5 लाख करोड़ बताया गया है. इसका मतलब है कि बिजली पैदा करने के बाद उसे उपभोक्ताओं तक कुशलता से पहुंचाना और उसका भुगतान सुनिश्चित करना अभी भी बड़ी समस्या है.
शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि भारत में अब बिजली की सबसे बड़ी समस्या बिजली पैदा करने की क्षमता नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में भारत ने बिजली उत्पादन के क्षेत्र में काफी क्षमता विकसित कर ली है. आज आम तौर पर यह शिकायत कम सुनने को मिलती है कि उद्योगों, किसानों या शहरों को बिजली उपलब्ध ही नहीं है.
चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी का कहना है कि कुछ मुश्किल सवालों से बचने से समस्या खत्म नहीं होती. अगर हम किसी समस्या को देखना ही बंद कर दें, तो इसका मतलब यह नहीं कि समस्या मौजूद नहीं है. भारत न पूरी तरह सरकारी नियंत्रण वाली अर्थव्यवस्था है और न पूरी तरह मुक्त बाजार वाली. भारत में सरकार, निजी क्षेत्र और सामाजिक कल्याण, तीनों की भूमिका है. लेकिन उनके मुताबिक मिलिजुली अर्थव्यवस्था कोई अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि लगातार सुधार और संतुलन बनाने की एक यात्रा है.
चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि हम वास्तव में विकसित भारत तब तक नहीं होगा, जब तक देश का हर व्यक्ति खुद को लाभकारी नहीं समझता. फ्रीबीज एक ऐसी चीज है, जिसे देना आसान होता है, लेकिन उसे वापस लेना मुश्किल.
माइक्रो प्लास्टिक समस्या पर राज भूषण चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ गंदे पानी को साफ करना नहीं है, बल्कि पानी को प्रदूषित होने से रोकना भी है. इसमें सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माइक्रोप्लास्टिक है, जो प्लास्टिक कचरे के टूटने से पानी और नदियों में पहुंचता है. इसके लिए सरकार लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने और प्लास्टिक कचरे को नदियों में जाने से रोकने पर काम कर रही है. जो इलाके या व्यवस्थाएं अभी पूरी तरह कवर नहीं हैं, उन्हें भी जल्द व्यवस्थित करने की बात कही जा रही है.
केंद्रीय राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने कहा कि सरकार पानी की समस्या से निपटने के लिए सिर्फ एक उपाय पर निर्भर नहीं है, बल्कि कई स्तरों पर एक साथ काम कर रही है. इसमें पानी के नए स्रोत और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना, रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देना और लोगों में पानी बचाने को लेकर जागरूकता फैलाना शामिल है. उनका कहना है कि इन सभी प्रयासों को मिलाकर आने वाले समय में पानी की समस्या से निपटने की क्षमता बढ़ेगी. पानी की बर्बादी और गलत इस्तेमाल के सवाल पर वक्ता ने कहा कि सरकार का तरीका मल्टी-डायमेंशनल है. सिर्फ नियम-कानून बनाने की बजाय लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है, खासकर किसानों को.
अरविंद वीरमानी ने कार्यक्रम में आगे कहा कि भारत में सिर्फ अर्थव्यवस्था बढ़ना ही काफी नहीं है. यह भी देखना जरूरी है कि उस विकास का फायदा आम लोगों तक कितना पहुंच रहा है. उन्होंने अमेरिका और यूरोप के वेलफेयर/बेनिफिट सिस्टम का उदाहरण दिया और कहा कि भारत का मॉडल थोड़ा अलग है, जहां एम्पॉवरमेंट यानी लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने पर ज्यादा जोर महत्वपूर्ण है.
अरविंद वीरमानी ने कहा कि सबसे पहले यह देखा जाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से बढ़ रही है. भारत की ग्रोथ को सिर्फ अकेले नहीं देखना चाहिए, बल्कि दुनिया की ग्रोथ के मुकाबले देखना चाहिए. 1980 के दशक से लेकर 2000 और उसके बाद तक के आंकड़ों को देखने पर पता चलता है कि भारत की ग्रोथ धीरे-धीरे दुनिया की औसत ग्रोथ से बेहतर होती गई है. यानी लंबे समय में भारत ने बाकी दुनिया के मुकाबले अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है.
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि हमें ह्यूमन कैपिटल तैयार करना है. हेल्थ की दृष्टि से भारत को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं. हमारी फार्मा कंपनियां नए ड्रग की तलाश कर रही है. हम अपने देश में एपीआई बना रहे हैं. हर दृष्टि से भारत सरकार को मजबूत बनाना है. अनुप्रिया पटेल ने एक बार फिर दोहराया कि उत्तर प्रदेश में तीसरी बार एनडीए सरकार.
अनुप्रिया ने आगे कहा कि आयुर्वेद को सरकार ने बढ़ावा दिया है. ये हमारी बहुत पुराना और बहुत मशहूर ट्रेडिशनल इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन सिस्टम है. आयुर्वेद, दुनिया के बहुत सारे देशों के पास नहीं है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा कि जितने भी सिस्टम ऑफ मेडिसिन हमारे पास है, उन्हें मरीजों के लिए वर्ल्ड बेस्ट सिस्टम बनाना चाहिए.
फिजिकल एक्टिविटी कम होने से बढ़ी बीमारियां. स्वस्थ्य जीवनशैली अपनाकर हम अस्पतालों के चक्कर काटने से बच सकते हैं.
प्राइवेट अस्पतालों को लेकर जिले के नोडल अधिकारी मौके पर जाकर मरीजों के इलाज को लेकर निरीक्षण करते हैं.
बहुत बड़ा एक सामाजिक रिवोल्यूसन है, बहुत सारे ऐसे गरीब परिवार हैं. इनके परिवारों में कोई भी व्यक्ति अगर गंभीर बीमारी से परेशान होता था, तो सबसे पहले खर्चे की चिंता होती थी, लेकिन आज वो लोग खर्चे की चिंता नहीं करते. आयुष्मान योजना से अस्पतालों पर भी बोझ कम हुआ है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति बिना खर्चे की चिंता किए प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज करा सकता है.
देश का कोई ऐसा राज्य नहीं जहां आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं, एक राज्य बचा था, बंगाल, वहां भी ये योजना लागू हो चुकी है. अब तक 68 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिल चुका है.
गौरभ बल्लभ ने आगे कहा कि राज्य सरकारों का उद्योगपतियों को निवेश के लिए बुलाना गलत नहीं है, क्योंकि इससे राज्य में उद्योग, रोजगार और विकास आ सकता है. लेकिन सवाल यह है कि अगर निवेश के लिए उद्योगपति जरूरी हैं, तो फिर राजनीतिक मंचों पर उन्हें लगातार निशाना क्यों बनाया जाता है? उन्होंने टाटा समूह का भी उदाहरण दिया और कहा कि टाटा को सिर्फ इसलिए गलत नहीं कहा जा सकता कि उसने एयर इंडिया को खरीद लिया. गौरभ बल्लभ ने कहा कि उन्हें भी कुछ उद्योगपतियों के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया.
पीएम आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य गौरभ बल्लभ ने कहा कि राहुल गांधी से कई बार कहा कि देश में रोजगार और निवेश बढ़ाने वाले उद्योगपतियों यानी वेल्थ क्रिएटर्स को गाली नहीं देनी चाहिए. अगर किसी राज्य को निवेश चाहिए, उद्योग चाहिए और रोजगार पैदा करना है, तो वहां की सरकारों को बड़े उद्योगपतियों को बुलाना ही पड़ेगा. एक तरफ कांग्रेस के नेता अडानी और अंबानी जैसे उद्योगपतियों की आलोचना करते हैं, जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री उन्हीं उद्योगपतियों को निवेश के लिए आमंत्रित करते हैं और उनका स्वागत करते हैं.
येडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने कहा कि एक्सप्रेसवे सिर्फ लोगों के आने-जाने की सुविधा नहीं देता, बल्कि उसके आसपास पूरे इलाके का औद्योगिक और शहरी विकास शुरू हो जाता है. सड़क और बेहतर कनेक्टिविटी आने के बाद उद्योग, रोजगार, शहर और दूसरी सुविधाएं तेजी से विकसित होने लगती हैं.
उन्होंने यमुना एक्सप्रेसवे का उदाहरण दिया. इसके आसपास बड़े स्तर पर शहरी और औद्योगिक विकास की योजनाएं बनाई जा रही हैं. इस क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट, गौतम बुद्ध नगर, अलीगढ़, मथुरा-वृंदावन और राया जैसे इलाके विकास से जुड़ रहे हैं. राया क्षेत्र में करीब 4,000 हेक्टेयर जमीन पर मास्टर प्लान तैयार करने की बात भी कही गई.









