फ्लैश फ्लड से हुए नुकसान का नेपाल ने भारत से मांगा था मुआवजा, अब विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान बेहद कम है, लेकिन इसके बावजूद देश को ग्लोबल वार्मिंग के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं.
Written By: Akarsh Shukla|Updated: Sep 4, 2026 23:27
Edited By : Akarsh Shukla|Updated: Sep 4, 2026 23:27
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रणधीर जायसवाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटना सामूहिक जिम्मेदारी. (Photo: X/@MEAIndia)
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नेपाल में आए फ्लैश फ्लड और जलवायु परिवर्तन से बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को लेकर भारत-अमेरिका और चीन समेत कई देशों से नुकसान की भरपाई मांगने पर अब भारत सरकार ने जवाब दिया है. नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने चीन, अमेरिका और भारत से जलवायु संकट की जिम्मेदारी स्वीकार करने और नेपाल जैसे विकासशील देशों को मुआवजा देने की मांग की थी. अब भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के सामने मौजूद साझा चुनौती है और इससे प्रभावित विकासशील देशों की मदद की जानी चाहिए.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटना सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि विकसित देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जूझ रहे विकासशील देशों की सहायता करनी चाहिए. भारत लंबे समय से जलवायु न्याय और विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त की जरूरत पर जोर देता रहा है.
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दरअसल, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान बेहद कम है, लेकिन इसके बावजूद देश को ग्लोबल वार्मिंग के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं. उन्होंने तेजी से पिघलते हिमालयी ग्लेशियरों और पहाड़ी इलाकों में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र करते हुए कहा कि नेपाल उस वैश्विक संकट की कीमत चुका रहा है, जिसे पैदा करने में उसका योगदान न के बराबर है.
शिशिर खनाल ने कहा कि नेपाल अब जलवायु संबंधी कूटनीति को केवल अंतरराष्ट्रीय मदद हासिल करने तक सीमित नहीं रखना चाहता. उनका कहना था कि देश का रुख अब मदद से आगे बढ़कर न्याय और मुआवजे की मांग पर केंद्रित होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दान का विषय नहीं, बल्कि उनकी नजर में उन देशों की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी का मामला है, जिनका ऐतिहासिक उत्सर्जन अधिक रहा है.