हैदराबाद स्थित देश के प्रमुख कानून संस्थान 'राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान अकादमी' (NALSAR) विश्वविद्यालय के छात्रों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत का विरोध शुरू कर दिया है. 2026 बैच के 450 से अधिक स्नातक छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपकर सीजेआई को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित न करने की मांग की है. छात्रों का विरोध हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई से जुड़ा है. छात्रों के अनुसार, 23 जुलाई की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो साक्ष्य देखने से साफ इनकार कर दिया था.

'हमारे शैक्षणिक महत्व को ठेस पहुंचेगी'

प्रशासन को लिखे पत्र में छात्रों ने स्पष्ट कहा कि मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियां युवाओं और छात्रों के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाती हैं. छात्रों ने लिखा, "युवाओं के प्रति ऐसी असंवेदनशील टिप्पणी करने वाले मुख्य न्यायाधीश से डिग्रियां प्राप्त करना हमें स्वीकार्य नहीं है. हमारे लिए इस डिग्री का शैक्षणिक और भावनात्मक महत्व बहुत अधिक है."

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छात्रों ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि उनकी आपत्ति मुख्य न्यायाधीश के पद या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि हाल ही में सामने आए उनके उस रुख को लेकर है जो विश्वविद्यालय के मूल्यों से मेल नहीं खाता. छात्रों का कहना है कि NALSAR हमेशा से संवैधानिक अधिकारों, न्याय तक सभी की पहुंच और तर्कसंगत समाधान के सिद्धांतों के लिए जाना जाता है. ऐसे में हालिया मामलों में पुलिस कार्रवाई और नागरिकों के अधिकारों की उपेक्षा जैसे आरोपों के बीच CJI से डिग्री प्राप्त करना उनके द्वारा पढ़े गए मूल्यों के विपरीत होगा.

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प्रशासन से पुनर्विचार की मांग

छात्रों का तर्क है कि मौजूदा परिस्थितियों में मुख्य न्यायाधीश को आमंत्रित करना संवैधानिक जवाबदेही और शैक्षणिक स्वतंत्रता के खिलाफ जाएगा. उन्होंने मांग की है कि औपचारिक निमंत्रण भेजने से पहले प्रशासन को स्नातक होने वाले छात्रों से सलाह-मशविरा करना चाहिए. छात्रों ने पत्र के अंत में लिखा कि प्रशासन इसे केवल एक बैच की नहीं, बल्कि सभी छात्रों की साझा चिंता के रूप में देखे. दीक्षांत समारोह की तारीख और मुख्य अतिथि का नाम अभी आधिकारिक रूप से तय नहीं हुआ है, लेकिन छात्रों ने फैसला होने से पहले ही अपनी आपत्ति दर्ज करा दी है.
हस्ताक्षर करने वाले छात्रों ने सोमवार तक विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा है और बातचीत की इच्छा जताई है. फिलहाल, NALSAR विश्वविद्यालय की ओर से छात्रों की इस आपत्ति पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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टाटा इंस्टीट्यूट ने कैंसल किया था दीक्षांत समारोह

इससे पहले टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने 2 अगस्त को होने वाले अपने 86वें दीक्षांत समारोह को अचानक टाल दिया था. छात्रों को भेजे गए एक आधिकारिक संदेश में TISS प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर इस फैसले को मुख्य न्यायाधीश की यात्रा या किसी विरोध प्रदर्शन से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा था. वहीं, मामले से जुड़े अधिकारियों और छात्रों के अनुसार, आशंका थी कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन से जुड़े संभावित विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में बाधा डाल सकते हैं. दरअसल, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की उम्मीद थी, जिसको लेकर विरोध की सुगबुगाहट थी.

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