बड़ा फैसला: आंदोलनकारी छात्रों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी झारखंड सरकार, निजी अस्पतालों को भी दिए सख्त निर्देश

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार आपकी मांगों को नजरअंदाज नहीं कर रही है. आपकी मांगें गंभीरता से विचाराधीन हैं और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू जी भी इस विषय को गंभीरता से देख रहे हैं.

Student Movement

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने आंदोलनरत छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य को लेकर बड़ा मानवीय फैसला लिया है. स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि आंदोलन के दौरान यदि कोई छात्र-छात्रा बीमार पड़ता है या अस्पताल में भर्ती होता है, तो उसका समुचित एवं बेहतर से बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाए. आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं से इलाज के नाम पर एक भी पैसा नहीं लिया जाएगा. उनके इलाज से संबंधित आवश्यक खर्च राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा वहन किया जाएगा.

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संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन


जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य मंत्री ने व्यक्तिगत स्तर पर भी हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है. स्वास्थ्य मंत्री ने सभी अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं को किसी भी परिस्थिति में इलाज से वंचित न किया जाए और उनकी स्थिति को देखते हुए तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए.

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‘बच्चों की जान की कीमत सबसे ज्यादा’


डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि हमारे युवा दिन-रात अपने अधिकारों और मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. उनकी भावनाओं और उनकी पीड़ा को सरकार गंभीरता से समझ रही है. आंदोलन स्थल पर किसी भी तरह की मेडिकल इमरजेंसी न हो, इसके लिए मेडिकल टीम को लगातार तैनात रखा गया है और स्वास्थ्य विभाग उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.

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स्वास्थ्य मंत्री ने की भावुक अपील


उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा, ‘मेरे आंदोलनकारी युवा मेरे बच्चे हैं. आपकी पीड़ा मेरी पीड़ा है. मैं नहीं चाहता कि अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ते-लड़ते मेरे किसी बच्चे की जान खतरे में पड़े.’ उन्होंने कहा, ‘जान है तो जहान है. शरीर हमें एक बार मिला है और जिंदगी भी एक बार मिली है. कृपया अपनी जिंदगी के साथ मत खेलिए. आप अपनी मांगों को लेकर धरना दीजिए, अपनी आवाज उठाइए, लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कीजिए, लेकिन मैं आपसे हाथ जोड़कर गुजारिश करता हूं कि अनशन और भूख हड़ताल से बचें.’

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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार आपकी मांगों को नजरअंदाज नहीं कर रही है. आपकी मांगें गंभीरता से विचाराधीन हैं और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू जी भी इस विषय को गंभीरता से देख रहे हैं. सरकार की पूरी कोशिश है कि बातचीत और संवेदनशीलता के साथ इस मुद्दे का सकारात्मक समाधान निकाला जाए.

उन्होंने आंदोलनकारी युवाओं से कहा, ‘सरकार आपने बनाई है, इसलिए सरकार पर विश्वास रखिए. आपकी सरकार आपके साथ है. स्वास्थ्य मंत्री आपके साथ खड़ा है. आपकी लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन आपकी जिंदगी उससे भी ज्यादा कीमती है. मैं अपने बच्चों से सिर्फ इतना कहना चाहता हूं, अपनी मांगों के लिए लड़िए, लेकिन अपनी जान को दांव पर मत लगाइए. आपकी जिंदगी सुरक्षित रहे, यही मेरी सबसे बड़ी चिंता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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