जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दिया, राष्ट्रपति मुर्मू को भेजा रिजाइन, कैश कांड में आया था नाम

Justice Yashwant Verma: देश के बहुचर्चित कैश कांड के आरोपी यशवंत वर्मा ने जस्टिस का पद छोड़ दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति मुर्मू को भेज दिया है। यशवंत वर्मा के खिलाफ कैश कांड केस की जांच जारी है और मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

Justice Yashwant Verma

यशवंत वर्मा आजकल न्यायिक कामकाज से दूर थे।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा है। जस्टिस वर्मा कैश कांड में नाम आने के बाद सुर्खियों में आए थे। उनके दिल्ली वाले घर में आग लग गई थी और जांच के दौरान 500-500 के जले हुए नोटों के बंडल बरामद हुए थे। घटनाक्रम के बाद विवाद खड़ा होने से उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। लेकिन यहां उन्हें न्यायपालिका के कामकाज करने की इजाजत नहीं थी।

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यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव आया था

बता दें कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कैश कांड के कारण लोकसभा सदन में महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे उन्होंने चुनौती दी थी और दलील दी कि राज्यसभा ने प्रस्ताव का मंजूरी नहीं दी थी तो लोकसभा की जांच समिति निरर्थक और गलत है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी 2026 को जांच समिति के गठन में कमियां बताते हुए सवाल उठाए। साथ ही जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने यशवंत के खिलाफ सुनाया फैसला था

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने जस्टिस यशवंत वर्मा को पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने जवाब दाखिल करने के लिए समय देने से इनकार कर दिया। वहीं महाभियोग के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत लोकसभा स्पीकर को अधिकार मिला हुआ है, जिसका इस्तेमाल करते हुए ही स्पीकर ने यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित की है। राज्यसभा से प्रस्ताव मंजूर न होने की स्थिति में भी लोकसभा स्पीकर ऐसा कर सकते हैं।

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यशवंत के सरकारी आवास में 15 करोड़ कैश मिला था

बता दें कि 14 मार्च 2025 को दिल्ली में यशवंत वर्मा के सरकारी आवास 30 तुगलक क्रिसेंट में स्टोर रूम में आग लग गई थी, जिसे बुझाते समय फायर ब्रिगेड और पुलिस को अधजले नोटों की गड्डियां मिली थी। काउंट करने पर करीब 15 करोड़ रुपये का कैश था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और उस समय के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय इंटरनल कमेटी बनाई थी। साथ ही यशवंत वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट शिफ्ट किया था।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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