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‘आंखें बांधकर ले गए थे मसूरी…’, जुनैद ने बताया कैसे उन्हें उठा ले गई थी पुलिस; रातभर क्या पूछती रही

जंतर-मंतर पर सीजेपी आंदोलन के दौरान खाना बांटने वाले वालंटियर मोहम्मद जुनैद ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. जुनैद का दावा है कि उन्हें 24 जुलाई की रात दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर उत्तराखंड ले जाकर हिरासत में ले लिया. जुनैद ने परिवार पर पड़े छापे और आंदोलन की फंडिंग के आरोपों पर पूरी सच्चाई बयां की है.

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जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक चले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन में प्रदर्शनकारियों को मुफ्त खाना और पानी बांटकर सुर्खियों में आए जुनैद ने अपनी गुमशुदगी और फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर बड़ा खुलासा किया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मनाए गए जीत के जश्न से जुनैद के अचानक गायब होने पर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं. अब जुनैद ने सामने आकर पूरी घटना की सच्चाई बयान की है.

रास्ते से उठाने और मसूरी ले जाने का दावा

एक मीडिया इंटरव्यू में जुनैद ने दावा किया कि 24 जुलाई की रात उन्हें कुत्ते ने काट लिया था, जिसके बाद वह रेबीज का टीका लगवाने राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल गए थे. जुनैद का कहना है कि जब वे अस्पताल से बाहर निकलकर ऑटो से लौट रहे थे, तब एक गाड़ी में आए कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया. उन्होंने खुद को दिल्ली पुलिस का कर्मचारी बताया और चेहरे ढककर जुनैद तथा उनके साथी की आंखों पर पट्टी बांध दी. जुनैद के मुताबिक, उन्हें रातभर एक अज्ञात इमारत में रखा गया और बाद में गाड़ी में बैठाकर उत्तराखंड के मसूरी ले जाकर छोड़ दिया गया. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस दौरान उनके साथ कोई मारपीट नहीं की गई.

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परिवार पर रेड का आरोप, पुलिस की सफाई

जुनैद ने यह भी आरोप लगाया कि उनके गाजियाबाद स्थित घर पर भी पुलिस ने दबिश दी और उनके पिता तथा अन्य रिश्तेदारों को उठाकर ले गई, जहां उनसे घंटों पूछताछ की गई. हालांकि, पुलिस प्रशासन ने जुनैद को अनधिकृत रूप से हिरासत में लेने या उनके परिवार का उत्पीड़न करने के दावों को खारिज किया है. पुलिस का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया गया था. जांच के सिलसिले में केवल उनके पिता से सामान्य पूछताछ की गई थी और प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें जाने दिया.

फंडिंग के आरोपों को नकारा

जुनैद का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई आंदोलन में उनके द्वारा हजारों लोगों के खाने-पीने के इंतजाम को लेकर उनसे सवाल-जवाब करने के उद्देश्य से की गई थी. जुनैद ने साफ किया कि उन्हें इसके लिए कोई संस्थागत या बाहरी फंडिंग नहीं मिली थी. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर आने वाले आम लोग और छात्र खुद अपनी तरफ से पानी, बिस्किट और बना हुआ खाना लाते थे. यह पूरी व्यवस्था विशुद्ध रूप से जनसहयोग से चल रही थी और इसमें किसी भी तरह के नकद या ऑनलाइन पैसों का लेन-देन शामिल नहीं था.

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First published on: Jul 27, 2026 06:53 PM

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Vijay Jain

विजय जैन भारतीय मीडिया जगत का एक विश्वसनीय और प्रतिष्ठित नाम हैं. वर्तमान में न्यूज 24 में सीनियर न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत विजय को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 23 से अधिक वर्षों का लंबा और समृद्ध अनुभव है. राजनीति, चुनाव, बिजनेस, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसी हर प्रमुख बीट पर मजबूत पकड़ रखने वाले विजय अपनी निष्पक्ष और सटीक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. पत्रकारिता में उनके अद्वितीय योगदान और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए उन्हें साल 2018 में प्रतिष्ठित 'नेशनल श्रीफल अवार्ड' से सम्मानित किया गया था. डिजिटल दौर में वे ट्रेडिशनल जर्नलिज्म के अनुभवों को न्यू-एज मीडिया और SEO स्ट्रेटेजी के साथ जोड़कर खबरों को नया आयाम दे रहे हैं.

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