PoK में नागरिकों पर जुल्म के खिलाफ भारत ने उठाई आवाज, पाकिस्तान को किया बेनकाब

MEA on PoK Protest: पाकिस्तान के सरकार पीओके के नागरिकों पर हद से ज्यादा जुल्म कर रही है, जिसको लेकर भारत भी चिंतित है. विदेश मंत्रालय ने इंटरनेशनल कम्यूनिटी से अपील की है कि पाकिस्तान को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाए.

Randhir Jaiswal

(Randhir Jaiswal-X/@MEAIndia)

विज्ञापन

MEA Spokesperson Randhir Jaiswal: भारत ने शुक्रवार को इंटरनेशनल कम्यूनिटी से अपील की कि वो पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान की एक्टिविटीज पर बारीकी से नजर रखें और इस इलाके में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों के लिए इस्लामाबाद को जवाबदेह ठहराएं.

PoK के लोगों के खिलाफ बर्बरता

एक मीडिया ब्रीफिंग में बोलते हुए, विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के प्रशासन पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई में 40 से ज्यादा आम नागरिकों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं. जायसवाल ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की टिप्पणियों की भी आलोचना की, जिन्होंने कथित तौर पर विरोध कर रहे नागरिकों को दुश्मन बताया था; उन्होंने इसे PoK के लोगों के प्रति सरकार की बेरुखी का सबूत बताया.

विज्ञापन

पाकिस्तान हुआ बेनकाब

MEA प्रवक्ता ने पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयानों का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने माना कि पाकिस्तानी प्रशासन की तरफ से कभी प्रशिक्षित और समर्थित उग्रवादी अब उसी प्रशासन के खिलाफ हो गए हैं. भारत के अनुसार, PoK में हाल ही में हुए विधायी चुनावों में जनता की बढ़ती नाराजगी दिखी है और स्थानीय निवासियों ने इन हत्याओं की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है.

कैसे शुरू हुआ मामला?

ये अशांति तब शुरू हुई जब जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की मांग करते हुए 9 जून को विरोध-प्रदर्शन और एक ‘लॉन्ग मार्च’ शुरू किया. प्रदर्शन धीरे-धीरे पूरे इलाके में फैल गए, जबकि JAAC और अधिकारियों के बीच बातचीत से विवाद का समाधान नहीं निकल सका. बातचीत विफल होने के बाद, प्रशासन ने कथित तौर पर कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और मीडिया कवरेज पर पाबंदियां लगा दीं.

कितनी मौतें हुईं?

राइट्स ग्रुप्स की रिपोर्टों के मुताबिक, तनाव बढ़ने से पहले ही कम से कम 44 लोग मारे जा चुके थे, जिनमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी शामिल थे. हालांकि जम्मू-कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी (JKHRO) ने दावा किया है कि नागरिकों की मौत का आंकड़ा अब बढ़कर 75 हो गया है.

विज्ञापन

पाकिस्तान पर बड़ा आरोप

28 जुलाई को जारी एक रिपोर्ट में, संगठन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 27 और 28 जुलाई को रावलकोट लॉन्ग मार्च के दौरान लाइव एम्युनिशन का इस्तेमाल किया, जिससे 31 नागरिकों की मौत हो गई. राइट्स ग्रुप्स ने कहा कि यह हिंसा हफ्तों तक चले शांतिपूर्ण प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच असफल बातचीत के बाद तनाव में एक बड़ा इजाफा था.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ