Balraj Singh
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फीचर डेस्क: कभी सोने की चिड़िया कहलाने वाली हमारी भारत भूमि पर जुल्म करने में विदेशी आक्रांताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी। हमारे अनेक वीरों ने अपने-अपने अंदाज में इस जबर-जुल्म को टक्कर दी। नतीजतन 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजी हुकूमत को हमारी यह धररा छोड़कर जाना पड़ा और आज हम आजाद आब-ओ-हवा में सांस ले रहे हैं। इसी कुर्बानी, खुशहाली और शांति का प्रतीक है हमारा राष्ट्र ध्वज, जिसे हम शान से विजयी विश्व तिरंगा कहते हैं। अब आजादी के 76 वर्ष पूरे हो चले हैं और इस विशेष अवसर को समस्त भारतवर्ष में ‘राष्ट्र पहले, हमेशा पहले’ (Nation First, Always First) थीम के तहत मनाया जाना है। इस शुभावसर पर News 24 हिंदी राष्ट्र ध्वज के उन्नति पथ में आए अहम पड़ावों का स्मरण करा रहा है। जानें, कैसा रहा आजादी के उत्सव के साक्षी हमारे राष्ट्र ध्वज का रंगों का सफर…
यह बात हर कोई जानता और मानता है कि किसी भी विशेष अभियान को एक अंजाम तक पहुंचाने के लिए उससे जुड़े जनसमूह को भावनात्मक रूप से बांधे रखना बेहद जरूरी होता है। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के लिए ध्वज के रूप में एक विशेष चिह्न का निर्धारण करना भी इसी प्रक्रिया का है।

ऐसा था निर्वासित क्रांतिकारियों द्वारा पेरिस में फहराए गए झंडे का रूप

1917 में एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने फहराया था यूनियन जैक वाला झंडा

1921 में महात्मा गांधी ने दिया नया राष्ट्र ध्वज
साल 1921 में एक बार फिर भारत के राष्ट्रीय ध्वज में बदलाव किए गए। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र के दौरान बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में आंध्र प्रदेश के एक व्यक्ति ने महात्मा गांधी को एक झंडा दिया, जो हरे और लाल रंग का था। गांधीजी को यह झंडा पसंद आया, लेकिन उन्होंने इसमें थोड़ा बदलाव करते हुए सबसे ऊपर सफेद रंग की एक पट्टी और जुड़वा दी। साथ ही देश के विकास को दर्शाने के लिए बीच में चलता हुआ चरखा भी दर्शाया गया।
1931 में फिर चौथी बार बदला राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप
1931 में प्रस्तावित स्वाधीनता संग्राम के प्रतीक ध्वज का पांचवां स्वरूप कुछ अलग ही था। इसमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरे रंग की पट्टी थी तो बीच की सफेद पट्टी में राष्ट्र की प्रगति का प्रतीक चरखे का पूरा चित्र छोटे आकार में चरखा दर्शाया गया। इंडियन नेशनल कांग्रेस ने झंडे के इस नए रूप को आधिकारिक तौर पर अपनाया था।
ये है 22 जुलाई 1947 में संविधान सभा की बैठक में स्वीकार्य आजाद भारत का राष्ट्र ध्वज
फिर जब 15 अगस्त 1947 को स्वाधीनता संग्राम का परिणाम निकला तो उस वक्त आजाद भारत के राष्ट्र ध्वज के रूप में जो चिह्न प्राप्त हुआ, यही वो विजयी विश्व तिरंगा है। जहां तक बदलाव की बात है, इसमें चरखे की जगह नीले रंग में मौर्य सम्राट अशोक के धर्म चक्र को मिली। 22 जुलाई 1947 में संविधान सभा की बैठक में आजाद भारत के नए राष्ट्रीय ध्वज स्वीकार किए गए पिंगली वैंकेया द्वारा तैयार हमारे झंडे के इस प्रारूप में केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरे रंग की पट्टियां समानुपात में हैं। मानक स्वरूप का आकार 3*2 (लंबाई-चौड़ाई) का है।न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।