नीट पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का लंबे समय से चल रहा विरोध प्रदर्शन आज खत्म हुआ. उनकी मांग के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. जिसके बाद से देश की हर पीढ़ी के लोगों में खुशी की लहर है. सभी एक साथ मिलकर जश्न मना रहे हैं, भारत माता के जयकारे गूंज रहे हैं. विपक्षी दल भी बेहद खुश हैं, उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत और सरकार की हार बताया है.
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मोदी सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. लेकिन राजनीति में दूर की सोचना ज़रूरी होता है. अगर मोदी सरकार ये फैसला नहीं लेती तो उन्हें देश के युवाओं की नाराज़गी महंगी पड़ सकती थी. साल 2027 में उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में किसी भी तरह का रिस्क लेना केंद्र के लिए सही नहीं माना जा रहा. सूत्रों के मुताबिक, यही सब सोचकर मोदी कैबिनेट ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना ही ठीक समझा. सरकार ने देश के युवाओं तक ये मैसेज पहुंचाने की कोशिश की है और उनकी आवाज को कभी भी अनसुना नहीं किया जाएगा. इसलिए सरकार किसी भी ठोस कदम को उठाने में संकोच नहीं करेगी.
एक तीर से दो निशाने
कहा जा रहा है मोदी सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं. एक तरफ युवा वर्ग खुश है, दूसरी तरफ संसद का मानसून सत्र भी आराम से चल सकेगा. कांग्रेस लगातार इस्तीफे की मांग को लेकर हल्ला कर रही थी. अब वो इस मुद्दे पर हंगामा नहीं कर पाएगी. वहीं, केंद्र सरकार इसी सत्र में पेपर लीक के खिलाफ कानून में सख्त प्रावधान पेश करने वाली है. पीएम मोदी पहले ही पेपर लीक से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान कर चुके हैं. वहीं, शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में एक बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी मिली है, जिसके तहत पेपर लीक के लिए 10 साल जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना देना होगा. मोदी सरकार अपने इन फैसलों से एक बार फिर युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुटी है.
धर्मेंद्र प्रधान ने बताई वजह
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि पिछले 4 दशक से वो टीचर, स्टूडेंट और एजुकेशन सिस्टम को बेहतर करने के लिए काम कर रहे थे. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मजबूत एजुकेशन सिस्टम ही देश के विकास की असली नींव है. उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों में जो भी हुआ, उनसे उन्हें बहुत ठेंस पहुंची है. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ये किसी एक व्यक्ति की इज्जत का सवाल नहीं है, बल्कि इस पर देश के युवाओं का भविष्य टिका हुआ है. उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहते कि छात्रों की शिक्षा से कोई खिलवाड़ हो या फिर वो किसी कानूनी और राजनीतिक मामलों में उलझ कर रह जाएं, इसीलिए उन्होंने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना ही सही समझा.
ये भी पढ़ें: ‘अपने घर वापस जाएं सभी…’, कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना विरोध प्रदर्शन खत्म करने का किया ऐलान
नीट पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का लंबे समय से चल रहा विरोध प्रदर्शन आज खत्म हुआ. उनकी मांग के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. जिसके बाद से देश की हर पीढ़ी के लोगों में खुशी की लहर है. सभी एक साथ मिलकर जश्न मना रहे हैं, भारत माता के जयकारे गूंज रहे हैं. विपक्षी दल भी बेहद खुश हैं, उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत और सरकार की हार बताया है.
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मोदी सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. लेकिन राजनीति में दूर की सोचना ज़रूरी होता है. अगर मोदी सरकार ये फैसला नहीं लेती तो उन्हें देश के युवाओं की नाराज़गी महंगी पड़ सकती थी. साल 2027 में उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में किसी भी तरह का रिस्क लेना केंद्र के लिए सही नहीं माना जा रहा. सूत्रों के मुताबिक, यही सब सोचकर मोदी कैबिनेट ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना ही ठीक समझा. सरकार ने देश के युवाओं तक ये मैसेज पहुंचाने की कोशिश की है और उनकी आवाज को कभी भी अनसुना नहीं किया जाएगा. इसलिए सरकार किसी भी ठोस कदम को उठाने में संकोच नहीं करेगी.
एक तीर से दो निशाने
कहा जा रहा है मोदी सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं. एक तरफ युवा वर्ग खुश है, दूसरी तरफ संसद का मानसून सत्र भी आराम से चल सकेगा. कांग्रेस लगातार इस्तीफे की मांग को लेकर हल्ला कर रही थी. अब वो इस मुद्दे पर हंगामा नहीं कर पाएगी. वहीं, केंद्र सरकार इसी सत्र में पेपर लीक के खिलाफ कानून में सख्त प्रावधान पेश करने वाली है. पीएम मोदी पहले ही पेपर लीक से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान कर चुके हैं. वहीं, शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में एक बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी मिली है, जिसके तहत पेपर लीक के लिए 10 साल जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना देना होगा. मोदी सरकार अपने इन फैसलों से एक बार फिर युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुटी है.
धर्मेंद्र प्रधान ने बताई वजह
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि पिछले 4 दशक से वो टीचर, स्टूडेंट और एजुकेशन सिस्टम को बेहतर करने के लिए काम कर रहे थे. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मजबूत एजुकेशन सिस्टम ही देश के विकास की असली नींव है. उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों में जो भी हुआ, उनसे उन्हें बहुत ठेंस पहुंची है. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ये किसी एक व्यक्ति की इज्जत का सवाल नहीं है, बल्कि इस पर देश के युवाओं का भविष्य टिका हुआ है. उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहते कि छात्रों की शिक्षा से कोई खिलवाड़ हो या फिर वो किसी कानूनी और राजनीतिक मामलों में उलझ कर रह जाएं, इसीलिए उन्होंने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना ही सही समझा.
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