टॉयलेट जाने पर बिजली के झटके, पूरे दिन में रोटी के 3 टुकड़े… रूसी जेल से लौटे भारतीय की रोंगटे खड़े करने वाली दास्तां

दीपक ने मॉस्को पुलिस और जेल प्रशासन की क्रूरता का खुलासा करते हुए बताया, ‘पुलिस स्टेशन में मुझे तीन दिन तक सिर्फ पानी पर रखा गया, खाने को कुछ नहीं दिया गया.’

Deepak

दीपक ने अपनी वापसी के लिए राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल को श्रेय दिया और धन्यवाद देने के लिए सोमवार को उनसे मिलने पहुंचा.

हरियाणा के एक 25 साल के दीपक के लिए रूस जाना उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुई. तीन महीने से ज्यादा समय तक वहां इमिग्रेशन जेल में ‘नर्क’ जैसी यातनाएं झेलने के बाद, दीपक सुरक्षित भारत लौट आया है. उसने अपनी वापसी के लिए राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल को श्रेय दिया और धन्यवाद देने के लिए सोमवार को उनसे मिलने पहुंचा.

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धोखे से पहुंचा रूस

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दीपक के हवाले से लिखा है कि अप्रैल 2025 में उसने एक ट्रैवल एजेंट को 4 लाख रुपये दिए थे. उस एजेंट ने उसे रूस में 90,000 रुपये हर महीने की सैलरी की नौकरी का झांसा दिया था. लेकिन वहां पहुंचते ही हकीकत कुछ और निकली. एक महीने काम करने के बाद जब उसने सैलरी मांगी, तो उसे नौकरी से निकाल दिया गया.

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ऐसे पहुंचा जेल

इसके बाद एजेंट ने उसे 500 किलोमीटर दूसरी नौकरी दिलवाई. दूसरी जगह काम करने पर भी उसे वादे के मुताबिक पैसे नहीं मिले. एक महीने बाद उसे 90 हजार रुपये की जगह पांच हजार रुपये मिले. आर्थिक तंगी की वजह से जब वह कमरा किराया नहीं दे पाया, तो मकान मालिक ने उसका पासपोर्ट जब्त कर उसे पुलिस के हवाले कर दिया.

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दिए जाते थे बिजली के झटके

दीपक ने मॉस्को पुलिस और जेल प्रशासन की क्रूरता का खुलासा करते हुए बताया, ‘पुलिस स्टेशन में मुझे तीन दिन तक सिर्फ पानी पर रखा गया, खाने को कुछ नहीं दिया गया. जब भी मैं टॉयलेट जाने की इजाजत मांगता, तो मुझे बिजली के झटके दिए जाते थे. हफ्ते में दो बार ऐसा टॉर्चर किया जाता था.’

पुलिस स्टेशन में तीन दिन रखने के बाद दीपक को इमिग्रेशन डिटेंशन जेल में डाल दिया गया. इमिग्रेशन जेल की स्थिति और भी बदतर थी. दीपक के मुताबिक, वहां करीब 150 भारतीय कैद थे, जिनमें से ज्यादातर पंजाब और हरियाणा के थे.

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पूरे दिन में रोटी के तीन टुकड़े

जेल में खाने में केवल उबला हुआ बीफ दिया जाता था. धार्मिक कारणों से जब भारतीय युवक उसे खाने से मना कर देते, तो उन्हें पूरे दिन में केवल तीन रोटी के टुकड़ों पर गुजारा करना पड़ता था. दीपक ने बताया कि मुझे लगने लगा था कि अगर मैं एक महीना और वहां रहता, तो शायद जिंदा नहीं बचता.

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ऐसे हुई वापसी

दीपक की रिहाई में सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने अहम भूमिका निभाई. परिवार की गुहार पर उन्होंने विदेश मंत्रालय के जरिए लगातार कोशिश की. इसके बाद 17 फरवरी को दीपक की वतन वापसी हुई. लौटने के बाद भी दीपक की हालत इतनी खराब थी कि उसे दो हफ्ते अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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