सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज हुई FIR को रद्द करने का आदेश दिया है. उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया है कि आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा दिया जाए. नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन के मामले में अदालत ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को गंभीर आपराधिक बैकग्राउंड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ नए सिरे से FIR दर्ज करने की अनुमति दी. नीट प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्रों के खिलाफ देशभर में दर्ज सभी FIR को उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत रद्द किया.
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CJI ने क्या कहा?
CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर किसी भी राज्यों में इन्हीं मामलों को लेकर और भी FIR दर्ज हैं, तो उनपर आगे की जांच ना की जाए. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दिल्ली, महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल के आवेदनों में FIR की डिटेल्स हैं. 20 से 25 जुलाई के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में हजारों छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. दिल्ली पुलिस ने कुल 13 FIR दर्ज की थीं. सरकार चाहती है कि छात्रों को इन सबमें किसी तरह की हानि ना हो और किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होना क्राइम ना माना जाए. केंद्र का कहना है कि FIR पर किसी तरह का कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा.
CJP ने मार्च ना करने का किया ऐलान
कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को होने वाले अपने दिल्ली मार्च को वापस लेने का फैसला किया है. संगठन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी गई. सीजेपी के प्रवक्ता और को-कंवीनर सौरव दास ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन और अदालत के मंगलवार को पारित आदेश को देखते हुए ये फैसला लिया गया है. सुनवाई के दौरान सौरव दास ने अदालत में कहा कि केंद्र से मिले भरोसे, न्यायपालिका की गरिमा और सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश को ध्यान में रखते हुए मार्च का ऐलान वापस लेना सही समझा गया. संगठन ने संकेत दिया कि सरकार के आश्वासन के बाद फिलहाल विरोध प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है.
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