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Article 142: छात्रों पर दर्ज FIR रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने किस शक्ति का किया उपयोग, क्या है आर्टिकल 142?

CJP Protest: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को 'पूर्ण न्याय' करने के लिए स्पेशल पावर देता है. इसके तहत अदालत किसी लंबित मामले में ऐसा आदेश या निर्देश जारी कर सकती है, जो उसे न्याय पूरी तरह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी लगता है.

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पेपर लीक के खिलाफ हुए देशव्यापी प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में मंगलवार सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. उच्चतम न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली स्पेशल शक्ति का इस्तेमाल करते हुए 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों को लेकर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा के पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ी शिकायतों को किसी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, साथ ही उन्हें हर तरह से बंद माना जाएगा. आपको बता दें कि पांच राज्यों की ओर से FIR रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल अर्जियों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया.

क्या है संविधान का Article 142?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को ‘पूर्ण न्याय’ करने के लिए स्पेशल पावर देता है. इसके तहत अदालत किसी लंबित मामले में ऐसा आदेश या निर्देश जारी कर सकती है, जो उसे न्याय पूरी तरह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी लगता है. इस शक्ति का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब सामान्य कानूनी प्रक्रिया के जरिए किसी मामले में पूर्ण न्याय करना संभव न हो. सुप्रीम कोर्ट द्वारा आर्टिकल 142 के तहत जारी आदेश पूरे भारत में लागू होते हैं.

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यह भी पढ़ें: छात्रों पर दर्ज सभी FIR रद्द, 2873 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ SC ने दिया ताजा केस दर्ज करने का आदेश

2873 लोगों के खिलाफ फ्रेश एफआईआर

आर्टिकल 142 के इस्तेमाल से सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने का फैसला किया. साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 20 से 26 जुलाई के बीच हुई घटनाओं को लेकर किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति दी है. ये वे लोग हैं, जिनके बारे में सरकार ने गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड होने का दावा किया है. हालांकि, इन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई तभी आगे बढ़ सकेगी, जब जांच में यह सामने आए कि वे प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति को शारीरिक नुकसान पहुंचाने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर अपराधों में शामिल थे.

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First published on: Sep 01, 2026 04:48 PM

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