Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की ओर से केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोपों को लेकर उन पर तीखा हमला बोला है. वित्त मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री स्टालिन और उनकी पार्टी DMK का काम केवल केंद्र और राज्यों के बीच दरार पैदा करना और झूठा नैरेटिव बनाना रह गया है. साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र विरोधी बयानबाजी में समय बर्बाद करने के बजाय, CM स्टालिन को तमिलनाडु के लोगों को यह समझाना चाहिए कि वह हमें दालों और तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने के बजाय असल में विदेशी हितों को मौके क्यों दे रहे हैं.
निर्मला सीतारमण ने स्टालिन के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जब जरूरी खाने की चीजें इंपोर्ट पर निर्भर करती हैं, तो घरेलू फूड सिक्योरिटी बाहरी झटकों और कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति कमजोर हो जाती है. यह भारत जैसे बड़े देश के लिए सस्टेनेबल नहीं है. दालों और तिलहनों का घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाना न सिर्फ एक आर्थिक जरूरत है, बल्कि एक स्ट्रेटेजिक जरूरत भी है.’
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साथ ही उन्होंने कहा कि क्या उन्हें नहीं पता कि पाम ऑयल का भारी इंपोर्ट इसलिए होता है क्योंकि खाने के तेल की हमारी डिमांड तिलहनों की सप्लाई से ठीक से पूरी नहीं हो पाती है. दालों के साथ भी यही दिक्कत है. किसानों को उन फसलों के लिए बेहतर दाम मिल सकते हैं जिनमें सप्लाई-डिमांड का अंतर होता है. इससे साफ होता है कि CM स्टालिन के मन में किसानों का हित नहीं है.
Building food security requires a constructive, continuous and positive engagement on agriculture with all stakeholders.
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) April 13, 2026
However, CM Thiru @mkstalin appears to continue with what he and his party are good at— draw a wedge between centre and states, create false narratives… pic.twitter.com/SP7Ukqi0Si
उन्होंने कहा कि राज्यों को लिखा गया यह पत्र नेशनल फूड सिक्योरिटी की जिम्मेदारी शेयर करने का न्योता है. ज्यादातर राज्यों सरकारों ने पार्टी लाइन से हटकर इस बात को समझा और सहकारी संघवाद की भावना से जवाब दिया. लेकिन सिर्फ सीएम स्टालिन ने इस मामले को सनसनीखेज बनाने का फैसला किया.
मुख्यमंत्री स्टालिन द्वारा सचिव (व्यय) के पत्र को सार्वजनिक करने की चुनौती पर वित्त मंत्री ने पलटवार करते हुए इसे ‘झूठी बहादुरी’ करार दिया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह पत्र मिल चुका है, लेकिन वे जानबूझकर इसकी गलत व्याख्या कर रहे हैं. सीतारमण ने कहा, ‘अगर यह पत्र उनके पक्ष को मजबूत करता, तो वे खुद इसे सार्वजनिक कर देते. हमें इस पत्र को सार्वजनिक करने में कोई झिझक नहीं है.’
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