'तथ्यों को तोड़ना बंद करें CM स्टालिन', बोनस विवाद पर वित्त मंत्री का पलटवार - विदेशियों का फायदा करा रही DMK!

मुख्यमंत्री स्टालिन द्वारा सचिव (व्यय) के पत्र को सार्वजनिक करने की चुनौती पर वित्त मंत्री ने पलटवार करते हुए इसे ‘झूठी बहादुरी’ करार दिया.

Nirmala Sitharaman
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की ओर से केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोपों को लेकर उन पर तीखा हमला बोला है. वित्त मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री स्टालिन और उनकी पार्टी DMK का काम केवल केंद्र और राज्यों के बीच दरार पैदा करना और झूठा नैरेटिव बनाना रह गया है. साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र विरोधी बयानबाजी में समय बर्बाद करने के बजाय, CM स्टालिन को तमिलनाडु के लोगों को यह समझाना चाहिए कि वह हमें दालों और तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने के बजाय असल में विदेशी हितों को मौके क्यों दे रहे हैं.

निर्मला सीतारमण ने स्टालिन के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जब जरूरी खाने की चीजें इंपोर्ट पर निर्भर करती हैं, तो घरेलू फूड सिक्योरिटी बाहरी झटकों और कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति कमजोर हो जाती है. यह भारत जैसे बड़े देश के लिए सस्टेनेबल नहीं है. दालों और तिलहनों का घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाना न सिर्फ एक आर्थिक जरूरत है, बल्कि एक स्ट्रेटेजिक जरूरत भी है.’

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‘सीएम स्टालिन के मन में किसान नहीं’

साथ ही उन्होंने कहा कि क्या उन्हें नहीं पता कि पाम ऑयल का भारी इंपोर्ट इसलिए होता है क्योंकि खाने के तेल की हमारी डिमांड तिलहनों की सप्लाई से ठीक से पूरी नहीं हो पाती है. दालों के साथ भी यही दिक्कत है. किसानों को उन फसलों के लिए बेहतर दाम मिल सकते हैं जिनमें सप्लाई-डिमांड का अंतर होता है. इससे साफ होता है कि CM स्टालिन के मन में किसानों का हित नहीं है.

उन्होंने कहा कि राज्यों को लिखा गया यह पत्र नेशनल फूड सिक्योरिटी की जिम्मेदारी शेयर करने का न्योता है. ज्यादातर राज्यों सरकारों ने पार्टी लाइन से हटकर इस बात को समझा और सहकारी संघवाद की भावना से जवाब दिया. लेकिन सिर्फ सीएम स्टालिन ने इस मामले को सनसनीखेज बनाने का फैसला किया.

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‘क्यों नहीं पब्लिक किया लेटर’

मुख्यमंत्री स्टालिन द्वारा सचिव (व्यय) के पत्र को सार्वजनिक करने की चुनौती पर वित्त मंत्री ने पलटवार करते हुए इसे ‘झूठी बहादुरी’ करार दिया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह पत्र मिल चुका है, लेकिन वे जानबूझकर इसकी गलत व्याख्या कर रहे हैं. सीतारमण ने कहा, ‘अगर यह पत्र उनके पक्ष को मजबूत करता, तो वे खुद इसे सार्वजनिक कर देते. हमें इस पत्र को सार्वजनिक करने में कोई झिझक नहीं है.’

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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