---विज्ञापन---

देश angle-right

‘वो निर्देश नहीं, सलाह थी…’, बोनस नीति पर पत्र को लेकर CM स्टालिन के आरोपों को केंद्र ने किया खारिज

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने अपने हालिया भाषण में वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा 9 जनवरी 2026 को राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे गए एक 'डी.ओ. पत्र' का जिक्र किया था. उन्होंने इसे राज्यों के अधिकारों पर बोझ बताया था.

---विज्ञापन---

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने हाल ही में केंद्र सरकार पर राज्य सरकारों की बोनस नीति में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था. इन आरोपों पर अब वित्त मंत्रालय ने तथ्यों को सामने रखा है. केंद्र सरकार ने साफ किया है कि राज्यों को भेजा गया पत्र कोई ‘निर्देश’ नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित में दी गई एक सकारात्मक सलाह थी.

क्या है पूरा विवाद?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने अपने हालिया भाषण में वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा 9 जनवरी 2026 को राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे गए एक ‘डी.ओ. पत्र’ का जिक्र किया था. उन्होंने इसे राज्यों के अधिकारों पर बोझ बताया था. अब वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस पत्र का उद्देश्य किसी थोपी गई नीति को लागू करना नहीं, बल्कि फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है.

---विज्ञापन---

वित्त मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार विभिन्न फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है. हालांकि, उत्तर भारत में गेहूं और बाकी राज्यों में धान की खेती का झुकाव बहुत अधिक है. जब राज्य सरकारें इन चुनिंदा फसलों पर अतिरिक्त बोनस देती हैं, तो किसान दालों, तिलहनों और मोटे अनाज की खेती छोड़ देते हैं. धान और गेहूं की अधिक खेती से पानी और उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग होता है, जिससे पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है.

केंद्र सरकार का तर्क

केंद्र सरकार का तर्क है कि भारत को दालों और खाद्य तेलों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर रहना पड़ता है, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित होता है. आयातित तेल पर निर्भरता 2015-16 के 63.2% से घटकर 2023-24 में 56.25% रह गई है. राज्यों से आग्रह किया गया है कि वे अपनी बोनस नीति को दालों और तिलहनों के पक्ष में मोड़ें ताकि भारत इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन सके.

---विज्ञापन---

‘तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना गलत’

सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस पत्र को एक “थोपी गई चीज” के रूप में पेश करना या इसके उद्देश्य को गलत समझना तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने जैसा है. यह केंद्र और राज्यों की साझा जिम्मेदारी है कि वे मिलकर किसानों के मुनाफे और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा की रक्षा करें.

First published on: Apr 12, 2026 08:19 PM

End of Article
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola