कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उग्र आंदोलन के कारण धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. वहीं अब उनके इस्तीफे को लेकर नई जानकारी सामने आई है. सूत्रों के अनुसार, छात्र आंदोलन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने 2 बार सरकार को अपना इस्तीफा ऑफर किया था, लेकिन दोनों बार इस्तीफा ठुकरा दिया गया. तीसरी बार जब उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की तो सरकार ने हामी भर दी और 25 जुलाई 2026 को इस्तीफा देकर धर्मेंद्र प्रधान पद से मुक्त हो गए. उनकी जगह प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया.
सुरक्षा एजेंसियों के अलर्ट के बाद मंजूर हुआ इस्तीफा
सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, CJP के छात्र आंदोलन का दायरा बढ़ने, सुरक्षा एजेंसियों के अलर्ट और देश के अंदर कानून व्यवस्था बिगड़ने की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चिंताओं के कारण मंजूर किया गया. 2 बार इस्तीफा रिजेक्ट किया गया, क्योंकि सरकार का मनाना था कि इस्तीफा समस्या का समाधान नहीं हो सकता, बल्कि एजुकेशन सिस्टम में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने से छात्र शांत होंगे. इसलिए धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा सुधारों को लागू करने की जिम्मेदारी निभाने के लिए कहा गया और दोनों बार उनकरा इस्तीफा रिजेक्ट कर दिया गया.
CJP से दूसरे दौर की बातचीत के बाद बदला फैसला
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि पद से इस्तीफा देना आसान है, लेकिन यह जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने जैसा है. अपनी गलती स्वीकार करने जैसा है, जबकि गलती की ही नहीं है. मोदी सरकार की सोच समस्या से भागने और पीछे हटने की बजाय उसका समाधान निकलाने की रही है. लेकिन सरकार को यह सोच तब बदलनी पड़ी, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई और केंद्र सरकार को सुरक्षा एजेंसियों का अलर्ट मिला. वहीं CJP ने 20 जुलाई के संसद मार्च जैसा एक और मार्च निकालने की चेतावनी दी.
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया इस्तीफा
केंद्र सरकार पर पहले से ही 20 जुलाई के संसद मार्च में पुलिस की कार्रवाई को लेकर आरोप लग रहे थे. वहीं सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कुछ असामाजिक और राष्ट्र विरोधी तत्व छात्र आंदोलन की आड़ में अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं. दिल्ली पुलिस ने फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए 400 ऐसे लोगों की पहचान की, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड मिला. इसके बाद केंद्र सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखना और तनाव को बढ़ने से रोकने का फैसला किया. धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने को कहा और इस्तीफा लेने के बाद छात्र आंदोलन खत्म हो गया.
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