कांग्रेस का धरना: क्या स्पीकर की मंजूरी के बिना MPs को हिरासत में ले सकती है पुलिस? जानिए क्या कहता है कानून

कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को आज पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसके बाद ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये संसद के विशेषाधिकार का उल्लंघन है या हिरासत में लेने से पहले स्पीकर की मंज़ूरी लेनी ज़रूरी है.

Congress protest

Credit: News24

मंगलवार को धरने पर बैठे कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसके बाद ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस तरह किसी सांसद को घसीटकर हिरासत में लेना या गिरफ्तार करना सही है. क्या ये संसद के विशेषाधिकार का उल्लंघन है या हिरासत में लेने से पहले स्पीकर की मंज़ूरी लेनी ज़रूरी है. सुप्रीम कोर्ट के वकील और लॉ एक्सपर्ट आर के सिंह ने इन सवालों के जवाब दिए.

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क्या है सच?

आर के सिंह के मुताबिक, अगर पुलिस को लगता है कि अगर कानून-व्यवस्था के हालात बेकाबू हो रहे हैं तो वो सांसदों समेत किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ले सकती है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास के आसपास का इलाका संवेदनशील माना जाता है. अगर कोई भी इस इलाके में विरोध प्रदर्शन में शामिल होता है या उसका नेतृत्व करता है तो पुलिस उसके खिलाफ एक्शन ले सकती है. आर के सिंह ने कहा कि भारतीय कानून के तहत, अगर किसी सांसद को गंभीर अपराध (हत्या, भ्रष्टाचार या दंगे) के मामले में पुलिस हिरासत में लेती है, तो उसके लिए स्पीकर से मंज़ूरी लेना ज़रूरी नहीं होता.

किन मामलों में सूचित करना ज़रूरी

आर के सिंह ने कहा कि अगर किसी सांसद को गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है, तो पुलिस को बिना किसी देरी के लोकसभा स्पीकर को सूचित करना अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि सांसदों को गिरफ्तारी से सुरक्षा सिर्फ दीवानी मामलों में ही दी जाती है. ये सुरक्षा संसद सत्र शुरू होने से 40 दिन पहले, सत्र के दौरान और खत्म होने के 40 दिन बाद तक लागू रहती है. लेकिन ये छूट क्रिमिनल केस पर लागू नहीं होती.

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संसद परिसर में अलग हैं नियम

आर पी सिंह ने बताया कि संसद परिसर में अगर कोई हिरासत या गिफ्तार किया जाता है, तो उसके नियम बिल्कुल अलग है. उन्होंने कहा कि संसद में लोकसभा स्पीकर की मंज़ूरी के बिना ऐसा करना मुमकिन नहीं है. कानून एक्सपर्ट ने कहा कि सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि बिना स्पीकर की सहमति के किसी सांसद को परिसर के अंदर कानूनी समन या नोटिस भी नहीं दिया जा सकता, लेकिन ये नियम संसद की चार दीवारों तक ही लागू होते हैं. उन्होंने कहा कि आज पीएम आवास के बाहर से जिन सांसदों को हिरासत में लिया गया, उसके लिए स्पीकर की मंज़ूरी जरूरी नहीं थी.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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