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CISF महानिदेशक ने चंडीगढ़ में की उच्च स्तरीय परिचालन समीक्षा बैठक, हवाई अड्डों की सुरक्षा पुख्ता करने पर मुख्य जोर

महिला कमांडो और QRT का सशक्तिकरण हवाई अड्डों पर तैनात रहने वाले विशेष क्विक रिएक्शन टीम की युद्धक क्षमता को मजबूत करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. अब तक 49 विमानन सुरक्षा समूहों के 659 कमांडो बैटल इनोकुलेशन ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं.

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केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण परिचालन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य सीआईएसएफ के नार्थ सेक्टर और हवाई अड्डा क्षेत्र की परिचालन तैयारियों, सामरिक रणनीतियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं का नए तरीके से समीक्षा करना था.

बैठक में सीआईएसएफ के सीनियर ऑफिसर और अलग-अलग सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के कमांडरों ने हिस्सा लिया. इस दौरान संवेदनशील राष्ट्रीय प्रतिष्ठानों और नागरिक उड्डयन क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने, आपातकालीन स्थिति से निपटने की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नई रणनीति के साथ ही और इसमें क्या बेहतर हो सकता है उसपे भविस्य के लिए रोडमैप तैयार किया गया है.

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सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशीलता और ड्रोन चुनौतियां जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात जैसे संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राज्यों में उभरती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह समीक्षा बैठक की गई थी. डीजी सीआईएसफ ने सीमावर्ती क्षेत्रों में हाल के दिनों में सामने आईं ड्रोन संबंधी चुनौतियों,एंटी-सैबोटेज उपायों और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की भी समीक्षा की.

लो-एल्टीट्यूड यानी कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सीआईएसएफ ने भारतीय सेना के सहयोग से अपने जवानों के लिए एक चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है. इसके तहत जवानों को संदिग्ध मानवरहित हवाई प्रणालियों की पहचान करने, उन्हें ट्रैक करने और निष्क्रिय करने का कड़ी ट्रैनिंग दी जा रही है.

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भारतीय सेना और एनडीआरएफ के साथ साझा युद्धाभ्यास आतंकवाद विरोधी अभियानों, तुरंत अटैक और आपातकालीन प्रबंधन में आपसी तालमेल को बेहतर बनाने के लिए सीआईएसएफ भारतीय सेना और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार संयुक्त अभ्यास कर रही है. सीआईएसफ के जवान सेना के अलग -अलग संस्थानों और NDRF के साथ विशेष बैटल अभ्यास कर रहे हैं.

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देश के सभी एयरपोर्ट पर ज्यादा से ज्यादा मॉडर्न टेक्नोलॉजी अपना कर सुरक्षा को और ज्यादा बेहतर करने का भी खाखा तैयार किया गया है. डिजी यात्रा और आधार सत्यापन: यात्रियों के सुगम, कागज रहित और बायोमेट्रिक्स-आधारित आवागमन को सुनिश्चित करता है और सुरक्षित पहचान सत्यापन को मजबूत बनाता है.

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एनालिटिक्स: यात्रियों की अत्याधुनिक बि-इंट्रूसिव सुरक्षा जांच सुनिश्चित करता है और संभावित खतरों की स्वचालित पहचान व रियल-टाइम मैपिंग में मदद करता है. केंद्रीकृत एक्सेस कंट्रोल और पेरीमीटर इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम यानी PIDS संवेदनशील टर्मिनल क्षेत्रों के भीतर कर्मचारियों की आवाजाही को नियंत्रित व मॉनिटर करता है और हवाई अड्डे की बाहरी सीमाओं को घुसपैठ से सुरक्षित रखता है.

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ऑटोमेटेड ट्रे रिटर्न सिस्टम यानी ATRS और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल सिस्टम केबिन बैगेज की जांच प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाता है, साथ ही संभावित विस्फोटक खतरों की तत्काल पहचान कर उन्हें निष्क्रिय करने की अचूक क्षमता प्रदान करता है.

महिला कमांडो और QRT का सशक्तिकरण हवाई अड्डों पर तैनात रहने वाले विशेष क्विक रिएक्शन टीम की युद्धक क्षमता को मजबूत करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. अब तक 49 विमानन सुरक्षा समूहों के 659 कमांडो बैटल इनोकुलेशन ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं. सीआईएसफ का लक्ष्य साल 2026 के अंत तक देश के सभी 72 हवाई अड्डों पर तैनात क्यूआरटी कर्मियों को इस कड़े सैन्य प्रशिक्षण से लैस करना है.

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First published on: May 29, 2026 11:14 PM

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