मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा पर हुए उपचुनाव के आज नतीजे घोषित किए गए, जिसमें कांग्रेस ने बाज़ी मार ली. कांग्रेस के उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से मात दी. कांग्रेस उम्मीदवार को कुल 66,575 वोट मिले, जबकि आशुतेष तिवारी के पाले में 60,741 वोट आए. हैरानी की बात ये है कि नरोत्तम मिश्रा के इलाके वाले पोलिंग बूथ पर भी बीजेपी हार गई. अब सवाल ये उठता है कि बीजेपी का गढ़ कही जाने वाली दतिया विधानसभा सीट उसके हाथ से कैसे फिसल गई. आइए इस बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं.
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क्या है हार की वजह?
- दतिया में बीजेपी की हार की सबसे बड़ी वजह रही नरोत्तम मिश्रा को टिकट ना देना. बीजेपी ने ‘चेहरा बदलो’ की नीति अपनाते हुए आशुतोष तिवारी को टिकट दिया, जिससे नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को काफी ठेंस पहुंची थी.
- नाराज़गी यहां तक थी कि नरोत्तम मिश्रा के कई समर्थकों ने पार्टी से इस्तीफा तक देने का ऐलान कर दिया था. नरोत्तम मिश्रा बार-बार ये कहते नज़र आए कि उन्हें पार्टी आलाकमान से कोई नाराज़गी नहीं है, लेकिन वो भी टिकट ना मिलने का दुख नहीं छिपा पाए और एक बार मंच पर भावुक हो गए.
- नरोत्तम मिश्रा ने मंच पर भीगी आंखों से कहा था कि वो घर-घर जाकर आशुतोष तिवारी के लिए वोट मांगेंगे, उनके शब्द कुछ और थे और आंखें कुछ और बयां कर रही थी. नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं ने उनके समर्थकों को और भी आहत कर दिया. शायद इसी का असर उपचुनाव के नतीजों में भी दिखा.
- इस पूरे चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह और नरोत्तम मिश्रा की दोस्ती ने भी काफी सुर्खियां बटोरीं. ये मुद्दा सबसे ज्यादा राजेंद्र भारती ने उठाया, जिन्हें हाल ही में कांग्रेस ने पार्टी से निकाला है. ऐसे में ये भी माना जा रहा है कि कांग्रेस की जीत की एक ये भी वजह हो सकती है.
- नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में जो प्रदर्शन हुए, उससे बीजेपी की इमेज को काफी ठेंस पहुंची है. युवा वर्ग में पार्टी को लेकर काफी आक्रोश देखने को मिला. शायद दतिया उपचुनाव में बीजेपी को इसी का खामियाज़ा भुगतना पड़ा है.
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