गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी ने एक बार फिर कब्जा जमा लिया है. बीजेपी का गढ़ कही जाने वाली इस सीट पर उम्मीदवार सतेंद्रभाई पटेल ने 55,481 वोट हासिल कर कांग्रेस को करारी मात दी है. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवाद भीखाभाई रबारी को 30,630 वोटों से हरा दिया. कांग्रेस के पाले में सिर्फ 24,851 वोट आए. आपको बता दें कि ये सीट दिवंगत विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद खाली हुई थी. अब उपचुनाव में एक बार फिर बीजेपी ने मांजलपुर सीट पर खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया और सत्ता फिर से उसके हाथ में आ गई.
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कौन हैं सतेंद्रभाई पटेल?
62 साल के सतेंद्र गोविंदभाई पटेल को सतीश पटेल के नाम से भी जाना जाता है. अपने चुनावी हलफनामे में उन्होंने खुद को किसान, कारोबरी और समाजसेवी बताया है. सतेंद्रभाई पटेल ने साल 1983 में वडोदरा से 10वीं की पढ़ाई पूरी की. उनकी पत्नी एक हाउस वाइफ हैं.हलफनामे के मुताबिक, सतेंद्रभाई पटेल के पास 51.52 करोड़ की संपत्ति है और उनके ऊपर किसी तरह का कोई क्रिमिनल केस नहीं है. बीजेपी नेता के करियर की अगर बात करें, तो वो लंबे वक्त से गुजरात के कोऑपरेटिव सेक्टर और सोशल एक्टिविटीज़ से जुड़े रहे हैं. हालांकि सतेंद्रभाई पटेल बीजेपी के बाकी नेताओं के मुकाबले कम एक्टिव रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद भी बीजेपी ने उन्हें मांजलपुर के लिए अपना उम्मीदवार चुना.
क्यों खास है मांजलपुर सीट?
मांजलपुर सीट का इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है. इस सीट को साल 2008 में परिसीमन के बाद पहचान मिली और तभी से यहां बीजेपी का शासन रहा है. दिवंगत नेता योगेश पटेल ने 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की. लेकिन उनके निधन के बाद ये सीट खाली हो गई और अब 2026 के उपचुनाव में एक बार फिर बीजेपी ने बाज़ी मार ली. बीजेपी उम्मीदवार की शानदार जीत के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं और सतेंद्रभाई के समर्थकों ने मिलकर जश्न मनाया. कांग्रेस उम्मीदवार ने चुनाव में हुई हार के बाद कहा कि वो जनता के फैसले का सम्मान करते हैं. साथ ही उन्होंने ये आरोप लगाया कि चुनाव के आखिरी चरण में डर का माहौल बन गया था, जिससे मतदान निष्पक्ष नहीं रहा. वहीं, इस पूरे चुनाव में सबसे हैरानी की बात ये है कि बीजेपी और कांग्रेस के बाद तीसरे नंबर पर NOTA रहा. करीब 2247 लोगों ने किसी भी पार्टी को वोट ना देकर NOTA का बटन दबाया. इसी वजह से वो तीसरे नंबर पर रहा.
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